नई दिल्ली|4 जून 2026: भारतीय क्रिकेट में पिछले कुछ वर्षों से एक सवाल लगातार चर्चा में है—क्या भारतीय खिलाड़ी घरेलू या अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने के तुरंत बाद विदेशी टी20 लीगों में खेलने की अनुमति पा सकते हैं? इसी मुद्दे पर गुरुवार को भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) की एपेक्स काउंसिल की बैठक में विस्तार से चर्चा हुई, लेकिन फिलहाल कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया जा सका।
दरअसल, BCCI भारतीय खिलाड़ियों के लिए एक स्पष्ट Retirement Policy यानी सेवानिवृत्ति नीति तैयार करने पर विचार कर रहा है। बोर्ड का मानना है कि इस विषय पर स्पष्ट नियमों की जरूरत है, क्योंकि हाल के वर्षों में कई भारतीय खिलाड़ियों ने क्रिकेट से संन्यास लेने के तुरंत बाद विदेशी फ्रेंचाइजी लीगों का रुख किया है।
BCCI Retirement Policy पर क्यों बढ़ी चर्चा?
इस बहस को हाल ही में नया मोड़ तब मिला जब अनुभवी ऑलराउंडर विजय शंकर ने भारतीय क्रिकेट से संन्यास की घोषणा की। संन्यास के कुछ समय बाद ही उन्होंने खुद को लंका प्रीमियर लीग (LPL) के लिए उपलब्ध कराया और 2026 सीजन के लिए कैंडी रॉयल्स ने उन्हें अपनी टीम में शामिल कर लिया।
क्रिकेट जगत में इस घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया कि क्या भारतीय क्रिकेट से संन्यास लेने वाले खिलाड़ियों के लिए विदेशी लीगों में खेलने को लेकर कोई प्रतीक्षा अवधि (Cooling-Off Period) होनी चाहिए या नहीं।
हालांकि विजय शंकर इस राह पर चलने वाले पहले खिलाड़ी नहीं हैं। इससे पहले दिनेश कार्तिक, युवराज सिंह, उन्मुक्त चंद, प्रवीण तांबे और इरफान पठान जैसे कई भारतीय क्रिकेटर विदेशी लीगों में हिस्सा ले चुके हैं। यही वजह है कि BCCI अब इस विषय पर दीर्घकालिक नीति बनाने की संभावनाएं तलाश रहा है।
मौजूदा नियम क्या कहते हैं?
वर्तमान BCCI नियमों के अनुसार कोई भी सक्रिय भारतीय क्रिकेटर विदेशी फ्रेंचाइजी लीग में भाग नहीं ले सकता। यह नियम अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों के साथ-साथ घरेलू क्रिकेट और इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) में सक्रिय खिलाड़ियों पर भी लागू होता है।
इसी कारण कई खिलाड़ी विदेशी लीगों में खेलने के लिए पहले भारतीय क्रिकेट से औपचारिक संन्यास लेने का विकल्प चुनते हैं। बोर्ड अब इसी व्यवस्था की समीक्षा कर रहा है ताकि भविष्य में स्पष्ट दिशा-निर्देश तय किए जा सकें।
सूत्रों के मुताबिक, एपेक्स काउंसिल की ऑनलाइन बैठक में इस विषय पर विचार-विमर्श हुआ, लेकिन विभिन्न पहलुओं पर और अध्ययन की जरूरत महसूस की गई। इसलिए फिलहाल कोई आधिकारिक फैसला सामने नहीं आया है।
फिजी और मालदीव में क्रिकेट विकास को मिलेगा BCCI का सहयोग
बैठक में केवल सेवानिवृत्ति नीति ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्रिकेट के विस्तार को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। BCCI ने फिजी और मालदीव के क्रिकेट बोर्डों को खेल के विकास में सहायता देने का फैसला किया है।
बोर्ड इन देशों में प्रशिक्षकों (कोच) को भेजेगा और जरूरत के अनुसार अन्य तकनीकी एवं विकासात्मक सहयोग भी उपलब्ध कराएगा। इस पहल का उद्देश्य उभरते क्रिकेट देशों में खेल के बुनियादी ढांचे और प्रतिभा विकास को मजबूत करना है।
एक BCCI अधिकारी के अनुसार, भारतीय बोर्ड अपने अनुभवी कोचों और विशेषज्ञों की मदद से इन देशों में क्रिकेट के स्तर को बेहतर बनाने का प्रयास करेगा। इससे अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) द्वारा वैश्विक स्तर पर क्रिकेट विस्तार की योजनाओं को भी बल मिलेगा।
पहले भी कई देशों की मदद कर चुका है BCCI
क्रिकेट विकास के क्षेत्र में BCCI का यह पहला प्रयास नहीं है। इससे पहले वर्ष 2019 में बोर्ड ने अपने पूर्व महाप्रबंधक (गेम डेवलपमेंट) सबा करीम और भारत के पूर्व फील्डिंग कोच अभय शर्मा को मालदीव भेजा था। उस दौरे का उद्देश्य वहां क्रिकेट की मौजूदा स्थिति का आकलन करना और विकास की संभावनाओं का अध्ययन करना था।
इसके अलावा भारतीय क्रिकेट बोर्ड अतीत में अफगानिस्तान और नेपाल जैसे देशों को भी विभिन्न स्तरों पर सहयोग प्रदान कर चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि BCCI की नई पहल एशिया-प्रशांत क्षेत्र में क्रिकेट के विस्तार के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
आगे क्या?
संन्यास के बाद विदेशी लीगों में खेलने के नियमों पर BCCI का अंतिम फैसला फिलहाल लंबित है, लेकिन एपेक्स काउंसिल में हुई चर्चा से यह स्पष्ट हो गया है कि बोर्ड इस मुद्दे को गंभीरता से देख रहा है। आने वाले महीनों में खिलाड़ियों, राज्य संघों और क्रिकेट विशेषज्ञों से विचार-विमर्श के बाद इस संबंध में नई नीति सामने आ सकती है।
भारतीय क्रिकेट में बदलते दौर के बीच BCCI Retirement Policy पर लिया जाने वाला निर्णय भविष्य में कई खिलाड़ियों के करियर विकल्पों को प्रभावित कर सकता है।













