लखनऊ (Sun, 08 Feb 2026)। अपैरल पार्क यमुना एक्सप्रेसवे परियोजना उत्तर प्रदेश की औद्योगिक रणनीति में तेज़ी से उभरता केंद्र बनती दिख रही है। राज्य सरकार, यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) क्षेत्र में 175 एकड़ भूमि पर इस विशेष पार्क को विकसित कर रही है, जिसका उद्देश्य यूपी को टेक्सटाइल और रेडीमेड गारमेंट्स निर्यात का बड़ा हब बनाना है। बेहतर कनेक्टिविटी, नीति समर्थन और तेज़ आवंटन प्रक्रिया ने निवेशकों का भरोसा मजबूत किया है।
निवेशकों का भरोसा: आवंटन के ताज़ा आंकड़े
आधिकारिक प्रगति के अनुसार 22 जनवरी 2026 तक नियोजित 173 भूखंडों में से 156 का आवंटन हो चुका है, जबकि 17 भूखंड शेष हैं। अब तक 106 इकाइयों की लीज डीड निष्पादित की जा चुकी है और 89 निवेशकों को भूमि का वास्तविक कब्जा दिया जा चुका है। यह रफ्तार राज्य के ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ मॉडल की जमीनी झलक मानी जा रही है।
कागज़ से ज़मीन तक: निर्माण ने पकड़ी चाल
परियोजना अब दस्तावेज़ों से आगे बढ़कर साइट पर आकार ले रही है। 39 इकाइयों के भवन मानचित्र स्वीकृत हो चुके हैं और 15 इकाइयों ने निर्माण कार्य शुरू कर दिया है। आवंटियों से उनकी DPR के अनुरूप टाइम-बाउंड एक्शन प्लान मांगा गया है ताकि विकास की गति बनी रहे। शेष भूखंडों के लिए भूमि क्रय प्रक्रिया शीघ्र पूरी करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
कनेक्टिविटी का लाभ: एक्सप्रेसवे और एयर कार्गो की नज़दीकी
पार्क की लोकेशन इसकी सबसे बड़ी ताकत है। यमुना एक्सप्रेसवे की उत्कृष्ट सड़क कनेक्टिविटी और निकट विकसित हो रहा नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर) निर्यात-उन्मुख इकाइयों के लिए लॉजिस्टिक्स लागत और समय—दोनों घटाएंगे। रेडीमेड गारमेंट्स जैसे समय-संवेदनशील उत्पादों के लिए यह बढ़त निर्णायक मानी जा रही है।
नीति समर्थन: ODOP और टेक्सटाइल विज़न
राज्य की ODOP पहल और टेक्सटाइल सेक्टर पर फोकस इस पार्क को नीतिगत आधार देता है। लक्ष्य है—स्थानीय एमएसएमई, स्टार्टअप्स और बड़े निवेशकों को एक साझा औद्योगिक इकोसिस्टम में जोड़ना, जहां डिजाइन, मैन्युफैक्चरिंग, पैकेजिंग और निर्यात—सब एक ही क्लस्टर में संभव हो।
रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था
इस परियोजना से हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने का अनुमान है। परिधान उद्योग श्रम-प्रधान (labour-intensive) होने के कारण युवाओं, विशेषकर महिला कार्यबल, के लिए बड़े अवसर पैदा करता है। आसपास के कस्बों और शहरों में सहायक सेवाओं—ट्रांसपोर्ट, पैकेजिंग, वेयरहाउसिंग, फूड सर्विस—की मांग भी बढ़ेगी।
समग्र रूप से, अपैरल पार्क यमुना एक्सप्रेसवे केवल एक औद्योगिक प्लॉटिंग योजना नहीं, बल्कि निर्यात-उन्मुख विनिर्माण का ऐसा केंद्र बनने की ओर बढ़ रहा है, जहां नीति, अवसंरचना और निवेश—तीनों एक साथ गति पकड़ रहे हैं।








