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भारत एआई से रचेगा इतिहास: अंतरिक्ष सुरक्षा और स्मार्ट उपग्रहों की नई उड़ान

On: February 15, 2026
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भारत एआई से रचेगा इतिहास- अंतरिक्ष सुरक्षा और स्मार्ट उपग्रहों की नई उड़ान
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नई दिल्ली (15 फरवरी 2026): अंतरिक्ष में बढ़ता मलबा, उपग्रहों की बढ़ती संख्या और टकराव का खतरा अब केवल वैज्ञानिक चर्चा का विषय नहीं रहा, बल्कि यह वैश्विक सुरक्षा की चुनौती बन चुका है। ऐसे समय में भारत एआई मिशन देश को अंतरिक्ष तकनीक की अगली पीढ़ी की ओर ले जा रहा है, जहां उपग्रह सिर्फ निर्देशों का पालन नहीं करेंगे, बल्कि खुद सोचकर निर्णय लेने में सक्षम होंगे।

केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की पहल के तहत 16 से 20 फरवरी तक भारत मंडपम में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट में भारत अपनी संप्रभु एआई क्षमता और अंतरिक्ष नवाचारों को विश्व मंच पर पेश करेगा। इस समिट में नीति निर्माता, वैज्ञानिक, स्टार्टअप्स और उद्योग जगत के विशेषज्ञ जिम्मेदार और टिकाऊ एआई रोडमैप पर चर्चा करेंगे।

अंतरिक्ष में बढ़ते खतरे, एआई बना सुरक्षा कवच

अंतरिक्ष क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों के मुताबिक पृथ्वी की कक्षा में एक सेंटीमीटर से बड़े करीब 10 लाख मलबे के टुकड़े मौजूद हैं। ऐसे में छोटे उपग्रहों को भी सालभर में कई बार टक्कर की चेतावनियां मिलती हैं।

भारतीय कंपनी दिगंतारा के अनुसार अब पारंपरिक सांख्यिकीय मॉडल की जगह एआई आधारित विश्लेषण अपनाया जा रहा है, जो सात दिन पहले तक संभावित खतरे का अनुमान लगाने में सक्षम है। इसका सीधा फायदा यह होगा कि उपग्रह समय रहते अपनी दिशा बदल सकेंगे और महंगे अंतरिक्ष संसाधन सुरक्षित रहेंगे।

भारतीय अंतरिक्ष संघ के विशेषज्ञों का कहना है कि भारत अब केवल रॉकेट लॉन्च करने वाला देश नहीं, बल्कि अंतरिक्ष को स्मार्ट और सुरक्षित बनाने में भी अग्रणी भूमिका निभा रहा है।

अब अंतरिक्ष में ही होंगे डाटा सेंटर

तकनीक का अगला बड़ा कदम ‘स्पेस बेस्ड डाटा प्रोसेसिंग’ माना जा रहा है। बंगलूरू की स्पेस टेक कंपनी पिक्सेल के अनुसार सैटेलाइट इमेजरी का डाटा इतना विशाल हो चुका है कि धरती पर उसका तुरंत विश्लेषण मुश्किल होता जा रहा है।

इसी वजह से अब उपग्रहों पर ही जीपीयू और कंप्यूटिंग क्षमता लगाई जा रही है, ताकि कच्चा डाटा नीचे भेजने के बजाय वहीं विश्लेषण कर सिर्फ जरूरी जानकारी पृथ्वी तक पहुंचे। सौर ऊर्जा से संचालित यह मॉडल तेज, किफायती और अधिक प्रभावी माना जा रहा है।

खुद रास्ता बदलेंगे सैटेलाइट

भारत की अंतरिक्ष एजेंसियां अब ऑटोनॉमस यानी स्वायत्त सैटेलाइट ऑपरेशंस पर तेजी से काम कर रही हैं। एआई से लैस ये उपग्रह यदि पास में कोई मलबा या दूसरा सैटेलाइट महसूस करेंगे तो खुद ही अपना रास्ता बदल लेंगे।

दिगंतारा जैसी कंपनियां ऐसे सिस्टम विकसित कर रही हैं, जिनमें उपग्रह आपस में संवाद करके टकराव से बचने का निर्णय ले सकें। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में यही तकनीक अंतरिक्ष संचालन का नया मानक बनेगी।

तेजी से बढ़ता एआई बाजार और नई अर्थव्यवस्था

एआई का दायरा अब केवल तकनीकी कंपनियों तक सीमित नहीं रहा। बैंकिंग, बीमा, स्वास्थ्य, कृषि, शिक्षा, मौसम पूर्वानुमान और रक्षा जैसे क्षेत्रों में भी इसका उपयोग तेजी से बढ़ रहा है।

अनुमान है कि वर्ष 2032 तक भारत में एआई बाजार 13.1 लाख करोड़ डॉलर के स्तर तक पहुंच सकता है। दुनिया भर में भी एआई आधारित अर्थव्यवस्था तेजी से विस्तार कर रही है, और भारत इसमें बड़ा योगदान देने की स्थिति में नजर आ रहा है।

विज्ञान और स्वास्थ्य में भी एआई की नई राह

इंजीनियरिंग और वैज्ञानिक गणनाओं के लिए विकसित सिस्टम अब शोध को पहले से कहीं ज्यादा तेज बना रहे हैं। बैटरी तकनीक, लैब ऑपरेशंस और मेडिकल रिसर्च में एआई का प्रयोग नई संभावनाएं खोल रहा है।

स्वास्थ्य क्षेत्र में विकसित हो रहे एआई सिस्टम मस्तिष्क विकारों के शुरुआती निदान में मदद कर सकते हैं, जिससे इलाज जल्दी शुरू करना संभव होगा।

24 महीनों में भारत एआई मिशन की बड़ी उपलब्धियां

मार्च 2024 में 10,372 करोड़ रुपये के बजट से शुरू हुए मिशन ने दो साल से कम समय में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है।

  • 38,000 से अधिक जीपीयू शोधकर्ताओं और स्टार्टअप्स के लिए उपलब्ध
  • 12 टीमों को स्वदेशी फाउंडेशन मॉडल्स विकसित करने की जिम्मेदारी
  • भारत-विशिष्ट समस्याओं के समाधान के लिए 30 एआई एप्लीकेशंस मंजूर
  • 27 डाटा और एआई लैब स्थापित, 543 नई लैब की पहचान
  • 8000+ स्नातक, 5000 स्नातकोत्तर और 500 पीएचडी छात्रों को प्रशिक्षण

भविष्य की दिशा: अंतरिक्ष में एआई, दुनिया में भारत की पहचान

विशेषज्ञों का मानना है कि एआई अब केवल तकनीक नहीं, बल्कि भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था की ‘ऑपरेटिंग लेयर’ बन चुका है। स्मार्ट सैटेलाइट, अंतरिक्ष में डाटा प्रोसेसिंग और स्वदेशी एआई मॉडल आने वाले वर्षों में भारत को वैश्विक तकनीकी नेतृत्व की कतार में खड़ा कर सकते हैं।

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