पश्चिम चंपारण(Sun, 08 Feb 2026)। करीब ढाई माह के विराम के बाद प्रशांत किशोर ने पश्चिम चंपारण के बगहा से बिहार नवनिर्माण अभियान की शुरुआत कर सक्रिय राजनीति में वापसी की। जनसुराज के प्रमुख ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए अगले पांच वर्षों में संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने का लक्ष्य रखा और साफ कहा कि यह अभियान गांवों तक जाकर लोगों से सीधा संवाद करेगा—बिना मंच, बिना औपचारिकता, सीधे चौपाल की भाषा में।
पश्चिम चंपारण के बगहा स्थित आईबी गेस्ट हाउस में आयोजित कार्यकर्ता सम्मेलन में उन्होंने अपनी रणनीति का खाका रखा। विधानसभा चुनाव में हार के बाद यह उनका पहला बड़ा सार्वजनिक कार्यक्रम था, जहां उन्होंने संकेत दिया कि उनकी राजनीति अब और अधिक गांव-केंद्रित, मुद्दा-आधारित और संवाद प्रधान होगी।
सरकार पर आरोप: शिक्षा, रोजगार और वादों का हिसाब
अपने संबोधन में प्रशांत किशोर ने राज्य की “डबल इंजन” सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि चुनाव के दौरान शिक्षा और रोजगार जैसे बुनियादी मुद्दों को पीछे धकेलकर आर्थिक प्रलोभनों के जरिए मतदाताओं को प्रभावित किया गया। महिलाओं को दो-दो लाख रुपये देने जैसे वादों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि अब जनता इन घोषणाओं का ठोस हिसाब मांग रही है। उनके मुताबिक, बिहार नवनिर्माण अभियान का फोकस इन्हीं प्रश्नों को गांव-गांव ले जाना है, ताकि लोगों की वास्तविक जरूरतें राजनीतिक विमर्श के केंद्र में आएं।
विपक्ष की भूमिका पर टिप्पणी
आरजेडी-कांग्रेस गठबंधन में कथित दरार पर पूछे गए सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि जनता ने चुनाव के जरिए सभी दलों की भूमिका तय कर दी है—एनडीए को सरकार, आरजेडी को विपक्ष और जनसुराज को जनता के बीच रहकर मुद्दों पर काम करने की जिम्मेदारी। यह टिप्पणी उनके उस रुख को रेखांकित करती है जिसमें वे खुद को पारंपरिक सत्ता-विपक्ष की धुरी से अलग, एक वैकल्पिक जन-राजनीतिक धारा के रूप में प्रस्तुत करते हैं।
गांवों में ठहराव, सीधा संवाद
प्रशांत किशोर ने बताया कि अभियान के तहत वे हर जिले में एक से दो दिन रुकेंगे। गांवों में कार्यकर्ताओं और आम लोगों के साथ बैठकर शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य और स्थानीय समस्याओं पर बातचीत करेंगे। उनका कहना है कि संगठन की असली ताकत पोस्टर-बैनर नहीं, बल्कि लोगों के बीच बिताया गया समय होता है। बिहार नवनिर्माण अभियान इसी सोच पर आधारित है।
कार्यक्रम के बाद वे बगहा बाजार और नरवल-बरवल क्षेत्र के लिए रवाना हुए, जहां स्थानीय लोगों से मुलाकात कर आगे की रणनीति पर चर्चा की। इस दौरान प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती, एमएलसी अफाक अहमद और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह अभियान आने वाले वर्षों में जनसुराज की संगठनात्मक दिशा तय करेगा। फिलहाल, बगहा से शुरू हुई यह पहल इस बात का संकेत है कि प्रशांत किशोर अपनी राजनीति को फिर से जमीनी संपर्क और मुद्दों की ठोस बहस पर केंद्रित करना चाहते हैं—जहां संवाद ही सबसे बड़ा औजार है।













