लखनऊ, 29 सितंबर 2026। उत्तर प्रदेश में उच्च शिक्षा से जुड़े आंकड़ों को अधिक सटीक और भरोसेमंद बनाने पर योगी सरकार ने जोर दिया है। उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने एआईएसएचई (अखिल भारतीय उच्च शिक्षा सर्वेक्षण) में दर्ज होने वाली प्रत्येक जानकारी को मूल अभिलेखों से मिलान करने के बाद ही अपलोड करने के निर्देश दिए हैं। उनका कहना है कि उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भविष्य की योजनाओं और संसाधनों की जरूरत तय करने के लिए सही आंकड़े बेहद जरूरी हैं।
डा. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, लखनऊ में सोमवार को आयोजित राज्य स्तरीय एआईएसएचई कार्यशाला में उच्च शिक्षा मंत्री ने कहा कि एआईएसएचई में आंकड़े भरने की प्रक्रिया को महज औपचारिकता नहीं समझा जाना चाहिए। विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों से मिलने वाले आंकड़ों के आधार पर ही सरकार नए संस्थानों, शिक्षकों, पाठ्यक्रमों और आधारभूत सुविधाओं की जरूरत का आकलन करती है।
एआईएसएचई डाटा में सटीकता पर विशेष जोर
उच्च शिक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार की योजनाएं और नीतियां उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर तैयार होती हैं। ऐसे में गलत, अधूरी या बिना सत्यापन की जानकारी आगे चलकर योजना निर्माण को प्रभावित कर सकती है। उन्होंने विश्वविद्यालयों, संबद्ध महाविद्यालयों और अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों का एआईएसएचई डाटा नियमित रूप से अपडेट कराने के निर्देश दिए।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि पोर्टल खुलने के बाद अंतिम तिथि का इंतजार करने के बजाय समय रहते डाटा पूरा किया जाए। नामांकन, रिक्तियां, पाठ्यक्रम, परीक्षा, परिणाम और आधारभूत ढांचे से संबंधित जानकारी को मूल रिकॉर्ड से मिलाने के बाद ही अंतिम रूप दिया जाए।
मंत्री ने अंतिम अनुमोदन से पहले क्रॉस-वेरिफिकेशन और आवश्यकता के अनुसार रैंडम जांच कराने को भी कहा। उनका स्पष्ट निर्देश था कि कोई पात्र और संचालित शिक्षण संस्थान केवल प्रशासनिक लापरवाही के कारण सर्वेक्षण से बाहर नहीं रहना चाहिए। इसके लिए लक्ष्य जीरो पेंडेंसी रखने पर जोर दिया गया।
एआईएसएचई कोड के बाद समय पर डाटा देना जरूरी
कार्यशाला में यह भी चर्चा हुई कि कई संस्थान एआईएसएचई कोड मिलने के बाद समय पर अपना डाटा उपलब्ध नहीं कराते हैं। इससे संबंधित संस्थान का स्टेटस निष्क्रिय हो सकता है, जिसका असर आगे विद्यार्थियों और संस्थान से जुड़ी प्रक्रियाओं पर पड़ सकता है।
अधिकारियों को ऐसे मामलों पर विशेष निगरानी रखने और संस्थानों से समय पर जानकारी उपलब्ध कराने के लिए समन्वय मजबूत करने के निर्देश दिए गए।
विश्वविद्यालय रिकॉर्ड और एआईएसएचई डाटा में हो एकरूपता
अपर मुख्य सचिव, उच्च शिक्षा अमित कुमार घोष ने कहा कि एआईएसएचई डाटा तैयार करना केवल किसी एक अधिकारी या नोडल अधिकारी की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे संस्थान की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने विश्वविद्यालय के रिकॉर्ड और एआईएसएचई में दर्ज जानकारी के बीच एकरूपता सुनिश्चित करने पर बल दिया।
उन्होंने संबद्धता सूची के मिलान तथा गलत या दोहरी रिपोर्टिंग को रोकने के लिए अभिलेखों की जांच जरूरी बताई। साथ ही, डाटा में होने वाले किसी भी असामान्य बदलाव की समीक्षा करने के निर्देश दिए।
अमित कुमार घोष ने कहा कि कार्यशाला में सामने आए सुझावों के आधार पर एक एसओपी (मानक संचालन प्रक्रिया) तैयार की जाएगी, ताकि एआईएसएचई डाटा संग्रह और सत्यापन की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाया जा सके।
डाटा अपलोड से ज्यादा जरूरी उसका विश्लेषण
अपर मुख्य सचिव ने यह भी कहा कि डाटा अपलोड करना पूरी प्रक्रिया का केवल एक हिस्सा है। वास्तविक महत्व इस बात का है कि उपलब्ध आंकड़ों का विश्लेषण किया जाए और उनसे सामने आने वाले गैप की पहचान की जाए। इसी आधार पर उच्च शिक्षा के क्षेत्र में आवश्यक सुधार और संसाधनों की दिशा तय की जा सकती है।
कार्यशाला में निदेशक उच्च शिक्षा प्रो. मोनिका सिंह, आरएमएलएनएलयू के कुलपति प्रो. डा. अमर पाल सिंह, एआईएसएचई की अपर महानिदेशक संगीता नर्मदेश्वर, रजिस्ट्रार केशव कुमार, राज्य नोडल अधिकारी प्रो. दिनेश चंद्र शर्मा और उच्च शिक्षा परिषद के अपर सचिव डा. दिनेश के. राजपूत सहित संबंधित अधिकारी और विभिन्न विश्वविद्यालयों के नोडल अधिकारी मौजूद रहे।
तकनीकी सत्र के दौरान डीसीएफ, एआईएसएचई पोर्टल और विश्वविद्यालयों से जुड़ी अलग-अलग तकनीकी एवं प्रक्रियागत समस्याओं पर भी चर्चा की गई। कार्यशाला का जोर इस बात पर रहा कि उत्तर प्रदेश में उच्च शिक्षा का डाटा केवल समय पर उपलब्ध ही न हो, बल्कि उसकी विश्वसनीयता और उपयोगिता भी सुनिश्चित की जाए।










