लखनऊ, 07 नवंबर 2025 (शुक्रवार)। उत्तर प्रदेश की सियासत में एक बार फिर से हलचल मची है। समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय महासचिव आज़म खान, जेल से रिहाई के बाद धीरे-धीरे राजनीतिक सक्रियता बढ़ा रहे हैं और इसी कड़ी में उन्होंने शुक्रवार को लखनऊ स्थित सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के आवास पर मुलाकात की। यह मुलाकात क़रीब 45 मिनट चली, जिसमें दोनों नेताओं ने 2027 के विधानसभा चुनावों की रणनीति पर गहन बातचीत की।
ये आज़म की अखिलेश से रिहाई के बाद दूसरी औपचारिक मुलाक़ात थी। इससे एक दिन पहले, आज़म ने मुख्तार अंसारी के बड़े भाई और पूर्व विधायक सिबगतुल्लाह अंसारी से मुलाक़ात कर राजनीतिक पारे को और चढ़ा दिया था। इन मुलाक़ातों ने साफ संकेत दे दिए हैं कि आज़म खान अब सक्रिय राजनीतिक भूमिका में वापसी को तैयार हैं।
“कुछ हाल-ए-दिल उन्होंने कहा, कुछ हाल-ए-दिल हमने कहा”: आज़म की भावुक टिप्पणी
बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में आज़म खान ने कहा, “कुछ हाल-ए-दिल उन्होंने कहा, कुछ हाल-ए-दिल हमने कहा।” इस वाक्य ने राजनीतिक गलियारों में कई शक़ और संकेत एक साथ छोड़ दिए हैं।
उन्होंने आगे कहा, “आज आने का मक़सद सिर्फ़ इतना था कि लोगों को बता दूं कि इस धरती पर अब भी कुछ ऐसे लोग जिंदा हैं जिनकी कुव्वत-ए-बर्दाश्त पत्थर और पहाड़ों से भी ज्यादा है। आज भी हजारों लोग दूर-दूर से मुझसे मिलने आते हैं, वो मेरे धर्म के भी नहीं हैं, लेकिन गले लगते हैं। यही बदलाव है… और यह बदलाव महसूस भी हो रहा है।”
“50 साल पुराना रिश्ता है, टूटने में सदियाँ लगेंगी” — रिश्ता और राजनीति पर आज़म का इमोशनल अंदाज़
राजनीतिक दूरी के सवाल पर आज़म ने साफ़ कहा, “अब दिल ही कहां रह गया है। हम तो बगैर दिल के काम कर रहे हैं।” उन्होंने अपने और अखिलेश के रिश्ते को बहुत गहरा और पुराना बताते हुए कहा, “यह रिश्ता 50 साल पुराना है। कमज़ोर होने में साल लग सकते हैं, टूटने में सदियाँ। मेरे पास शायद सदियाँ नहीं हैं, पर यह रिश्ता अगली पीढ़ी तक जाएगा।”
उन्होंने ये भी कहा कि अगर कभी इस रिश्ते पर जंग लग जाए, तो वो खुद उसे साफ़ कर देंगे—किसी और की ज़रूरत नहीं है। मुलाक़ात के दौरान उनके बेटे अब्दुल्लाह आज़म भी मौजूद थे।
अखिलेश यादव ने पोस्ट में किया जज़्बाती स्वागत
मुलाक़ात के बाद अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट साझा किया, जिसमें लिखा—“न जाने कितनी यादें संग ले आए, जब वो आज हमारे घर पर आए! ये जो मेल-मिलाप है, यही हमारी सांझी विरासत है।”
इस मुलाक़ात को राजनीतिक विश्लेषक 2027 विधानसभा चुनाव से पहले सपा के अंदर के समीकरणों को मजबूत करने के लिहाज से बेहद अहम मान रहे हैं। आज़म खान पिछले दो दिनों से लखनऊ में हैं और इस दौरान पार्टी नेताओं व पुराने साथियों से लगातार मुलाक़ातें कर रहे हैं। इससे साफ है कि उनका राजनीतिक सफ़र अब दोबारा गति पकड़ चुका है।








