वाराणसी (Mon, 20 Oct 2025) — भगवान भास्कर की आराधना का महापर्व Chhath Puja 2025 इस बार 27 अक्टूबर को मनाया जाएगा। लोक आस्था और सूर्योपासना से जुड़ा यह पर्व इस वर्ष रवि योग के शुभ संयोग में संपन्न होगा। व्रत की शुरुआत 25 अक्टूबर को नहाय-खाय से होगी, जबकि 26 अक्टूबर को खरना, और 27 अक्टूबर को अस्ताचलगामी सूर्य को पहला अर्घ्य दिया जाएगा। अगले दिन 28 अक्टूबर की भोर में उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने के साथ यह चार दिवसीय पर्व संपन्न होगा।
🌞 25 अक्टूबर से नहाय-खाय, 28 अक्टूबर को होगा पारण
ख्यात ज्योतिषाचार्य पं. ऋषि द्विवेदी के अनुसार, छठ पर्व की शुरुआत कार्तिक शुक्ल चतुर्थी से नहाय-खाय के साथ होती है। यह दिन शुद्धि और सात्त्विकता का प्रतीक माना जाता है। व्रतीजन स्नान के बाद घर की सफाई करते हैं और लहसुन-प्याज रहित भोजन ग्रहण करते हैं। दिन में एक बार भात और कद्दू की सब्जी खाकर संकल्प लिया जाता है।
26 अक्टूबर को पंचमी तिथि में खरना होगा। इस दिन व्रती पूरे दिन निर्जला उपवास रखते हैं और शाम को गुड़ और चावल की खीर के साथ प्रसाद ग्रहण करते हैं।
27 अक्टूबर, कार्तिक शुक्ल षष्ठी को अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया जाएगा। व्रती बांस की डालियों में ऋतुफल, ईंख, नारियल, ठेकुआ और मिष्ठान सजाकर घाटों पर पहुंचते हैं। सरयू, गंगा या तालाब के तट पर दूध और जल से भगवान भास्कर को अर्घ्य दिया जाता है।
अगले दिन 28 अक्टूबर की सुबह अरुणोदय काल में उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ व्रत का पारण होता है।
🕉️ वैदिक परंपरा और आस्था का संगम
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, छठ पर्व केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सूर्य ऊर्जा के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक है। इसका उल्लेख ऋग्वेद और महाभारत दोनों में मिलता है।
पौराणिक कथाओं के अनुसार, द्वापर युग में माता कुंती ने पांडवों की दीर्घायु और कल्याण के लिए यह व्रत किया था। त्रेता युग में भगवान श्रीराम और माता सीता ने भी लंका विजय के बाद अयोध्या लौटने पर रामराज्य स्थापना हेतु छठ व्रत किया था।
यह पर्व सुख-समृद्धि, संतान प्राप्ति और आरोग्यता के लिए किया जाता है। व्रती भगवान सूर्य के साथ-साथ उनकी पत्नियों उषा और प्रत्युषा, तथा छठी मइया की पूजा करते हैं।
📅 छठ पर्व की महत्वपूर्ण तिथियाँ – Chhath Puja 2025 Schedule
| पर्व | तिथि | दिन | विशेषता |
|---|---|---|---|
| नहाय-खाय | 25 अक्टूबर 2025 | शनिवार | शुद्धि एवं संकल्प |
| खरना | 26 अक्टूबर 2025 | रविवार | निर्जला उपवास, खीर-रोटी का प्रसाद |
| प्रथम अर्घ्य | 27 अक्टूबर 2025 | सोमवार | अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य (सूर्यास्त 5:30 बजे) |
| द्वितीय अर्घ्य | 28 अक्टूबर 2025 | मंगलवार | उदीयमान सूर्य को अर्घ्य (सूर्योदय 6:25 बजे) |
🌅 सूर्योपासना का वैज्ञानिक और आध्यात्मिक महत्व
सूर्य समस्त ऊर्जा का मूल स्रोत है — जीवन, प्रकाश और प्रकृति की गति उसी से संचालित होती है। वेदों में सूर्य को प्रत्यक्ष देवता कहा गया है, क्योंकि उनके बिना सृष्टि की कल्पना भी असंभव है। छठ पर्व में उपवास, ध्यान और सूर्य की किरणों से शरीर-मन का शुद्धिकरण होता है। यही कारण है कि इसे ऊर्जा संतुलन और आत्मिक अनुशासन का पर्व भी कहा जाता है।
✨ निष्कर्ष
Chhath Puja 2025 केवल आस्था का नहीं, बल्कि परिवार, समाज और प्रकृति के बीच सामंजस्य का पर्व है। घाटों पर गूंजते छठ गीत, सूप में सजे फल-फूल और सूर्य के समक्ष folded hands — सब एक ही संदेश देते हैं कि आस्था की यह परंपरा अनंत काल तक यूं ही उजास फैलाती रहे।








