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भारत-अमेरिका व्यापार समझौता: किसानों के हित सुरक्षित, अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयां — शिवराज सिंह चौहान

On: February 8, 2026
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किसानों के हित सुरक्षित, अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयां — शिवराज सिंह चौहान
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नई दिल्ली (08 फरवरी 2026) — केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौता को लेकर उठ रही आशंकाओं पर विस्तार से सफाई दी और इसे भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए “ऐतिहासिक, संतुलित और किसान-हितैषी” करार दिया। उनका कहना है कि यह समझौता महज़ व्यापार का दस्तावेज़ नहीं, बल्कि वैश्विक मंच पर भारत की विश्वसनीयता, नीति-प्रतिबद्धता और रणनीतिक संतुलन का संकेत है।

मंत्री ने कहा कि भारत ने इस समझौते में “राष्ट्र प्रथम” की नीति अपनाई है—जहां विकास, कूटनीति और किसान की गरिमा, तीनों को साथ रखा गया। उनके शब्दों में, “यह डील भारतीय अर्थव्यवस्था को नई गति देगी, पर किसान की कीमत पर नहीं।”

भारत-अमेरिका व्यापार समझौता: किसान की गरिमा और बाज़ार के नए अवसर

चौहान ने स्पष्ट किया कि समझौते की रूपरेखा बनाते समय कृषि और डेयरी क्षेत्र को विशेष सुरक्षा दी गई। “किसानों के हितों से कोई समझौता नहीं हुआ है,” उन्होंने दोहराया। भारत के कृषि उत्पादों को अमेरिकी बाजार में शून्य शुल्क (Zero Tariff) पर प्रवेश का रास्ता मिला है, जबकि अमेरिकी कृषि उत्पादों को भारतीय बाजार में समान छूट नहीं दी गई।

इस असमानता को उन्होंने भारत के हित में “रणनीतिक संतुलन” बताया—जहां निर्यात के अवसर बढ़ते हैं, लेकिन घरेलू बाजार पर दबाव नहीं पड़ता।

किन उत्पादों में भारत को सीधा लाभ

मंत्री के अनुसार, अमेरिका ने जिन कृषि उत्पादों पर पहले 50% तक टैरिफ रखा था, उनमें बड़ी कटौती कर शून्य कर दिया गया है। इन उत्पादों में शामिल हैं:

  • मसाले
  • चाय, कॉफी
  • नारियल, नारियल तेल
  • सुपारी, काजू
  • वनस्पति वैक्स
  • एवोकाडो, केला, अमरूद, आम, कीवी, पपीता, अनानास
  • मशरूम और कुछ अनाज

उन्होंने आंकड़ा देते हुए बताया कि 2024-25 में भारत का कृषि निर्यात 4.45 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंचा, और मसाला निर्यात में 88% वृद्धि दर्ज हुई। “अब अमेरिका जैसे बड़े बाजार में शून्य शुल्क का लाभ मिलने से यह रफ्तार और बढ़ेगी,” उन्होंने कहा। भारत पहले ही दुनिया के लगभग 200 गंतव्यों पर मसाले निर्यात करता है।

किन उत्पादों पर नहीं मिली कोई टैरिफ छूट

दूसरी ओर, जिन संवेदनशील फसलों/उत्पादों से भारतीय किसानों की आजीविका सीधे जुड़ी है, उन्हें समझौते से बाहर रखा गया है। इनमें शामिल हैं:

  • सोयाबीन, मक्का, चावल, गेहूं, चीनी, मोटे अनाज
  • पोल्ट्री, डेयरी
  • स्ट्रॉबेरी, चेरी, खट्टे फल, हरी मटर
  • काबुली चना, मूंग, तिलहन
  • इथेनॉल, तंबाकू

इन पर किसी भी तरह की टैरिफ छूट नहीं दी गई। “यदि विदेशी कृषि उत्पाद भारत आते भी हैं, तो उन्हें पूरा टैरिफ देना होगा,” चौहान ने कहा।

कूटनीति, विकास और गरिमा का संतुलन

मंत्री ने इस समझौते को कूटनीति (Diplomacy), विकास (Development) और गरिमा (Dignity) का संगम बताया। उनके अनुसार, भारत ने सौदेबाज़ी की राजनीति के बजाय सकारात्मक संवाद की नीति अपनाई, जिससे वह वैश्विक स्तर पर एक भरोसेमंद साझेदार के रूप में उभरा है।

“कूटनीति का अर्थ राष्ट्र प्रथम है, विकास का अर्थ विकसित भारत की दिशा, और गरिमा का अर्थ किसान का सम्मान,” उन्होंने कहा।

भारतीय बाज़ार की सुरक्षा पर स्पष्ट आश्वासन

चौहान ने दो टूक कहा कि भारतीय बाजार की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं हुआ। यह समझौता निर्यात के अवसर खोलता है, लेकिन घरेलू कृषि ढांचे को असुरक्षित नहीं करता। “किसानों को संरक्षण भी मिला है और नए बाजार भी,” उन्होंने जोड़ा।

समापन में उन्होंने कहा कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौता आत्मनिर्भर और विकसित भारत की मजबूत नींव साबित होगा—जहां भारतीय किसान केवल सुरक्षित नहीं, बल्कि वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धी भी बनकर उभरेगा।

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