लखनऊ, 27 अक्टूबर 2025। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार अब सरकारी इमारतों को दिव्यांग हितैषी बनाने की दिशा में एक ठोस कदम बढ़ाने जा रही है। सुगम्य भारत अभियान (Accessible India Campaign) के तहत राजधानी लखनऊ के पांच प्रमुख सरकारी भवनों का कायाकल्प किया जाएगा। इन भवनों को आधुनिक Accessible Infrastructure में तब्दील करने के लिए 12 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि स्वीकृत की गई है।
इस परियोजना का मकसद दिव्यांगजनों को सरकारी सेवाओं तक सहज और सम्मानजनक पहुंच दिलाना है — ताकि “सशक्त भारत” की परिकल्पना केवल नीतियों में नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर साकार हो सके।
लखनऊ के ये 5 भवन होंगे दिव्यांग-अनुकूल
सुगम्य भारत अभियान के दूसरे चरण में लखनऊ के जिन भवनों को दिव्यांग हितैषी बनाया जाएगा, उनमें शामिल हैं:
- योजना भवन (हैवलॉक रोड)
- सिंचाई भवन (कैनाल कॉलोनी, कैंट रोड)
- जिला सेवायोजन कार्यालय (लालबाग)
- विकास अनुवेषण, मूल्यांकन एवं प्रशिक्षण प्रभाग (कालाकांकर हाउस, पुराना हैदराबाद)
- सूडा नवचेतना केंद्र (10, अशोक मार्ग)
इन भवनों का चयन विशेषज्ञ टीमों द्वारा किए गए एक्सेस ऑडिट के आधार पर हुआ है।
रैंप से लेकर ब्रेल साइनेज तक – होंगे अंतरराष्ट्रीय स्तर के मानक
प्रस्तावित कार्यों में न केवल भवनों के भौतिक स्वरूप में बदलाव होगा, बल्कि दिव्यांगजनों की आवागमन और सूचना-सुगमता पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।
इन भवनों में होंगी ये प्रमुख सुविधाएं:
- रैंप और व्हीलचेयर फ्रेंडली लिफ्ट्स
- ब्रेल साइनेज और गाइड पाथ
- साइन लैंग्वेज अलर्ट सिस्टम
- विशेष पार्किंग स्पेस और टैक्टाइल पाथवे
- व्हीलचेयर अनुकूल शौचालय इकाइयां
लिफ्ट का आकार इस तरह डिजाइन किया जाएगा कि उसमें व्हीलचेयर सहित दो व्यक्ति आराम से जा सकें। दृष्टिबाधितों के लिए ब्रेल लिपि का प्रयोग व्यापक रूप से किया जाएगा, वहीं श्रवणबाधितों के लिए साउंड-विजुअल अलार्म सिस्टम लगाया जाएगा।
“दिव्यांगजन समाज का सम्माननीय हिस्सा हैं” – सरकार का संदेश
राज्य सरकार का कहना है कि यह पहल केवल इमारतों को दिव्यांगों के लिए सुविधाजनक बनाने का प्रयास नहीं है, बल्कि यह सम्मानजनक और समान अवसरों वाले समाज की दिशा में एक प्रतीकात्मक कदम है।
सरकारी प्रवक्ता के अनुसार,
“योगी सरकार चाहती है कि हर नागरिक — चाहे वह दिव्यांग हो या वरिष्ठ नागरिक — सरकारी दफ्तरों तक बिना किसी बाधा के पहुंच सके। यही असली सुगम शासन की भावना है।”
केंद्र-राज्य मिलकर बना रहे समावेशी ढांचा
यह परियोजना केंद्र सरकार के सहयोग से चलाई जा रही है और इसका लक्ष्य वर्ष 2025-26 तक लखनऊ को ‘मॉडल सिटी ऑफ एक्सेसिबिलिटी’ बनाना है। इस दिशा में अन्य जिलों में भी ऐसी परियोजनाओं को चरणबद्ध तरीके से लागू करने की योजना है।
निष्कर्ष: Accessible Infrastructure से बदलेगा दृष्टिकोण
योगी सरकार की यह पहल केवल निर्माण कार्य नहीं, बल्कि दृष्टिकोण में बदलाव की शुरुआत है। अब सरकारी भवन सिर्फ प्रशासनिक कार्यों का केंद्र नहीं रहेंगे — बल्कि वे समावेशिता, समानता और सम्मान की पहचान बनेंगे।








