राष्ट्रीय उत्तर प्रदेश राज्य अंतरराष्ट्रीय खेल मनोरंजन एजुकेशन बिजनेस राशिफल

---Advertisement---

रणनीतिक स्वायत्तता पर CDS जनरल अनिल चौहान का बड़ा बयान, बोले— स्थायी दोस्त या दुश्मन सिर्फ भ्रम

On: February 13, 2026
Follow Us:
CDS जनरल अनिल चौहान का बड़ा बयान, बोले— स्थायी दोस्त या दुश्मन सिर्फ भ्रम
---Advertisement---

नई दिल्ली (13 फरवरी 2026): भारत के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि वैश्विक परिदृश्य में “स्थायी दोस्त” या “स्थायी दुश्मन” जैसी अवधारणाएं वास्तविकता से अधिक भ्रम हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत को हर परिस्थिति में स्वतंत्र रूप से निर्णय लेने और अपनी रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखने के लिए तैयार रहना चाहिए।

वे पुणे में दक्षिणी कमान द्वारा आयोजित ‘JAI’ (जॉइंटनेस, आत्मनिर्भरता और इनोवेशन) सेमिनार को संबोधित कर रहे थे। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब दुनिया तेजी से बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों और नई सुरक्षा चुनौतियों का सामना कर रही है।

रणनीतिक स्वायत्तता पर CDS का स्पष्ट संदेश

अपने संबोधन में जनरल चौहान ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय रिश्ते स्थायी नहीं होते, बल्कि समय, परिस्थितियों और राष्ट्रीय हितों के आधार पर बदलते रहते हैं। इसलिए भारत की सुरक्षा और विदेश नीति का केंद्र केवल राष्ट्रीय हित होना चाहिए।

उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी गठबंधन या साझेदारी को स्थायी मानना व्यावहारिक नहीं है। देश को ऐसी नीति अपनानी चाहिए, जिसमें जरूरत पड़ने पर स्वतंत्र निर्णय लेने की क्षमता बनी रहे। उनके अनुसार, यही दृष्टिकोण भारत की दीर्घकालिक सुरक्षा और वैश्विक भूमिका को मजबूत कर सकता है।

तेजी से बदलता वैश्विक सुरक्षा माहौल

सीडीएस ने वैश्विक सुरक्षा वातावरण में बढ़ती अनिश्चितता की ओर इशारा करते हुए कहा कि आज दुनिया पारंपरिक सैन्य चुनौतियों से आगे बढ़कर आर्थिक और तकनीकी प्रतिस्पर्धा के दौर में प्रवेश कर चुकी है।

उन्होंने कहा कि आक्रामक राष्ट्रवाद और आर्थिक हथियारकरण तेजी से बढ़ रहा है, जहां व्यापार, सप्लाई चेन, तकनीक तक पहुंच और महत्वपूर्ण संसाधनों को रणनीतिक दबाव के उपकरण के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके अलावा, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता जैसे स्थापित सिद्धांत भी नई चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।

जनरल चौहान ने यह भी कहा कि लंबी दूरी तक सटीक मारक क्षमता वाले हथियारों के विकास ने बल प्रयोग की दहलीज को पहले की तुलना में कम कर दिया है, जिससे वैश्विक अस्थिरता और बढ़ सकती है।

युद्ध की बदलती प्रकृति और नई चुनौतियां

अपने भाषण में उन्होंने बताया कि अब पारंपरिक और औपचारिक रूप से घोषित युद्धों की संख्या घट रही है। उसकी जगह प्रॉक्सी युद्ध, सीमित सैन्य कार्रवाई, साइबर हमले और सूचना युद्ध जैसी नई रणनीतियां उभर रही हैं।

उन्होंने विशेष रूप से “कॉग्निटिव वॉरफेयर” का उल्लेख करते हुए कहा कि आने वाले समय में युद्ध सिर्फ सीमा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि समाज की सोच और जनमत भी लक्ष्य बन सकता है। यह बदलाव सैन्य रणनीति के साथ-साथ सामाजिक तैयारी की भी मांग करता है।

‘JAI से विजय’ सिर्फ नारा नहीं, रणनीतिक सिद्धांत

सेमिनार की थीम ‘JAI से विजय’ पर बोलते हुए जनरल चौहान ने कहा कि यह केवल एक प्रेरक वाक्य नहीं, बल्कि भविष्य की सैन्य रणनीति का आधार है।

उन्होंने ‘JAI’ के तीन प्रमुख स्तंभ बताए—

  • जॉइंटनेस: तीनों सेनाओं के बीच समन्वय
  • आत्मनिर्भरता: रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी क्षमता का विकास
  • इनोवेशन: आधुनिक तकनीक और नए विचारों को अपनाना

उनके अनुसार, भविष्य की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि भारतीय सशस्त्र बल कितनी तेजी से पुरानी सैन्य अवधारणाओं और संगठनात्मक सीमाओं से बाहर निकलकर नई चुनौतियों के अनुसार खुद को ढाल पाते हैं।

परिणाम आधारित दृष्टिकोण पर जोर

सीडीएस ने कहा कि असली विजय भाषणों या घोषणाओं से नहीं, बल्कि धरातल पर दिखने वाले परिणामों से तय होती है। उन्होंने आगाह किया कि आने वाला दशक प्रतिस्पर्धा, टकराव और तेज तकनीकी बदलावों से भरा होगा। ऐसे में भारतीय सशस्त्र बलों को अधिक लचीला, तकनीकी रूप से सक्षम और रणनीतिक रूप से आत्मनिर्भर बनना होगा, ताकि हर परिस्थिति में भारत के राष्ट्रीय हितों की रक्षा की जा सके।

विश्लेषण: भारत की सुरक्षा सोच में नया संकेत

जनरल अनिल चौहान का यह बयान भारत की विदेश और रक्षा नीति में “रणनीतिक स्वायत्तता” की निरंतरता को दर्शाता है। बदलते वैश्विक समीकरणों के बीच उनका संदेश साफ है— भारत को किसी स्थायी खेमे का हिस्सा मानने के बजाय अपनी स्वतंत्र रणनीतिक सोच को प्राथमिकता देनी होगी।

विशेषज्ञ मानते हैं कि यह दृष्टिकोण भारत को बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था में संतुलित भूमिका निभाने और दीर्घकालिक राष्ट्रीय हित सुरक्षित करने में मदद कर सकता है।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now