नई दिल्ली/15 अक्टूबर 2026: केंद्र सरकार माओवाद से प्रभावित क्षेत्रों में हिंसा के घाव भरने और पीड़ितों को सम्मानजनक जीवन देने पर जोर दे रही है। गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए दिव्यांगजनों को संबोधित करते हुए कहा कि माओवाद के खात्मे के बाद उसकी हर निशानी मिटाने और हिंसा से प्रभावित लोगों के जीवन में नई उम्मीद जगाने की जरूरत है। कार्यक्रम में नक्सली हिंसा के शिकार ऐसे लोग भी शामिल थे, जिन्हें कृत्रिम अंग उपलब्ध कराए गए हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के कार्यकाल से जुड़े सेवा संकल्प अभियान के तहत आयोजित इस कार्यक्रम में अमित शाह ने विशेष रूप से बस्तर का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि यहां से 1,570 से अधिक लाभार्थी जुड़े हैं। उनके मुताबिक, यह संख्या क्षेत्र में माओवादी हिंसा से प्रभावित लोगों की पीड़ा को दर्शाती है।
अमित शाह का माओवाद मुक्त भारत का संकल्प, पीड़ितों के पुनर्वास पर जोर
अमित शाह ने कहा कि माओवाद के कारण जिन लोगों ने अपने अंग गंवाए और जिन परिवारों ने हिंसा का दर्द सहा, उन्हें अब बेहतर जीवन देने की दिशा में काम करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि माओवाद से प्रभावित लोगों को पुनर्वास के अवसर मिलने चाहिए, ताकि वे आत्मसम्मान के साथ अपना जीवन जी सकें।
गृह मंत्री ने माओवादी हिंसा में इस्तेमाल किए गए इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (IED) का उल्लेख करते हुए कहा कि विस्फोटों के कारण निर्दोष लोग दिव्यांग हुए। उन्होंने ऐसी घटनाओं को मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन बताया।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार और छत्तीसगढ़ सरकार हिंसा से प्रभावित लोगों के पुनर्वास के प्रयासों में उनके साथ खड़ी हैं। इस पहल का उद्देश्य पीड़ितों को सहायता उपलब्ध कराने के साथ उन्हें सामाजिक जीवन में दोबारा सक्रिय भागीदारी का अवसर देना है।
बस्तर में विकास और बुनियादी सुविधाओं पर जोर
अमित शाह ने बस्तर में हो रहे विकास कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि जिन इलाकों में लंबे समय तक बुनियादी सुविधाओं की कमी रही, वहां अब सरकारी योजनाओं के माध्यम से सेवाएं पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
उन्होंने नियद नेल्लानार योजना का जिक्र किया, जिसके तहत प्रभावित क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं और सरकारी सेवाओं की पहुंच बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। सरकार की प्राथमिकताओं में स्थानीय लोगों तक विकास का लाभ पहुंचाना और क्षेत्र में सामान्य जनजीवन को मजबूत करना शामिल है।
बस्तर जैसे क्षेत्र में सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता स्थानीय परिवारों के लिए अहम है। विकास योजनाओं की वास्तविक सफलता इस बात से तय होगी कि इन सेवाओं का लाभ दूरदराज के गांवों तक कितनी प्रभावी ढंग से पहुंचता है।
बस्तर ओलंपिक और बस्तर पंडुम से संस्कृति को बढ़ावा
गृह मंत्री ने बस्तर ओलंपिक और बस्तर पंडुम जैसे आयोजनों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन पहलों के माध्यम से युवाओं को खेलों में भाग लेने और जनजातीय कला-संस्कृति को आगे बढ़ाने का अवसर मिल रहा है।
बस्तर ओलंपिक के जरिए युवाओं की खेल प्रतिभा को मंच देने और सामाजिक सहभागिता बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। वहीं, बस्तर पंडुम स्थानीय जनजातीय परंपराओं, कला और सांस्कृतिक विरासत को सामने लाने का माध्यम है।
अमित शाह के अनुसार, बस्तर में पहले भय और हिंसा से जुड़ी परिस्थितियों के बीच अब खेल और सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की कोशिश हो रही है। ऐसे आयोजन स्थानीय समुदायों के बीच जुड़ाव मजबूत करने और क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को आगे बढ़ाने में भूमिका निभा सकते हैं।
सुरक्षा शिविरों को सेवा केंद्रों में बदलने की पहल
अमित शाह ने बताया कि पूर्व में स्थापित सुरक्षा शिविरों में से 200 से अधिक को ‘शहीद वीर गुंडाधुर सेवा डेरा’ में बदलने की प्रक्रिया चल रही है। उनके अनुसार, इन केंद्रों के माध्यम से विकास कार्यों और स्थानीय लोगों की जरूरतों को पूरा करने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं।
इस पहल के तहत सुरक्षा से जुड़ी व्यवस्थाओं के साथ-साथ नागरिक सुविधाओं और विकास गतिविधियों को भी महत्व देने की बात कही गई है। इसका उद्देश्य उन क्षेत्रों में सरकारी सेवाओं की पहुंच बढ़ाना है, जहां लंबे समय तक हिंसा और असुरक्षा के कारण विकास कार्य प्रभावित हुए।
हिंसा के बाद बस्तर में सामान्य जीवन बहाल करना बड़ी चुनौती
अमित शाह के संबोधन में माओवादी हिंसा के खिलाफ कार्रवाई के साथ-साथ पीड़ितों के पुनर्वास, विकास और सांस्कृतिक गतिविधियों पर विशेष जोर दिखाई दिया। सरकार की ओर से पेश की गई योजनाओं का उद्देश्य बस्तर में सामान्य जनजीवन को मजबूत करना और लोगों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना है।
हालांकि, माओवाद से प्रभावित क्षेत्रों में स्थायी बदलाव के लिए केवल सुरक्षा अभियान पर्याप्त नहीं होंगे। शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, बुनियादी सुविधाओं और पीड़ित परिवारों के पुनर्वास पर लगातार काम करना भी जरूरी होगा।
गृह मंत्री का संदेश स्पष्ट था कि हिंसा से प्रभावित लोगों को सहायता देने और बस्तर में विकास की गति बढ़ाने के प्रयास जारी रहने चाहिए, ताकि क्षेत्र के नागरिक सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन जी सकें।













