लखनऊ/शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026: देश में जनगणना(Census 2027) की तैयारियों के बीच केंद्र सरकार ने प्रगणकों की नियुक्ति से जुड़े नियमों में बदलाव किया है। नए प्रावधानों के तहत सरकारी विभागों के कर्मचारियों के साथ निजी शिक्षण संस्थानों के शिक्षकों और विभिन्न संस्थाओं में काम करने वाले अधिकारियों व लिपिकों को भी जनगणना के काम में लगाया जा सकेगा। केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, नियमों में यह बदलाव 16 अक्टूबर 2026 से लागू किया गया है।
इस फैसले से जनगणना कार्य के लिए कर्मचारियों की उपलब्धता का दायरा बढ़ाने का रास्ता खुल सकता है। अब सरकारी स्कूलों के अलावा स्थानीय निकायों, सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थानों और निजी शिक्षण संस्थानों के शिक्षकों को भी इस जिम्मेदारी के लिए नियुक्त किया जा सकेगा। इसके साथ ही विभिन्न सरकारी विभागों, बैंकों और संस्थाओं में कार्यरत लिपिकों तथा अधिकारियों को भी प्रगणक बनाया जा सकेगा।
जनगणना के नए नियम: सरकारी और निजी संस्थानों के कर्मचारी होंगे शामिल
केंद्र सरकार ने जनगणना नियम, 1990 में संशोधन करते हुए प्रगणकों की नियुक्ति से संबंधित प्रावधानों का विस्तार किया है। इसके तहत सरकारी स्कूलों, स्थानीय निकायों, सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थानों और निजी शिक्षण संस्थानों के शिक्षकों को जनगणना के कार्य में लगाया जा सकता है।
इसके अलावा केंद्र और राज्य सरकारों के विभागों में काम करने वाले कर्मचारियों, सरकारी बैंकों, सार्वजनिक उपक्रमों, कंपनियों, संस्थाओं, सोसायटी और न्यासों में कार्यरत लिपिकों तथा अधिकारियों को भी इस कार्य के लिए नियुक्त किया जा सकेगा।
इस बदलाव का प्रमुख पहलू यह है कि जनगणना के लिए कर्मचारियों की नियुक्ति केवल सरकारी स्कूलों या सीमित सरकारी पदों तक केंद्रित नहीं रहेगी। जरूरत और पात्रता के अनुसार अन्य संस्थानों में कार्यरत लोगों की सेवाएं भी ली जा सकेंगी।
राज्य सरकारों को भी मिलेगा अन्य उपयुक्त व्यक्तियों को नियुक्त करने का अधिकार
नए प्रावधानों के अनुसार, राज्य सरकार या केंद्र शासित प्रदेश का प्रशासन जनगणना के काम के लिए किसी अन्य उपयुक्त व्यक्ति को भी प्रगणक की जिम्मेदारी सौंप सकेगा।
इससे संबंधित प्रशासन को स्थानीय जरूरतों के अनुसार कर्मचारियों की उपलब्धता सुनिश्चित करने में मदद मिल सकती है। जनगणना जैसे व्यापक कार्य में घर-घर जाकर जानकारी जुटाने, निर्धारित विवरण दर्ज करने और तय समयसीमा के भीतर काम पूरा करने के लिए पर्याप्त मानव संसाधन की जरूरत होती है।
हालांकि, किसी कर्मचारी की नियुक्ति संबंधित प्रशासन के निर्देशों और लागू नियमों के अनुसार ही की जाएगी।
जनगणना अधिनियम, 1948 के तहत बदले गए नियम
केंद्र सरकार ने जनगणना अधिनियम, 1948 के तहत जनगणना नियम, 1990 में संशोधन किया है। गृह मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार, नए प्रावधान 16 अक्टूबर 2026 से प्रभावी हो गए हैं।
नियमों में बदलाव का उद्देश्य जनगणना के लिए प्रगणकों की नियुक्ति के दायरे को स्पष्ट करना और अलग-अलग संस्थानों में कार्यरत उपयुक्त कर्मचारियों की सेवाएं लेने का प्रावधान करना है।
इस बदलाव के बाद जनगणना की तैयारियों में सरकारी विभागों के साथ निजी शिक्षण संस्थानों और अन्य संगठनों की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो सकती है। इससे नियुक्ति प्रक्रिया को आवश्यकतानुसार व्यापक बनाने में मदद मिलने की संभावना है।









