प्रयागराज (रविवार, 08 फरवरी 2026)। महाराष्ट्र की राजनीति के चर्चित चेहरे और पूर्व उप मुख्यमंत्री अजित पवार की अस्थियां रविवार को तीर्थराज प्रयागराज के पवित्र संगम में विधि-विधान के साथ विसर्जित की गईं। इस अवसर पर उनके परिवार के सदस्य मौजूद रहे और माहौल गमगीन बना रहा। मंत्रोच्चार के बीच हुए इस अनुष्ठान में कई क्षण ऐसे आए, जब परिजनों की आंखें नम हो गईं।
अजित पवार, जिन्हें राजनीतिक हलकों में ‘अजीत दादा’ के नाम से जाना जाता था, का 28 जनवरी को विमान हादसे में निधन हो गया था। अंतिम संस्कार के बाद परिवार अस्थि कलश लेकर संगम पहुंचा, जहां वैदिक रीति से पूजन कर अस्थियों को गंगा-यमुना-सरस्वती के संगम में प्रवाहित किया गया।
वीआईपी घाट से स्टीमर द्वारा संगम तक पहुंचे परिजन
परिवार के सदस्य वीआईपी घाट से स्टीमर पर सवार होकर संगम स्थल तक पहुंचे। वहां अजित पवार के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की गई। उनके छोटे बेटे जय पवार ने परिवार के साथ पूरे अनुष्ठान में भाग लिया। संगम तट पर मौजूद श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों ने भी श्रद्धांजलि दी।
तीर्थ पुरोहितों ने कराया अस्थि शुद्धि और पूजन
तीर्थ पुरोहित राजेश तिवारी, गोविंद मिश्र और अंकुश शर्मा ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ अस्थि शुद्धि कराई। विधि-विधान से पूजन के बाद अस्थियों का विसर्जन किया गया। अनुष्ठान के दौरान परिवार के कई सदस्य भावुक हो उठे।
विमान हादसे में हुई थी मृत्यु
बताया गया कि 28 जनवरी को पुणे जिले के उनके गृहनगर बारामती के समीप एक विमान दुर्घटना में उनका निधन हुआ था। हादसा हवाई अड्डे के टेबलटॉप रनवे से लगभग 200 मीटर पहले हुआ। इस खबर ने पूरे महाराष्ट्र समेत देशभर में उनके समर्थकों को स्तब्ध कर दिया था।
अस्थि कलश यात्रा: कश्मीर से कन्याकुमारी तक श्रद्धांजलि
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की युवा इकाई के नेतृत्व में अजित पवार की अस्थि कलश यात्रा देश के कई राज्यों से होकर गुजरी। पार्टी पदाधिकारियों के अनुसार, हर राज्य में समर्थकों ने श्रद्धा-सुमन अर्पित किए। हरिद्वार से लेकर तेलंगाना तक इस यात्रा को व्यापक जनसमर्थन मिला।
तीर्थराज प्रयाग में हुआ समापन
अस्थि कलश यात्रा का समापन तीर्थराज प्रयाग में हुआ। परिवार के सदस्य रविवार को चार्टर्ड विमान से प्रयागराज पहुंचे। पार्टी कार्यकर्ताओं और विशिष्टजनों ने संगम तट पर श्रद्धांजलि दी, जिसके बाद अस्थि विसर्जन की प्रक्रिया पूरी की गई।
अजित पवार की राजनीतिक पकड़ और जनसंपर्क क्षमता उन्हें महाराष्ट्र की राजनीति में अलग पहचान दिलाती थी। उनके निधन से समर्थकों और कार्यकर्ताओं में शोक की लहर है। संगम में अस्थि विसर्जन के साथ एक भावुक अध्याय का समापन हुआ, लेकिन समर्थकों की स्मृतियों में ‘अजीत दादा’ की छवि लंबे समय तक जीवित रहेगी।








