नई दिल्ली/23 अक्टूबर 2026: नई दिल्ली में आयोजित होने जा रहा BRICS संसदीय फोरम भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय संसदीय सहयोग को मजबूत करने का महत्वपूर्ण अवसर है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा है कि वैश्विक अनिश्चितता और बढ़ती चुनौतियों के बीच संसदीय कूटनीति की भूमिका पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। सम्मेलन में शामिल होने के लिए भारत पहुंचने वाले विदेशी संसदीय प्रतिनिधिमंडलों के साथ वह अलग-अलग द्विपक्षीय बैठकें करेंगे। इन बैठकों का उद्देश्य विभिन्न देशों के बीच संवाद बढ़ाना और वैश्विक मुद्दों पर संसदीय सहयोग को नई दिशा देना है।
BRICS संसदीय फोरम में वैश्विक चुनौतियों पर होगी चर्चा
BRICS संसदीय फोरम में वैश्विक चुनौतियों, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), प्रौद्योगिकी के जिम्मेदार और मानव-केंद्रित इस्तेमाल तथा विभिन्न देशों के बीच बेहतर कार्यप्रणालियों के आदान-प्रदान जैसे विषयों पर चर्चा होगी। इसके साथ ही संसदीय संस्थाओं की क्षमता बढ़ाने और आपसी सहयोग को मजबूत करने पर भी जोर दिया जाएगा।
बदलते वैश्विक परिदृश्य में देशों के बीच राजनीतिक और कूटनीतिक मतभेदों के बावजूद संवाद बनाए रखना बड़ी चुनौती है। ऐसे में संसदीय मंचों को विचारों के आदान-प्रदान और साझा समाधान तलाशने के अवसर के रूप में देखा जा रहा है।
ओम बिरला करेंगे विदेशी प्रतिनिधिमंडलों के साथ द्विपक्षीय बैठकें
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि वैश्विक अस्थिरता से जुड़े मुद्दों पर संबंधित देशों के बीच बातचीत होनी चाहिए। साथ ही, इन विषयों पर संबंधित देशों की संसदों में भी सार्थक चर्चा को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
उन्होंने संसदीय कूटनीति को अंतरराष्ट्रीय संबंधों का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए कहा कि भारत अधिक से अधिक देशों के साथ संसदीय संवाद बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है। इसके तहत भविष्य में विभिन्न देशों के संसदीय प्रतिनिधिमंडलों को भारत आमंत्रित करने और भारतीय संसदीय दलों को दूसरे देशों में भेजने की भी योजना है।
इन बैठकों के जरिए द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के साथ-साथ साझा चुनौतियों पर विचार-विमर्श के नए रास्ते खुल सकते हैं।
चीन, रूस और ईरान समेत कई देशों के प्रतिनिधि होंगे शामिल
BRICS संसदीय फोरम में कई देशों के वरिष्ठ संसदीय प्रतिनिधियों के हिस्सा लेने की जानकारी दी गई है। प्रमुख प्रतिनिधियों में शामिल हैं:
- ईरान: संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबाफ, चार सांसदों के साथ।
- रूस: स्टेट ड्यूमा के अध्यक्ष व्याचेस्लाव वोलोडिन, 10 सांसदों के साथ।
- चीन: नेशनल पीपुल्स कांग्रेस की स्थायी समिति के उपाध्यक्ष झेंग जियानबांग, तीन सांसदों के साथ।
- संयुक्त अरब अमीरात: फेडरल नेशनल काउंसिल के अध्यक्ष साकर घोबाश, तीन सांसदों के साथ।
- मिस्र: विदेश संबंध समिति के अध्यक्ष सामेह शौकरी, दो सांसदों के साथ।
- ब्राजील: BRICS संबंधों से जुड़े संसदीय समूह के अध्यक्ष सीनेटर इराजा सिल्वेस्ट्रे फिल्हो।
इन प्रतिनिधिमंडलों की भागीदारी सम्मेलन के अंतरराष्ट्रीय महत्व को रेखांकित करती है। अलग-अलग राजनीतिक और आर्थिक परिस्थितियों वाले देशों के संसदीय प्रतिनिधियों को एक मंच पर लाना सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा का अवसर प्रदान करता है।
भारत के लिए क्यों अहम है BRICS संसदीय फोरम?
BRICS देशों के बीच संसदीय संवाद को मजबूत करना भारत की व्यापक कूटनीतिक भागीदारी के लिहाज से महत्वपूर्ण है। यह मंच केवल औपचारिक बैठकों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके जरिए वैश्विक चुनौतियों, तकनीकी बदलावों और संस्थागत क्षमता निर्माण पर साझा दृष्टिकोण विकसित करने की कोशिश की जा सकती है।
विशेष रूप से AI और नई प्रौद्योगिकियों के तेजी से बढ़ते प्रभाव के बीच उनका मानव-केंद्रित और जिम्मेदार उपयोग अंतरराष्ट्रीय चर्चा का अहम विषय बन गया है। ऐसे में संसदीय प्रतिनिधियों के बीच विचारों का आदान-प्रदान नीतिगत समझ विकसित करने में मदद कर सकता है।
भारत की मेजबानी में होने वाला यह सम्मेलन संसदीय कूटनीति को आगे बढ़ाने और विभिन्न देशों के बीच संवाद के अवसर बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसकी वास्तविक उपलब्धियां इस बात पर निर्भर करेंगी कि चर्चाओं से आगे किस तरह का सहयोग और ठोस पहल सामने आती है।













