नई दिल्ली/13 अक्टूबर 2026: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम को संबोधित करते हुए भारत की लोकतांत्रिक परंपरा, मजबूत होती अर्थव्यवस्था और डिजिटल तकनीक की बढ़ती ताकत को देश की प्रमुख उपलब्धियों के रूप में पेश किया। उन्होंने कहा कि दुनिया की निगाहें आज भारत की आर्थिक साख पर टिकी हैं। प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि भारत केवल आर्थिक विकास की दिशा में आगे बढ़ने वाला देश नहीं, बल्कि लोकतंत्र की जननी भी है, जहां विविधता के बीच संवाद और सहभागिता की परंपरा कायम है।
नई दिल्ली में आयोजित इस प्रतिष्ठित मंच पर पीएम मोदी ने वैश्विक अर्थव्यवस्था, कारोबार और तकनीक से जुड़े विशेषज्ञों के सामने भारत के डिजिटल बदलाव और समावेशी विकास की तस्वीर रखी। उन्होंने कहा कि तकनीक और संसाधनों की असली ताकत तभी सामने आती है, जब उनका लाभ समाज के व्यापक वर्ग तक पहुंचे।
भारत लोकतंत्र की जननी है: पीएम मोदी ने बताई विविधता की ताकत
प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की भाषाई, सांस्कृतिक और मीडिया संबंधी विविधता का उल्लेख करते हुए कहा कि देश में 100 से अधिक भाषाएं बोली जाती हैं। यहां हजारों समाचार पत्र और प्रकाशन तथा एक हजार से अधिक सैटेलाइट टीवी चैनल मौजूद हैं। उन्होंने डिजिटल माध्यमों को भी संवाद और विचारों के आदान-प्रदान का महत्वपूर्ण जरिया बताया।
पीएम मोदी के मुताबिक, भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण देश में अलग-अलग विचारों, संप्रदायों और परंपराओं के बीच चर्चा लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूती देती है। डिजिटल तकनीक ने इस संवाद को और व्यापक बनाने में बड़ी भूमिका निभाई है।
भारत की विशेषता केवल उसकी आबादी या बाजार का आकार नहीं है। यहां अलग-अलग भाषाओं, संस्कृतियों और सामाजिक पृष्ठभूमियों के लोग एक ही लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा हैं। प्रधानमंत्री ने इसी विविधता को भारत की ताकत के रूप में सामने रखा।
डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम में भारत की मिसाल
ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में प्रधानमंत्री ने विदेशी मेहमानों से भारत के डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम का अनुभव लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि देश में एक सड़क किनारे सामान बेचने वाला दुकानदार और बड़े शोरूम का कारोबारी अपने कारोबार के आकार में भले ही अलग हों, लेकिन दोनों डिजिटल भुगतान के एक ही प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर सकते हैं।
पीएम मोदी ने इसे समावेशी तकनीक की ताकत बताया। उनके अनुसार, तकनीक का उद्देश्य केवल बड़े कारोबारों की कार्यक्षमता बढ़ाना नहीं, बल्कि छोटे व्यापारियों और आम नागरिकों के लिए भी सुविधाएं उपलब्ध कराना होना चाहिए।
भारत में डिजिटल भुगतान के विस्तार ने रोजमर्रा के लेनदेन के तरीकों को बदला है। छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े प्रतिष्ठानों तक डिजिटल भुगतान की सुविधा पहुंचने से आर्थिक गतिविधियों में तकनीक की भूमिका बढ़ी है। प्रधानमंत्री ने इसी बदलाव को भारत की विकास यात्रा का अहम हिस्सा बताया।
पहली बार भारत में आयोजित हुआ ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम
प्रधानमंत्री मोदी ने ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम के भारत में आयोजन पर खुशी जताई और ब्लूमबर्ग तथा उसकी टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह मंच हर साल दुनिया के प्रमुख विचारकों और विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों को एक साथ लाता है।
इस आयोजन को भारत की आर्थिक और तकनीकी संभावनाओं को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने के अवसर के रूप में भी देखा जा सकता है। ऐसे मंचों पर निवेश, नवाचार, आर्थिक नीतियों और भविष्य की तकनीकों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होती है, जिनका असर वैश्विक कारोबार की दिशा पर पड़ता है।
तकनीक और ताकत का लाभ आम लोगों तक पहुंचना चाहिए
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में ज्ञान, धन और ताकत के सही इस्तेमाल पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति या संस्थान के पास कितने संसाधन हैं, यह महत्वपूर्ण जरूर है, लेकिन उससे भी बड़ा सवाल यह है कि उनका इस्तेमाल किस उद्देश्य के लिए किया जा रहा है।
पीएम मोदी ने भारत की हजारों साल पुरानी परंपराओं का उल्लेख करते हुए कहा कि देश ने शासन और कामकाज के तरीकों में भी इस विचार को अपनाने का प्रयास किया है। उनके अनुसार, तकनीक, डेटा, ज्ञान और नवाचार आज बड़ी ताकत बन चुके हैं। इनका उपयोग आम लोगों की जिंदगी बेहतर बनाने और उनकी क्षमताओं को बढ़ाने के लिए होना चाहिए।
उन्होंने सवाल उठाया कि क्या तकनीक का फायदा केवल कुछ लोगों तक सीमित रहना चाहिए या इससे लाखों लोगों के लिए नए अवसर भी पैदा होने चाहिए? प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि तकनीकी विकास का वास्तविक उद्देश्य व्यापक जनहित और लोगों का सशक्तीकरण होना चाहिए।
पिछले 10 वर्षों में 25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकाला: पीएम मोदी
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सरकार के पास अधिकार और संसाधन होते हैं, लेकिन उनका उद्देश्य नागरिकों को व्यवस्था पर निर्भर बनाए रखना नहीं, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर और सशक्त बनाना होना चाहिए।
इसी संदर्भ में उन्होंने दावा किया कि भारत ने पिछले दस वर्षों में 25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकाला है। प्रधानमंत्री के मुताबिक, यह संख्या दुनिया के कई देशों की कुल आबादी से भी अधिक है।
सरकार की विकास संबंधी सोच को स्पष्ट करते हुए उन्होंने नागरिकों की क्षमताएं बढ़ाने, नए अवसर उपलब्ध कराने और तकनीक को आम लोगों तक पहुंचाने की आवश्यकता पर बल दिया।
प्रधानमंत्री के संबोधन का मुख्य संदेश यही रहा कि किसी देश की प्रगति का आकलन केवल उसकी आर्थिक ताकत, तकनीकी उपलब्धियों या संसाधनों से नहीं किया जाना चाहिए। असली कसौटी यह है कि विकास का लाभ समाज के कितने बड़े हिस्से तक पहुंचता है और उससे आम नागरिकों के जीवन में कितना बदलाव आता है।













