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आश्रम व्यवस्था से सीखा प्रशासन चलाना: हरिद्वार में सीएम योगी बोले— असली MBA भारतीय आश्रम पद्धति सिखाती है

On: February 6, 2026
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आश्रम व्यवस्था से सीखा प्रशासन चलाना
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लखनऊ/हरिद्वार, 06 फरवरी 2026 (शुक्रवार)। हरिद्वार में आयोजित श्री विग्रह मूर्ति स्थापना समारोह में मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने प्रशासनिक दक्षता की अपनी समझ को भारतीय परंपरा से जोड़ते हुए कहा— “आश्रम व्यवस्था से सीखा प्रशासन चलाना ही मेरा वास्तविक एमबीए है।” उन्होंने कहा कि भारतीय आश्रम पद्धति केवल आध्यात्मिक साधना नहीं, बल्कि जीवन, प्रबंधन और शासन का व्यावहारिक विद्यालय रही है।

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश में बदले माहौल का उल्लेख करते हुए कहा कि स्पष्ट नीति और साफ नीयत के कारण राज्य अराजकता से निकलकर विकास और सुशासन के मॉडल के रूप में उभरा है। उनके अनुसार, विरासत के सम्मान ने सुरक्षा, विश्वास और आर्थिक गतिविधियों को नई गति दी है।

विरासत, आस्था और सुशासन का त्रिकोण

मुख्यमंत्री ने कहा कि एक समय उत्तर प्रदेश में दंगों, कर्फ्यू और असुरक्षा की चर्चा होती थी, जबकि आज निवेश, बुनियादी ढांचे और पर्यटन की बात होती है। उन्होंने Ram Mandir Ayodhya के निर्माण को सांस्कृतिक आत्मविश्वास का प्रतीक बताते हुए कहा कि आस्था केंद्रों के पुनरोद्धार ने सामाजिक ऊर्जा को सकारात्मक दिशा दी।

उन्होंने यह भी जोड़ा कि अयोध्या, काशी, मथुरा-वृंदावन, प्रयागराज और हरिद्वार जैसे केंद्र अब केवल धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि राष्ट्रीय चेतना के प्रेरक बिंदु बन रहे हैं।

आश्रम पद्धति: प्रबंधन और प्रशासन का भारतीय पाठ

सीएम योगी ने कहा कि आश्रम और गुरुकुल परंपरा में कृषि, खगोल विज्ञान, आयुर्वेद, शिल्प और प्रशासन जैसे विषयों का व्यावहारिक प्रशिक्षण मिलता था। “प्रबंधन (Management) और प्रशासन (Administration) हमारे संस्कारों का हिस्सा हैं,” उन्होंने कहा। उनके अनुसार, यही कारण है कि सीमित संसाधनों में भी भारतीय समाज ने आत्मनिर्भर ढांचे खड़े किए।

माघ मेले का उदाहरण: व्यवस्था से विश्वास

मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रयागराज में चल रहे Magh Mela Prayagraj में अब तक 21 करोड़ से अधिक श्रद्धालु त्रिवेणी संगम पर स्नान कर चुके हैं। उन्होंने इसे बेहतर प्रबंधन, सुरक्षा और सुविधाओं का उदाहरण बताया, जिससे बड़े आयोजनों में व्यवस्था के प्रति लोगों का भरोसा बढ़ा है।

भारत माता मंदिर और देवभूमि की स्मृतियाँ

अपने संबोधन में उन्होंने Bharat Mata Mandir Haridwar की स्मृतियों का जिक्र किया और बताया कि बचपन में हरिद्वार आने पर हर की पैड़ी में स्नान और भारत माता मंदिर के दर्शन विशेष अनुभव होते थे। उन्होंने कहा कि यह स्थल विविधता में एकता का जीवंत प्रतीक है।

ग्राम स्वराज, कारीगर और आत्मनिर्भरता

मुख्यमंत्री ने भारत की ग्राम आधारित अर्थव्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि गांव आत्मनिर्भर इकाइयाँ थे— कृषि, पशुपालन, हस्तशिल्प और व्यापार सब स्थानीय स्तर पर होता था। उनके अनुसार, आश्रम पद्धति से दूरी और स्थानीय उत्पादन के क्षरण ने कारीगरों और किसानों पर दबाव बढ़ाया। “ग्राम स्वराज (Village Self-rule) का ताना-बाना मजबूत होगा, तो राष्ट्र की नींव भी मजबूत रहेगी,” उन्होंने कहा।

संत समाज और विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति

समारोह में रक्षा मंत्री Rajnath Singh, केंद्रीय मंत्री Manohar Lal Khattar, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami और जूना पीठाधीश्वर Swami Avdheshanand Giri सहित कई संत-धर्माचार्य मौजूद रहे। संत समाज ने मुख्यमंत्री की कार्यशैली की सराहना करते हुए उन्हें “उत्तर प्रदेश का शेर” कहा।

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