Lucknow (Wed, 29 Oct 2025): उत्तर प्रदेश सरकार ने बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग (Child Development and Nutrition Department) में लंबे समय से लंबित पड़ी भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ कर दिया है। सरकार ने जिला कार्यक्रम अधिकारी (DPO) और बाल विकास परियोजना अधिकारी (CDPO) के पदों के लिए शैक्षिक अर्हता से जुड़ी अस्पष्टता दूर करते हुए सेवा नियमावली में संशोधन को कैबिनेट से मंजूरी दे दी है।
अब विभाग जल्द ही इन पदों पर भर्ती के लिए उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) को अधियाचन भेजेगा।
22 CDPO और 7 DPO पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू होने की तैयारी
विभाग में इस समय बाल विकास परियोजना अधिकारी के 22 और जिला कार्यक्रम अधिकारी के 7 पद खाली हैं।
पहले इन पदों के लिए “समकक्ष अर्हता” (Equivalent Qualification) स्पष्ट न होने के कारण भर्ती प्रक्रिया अटकी हुई थी।
कैबिनेट की स्वीकृति के बाद यह बाधा दूर हो गई है, जिससे आयोग अब इन पदों के लिए नोटिफिकेशन जारी करने की दिशा में आगे बढ़ेगा।
अर्हता में किया गया बड़ा बदलाव
पहले नियमों के अनुसार,
- जिला कार्यक्रम अधिकारी (DPO) के लिए समाजशास्त्र, समाज विज्ञान, गृह विज्ञान या समाज कार्य में स्नातक उपाधि या समकक्ष अर्हता आवश्यक थी।
- बाल विकास परियोजना अधिकारी (CDPO) के लिए समाज कार्य, समाजशास्त्र या गृह विज्ञान में स्नातक उपाधि अनिवार्य थी।
लेकिन “समकक्ष अर्हता” शब्द स्पष्ट न होने के कारण भर्ती अधियाचन अटक गया था।
अब संशोधित नियमावली में स्पष्ट कर दिया गया है कि—
“जिला कार्यक्रम अधिकारी के पद के लिए समाजशास्त्र, मानव शास्त्र, मनोविज्ञान, अर्थशास्त्र, राजनीति विज्ञान, गृह विज्ञान या समाज कार्य में स्नातक उपाधि आवश्यक होगी।”
“बाल विकास परियोजना अधिकारी के पद के लिए समाज कार्य, समाजशास्त्र या गृह विज्ञान में स्नातक उपाधि मान्य होगी।”
संशोधन से बढ़ेगा अभ्यर्थियों का अवसर
नई नियमावली से अब विभिन्न विषयों के स्नातक उम्मीदवारों को भी प्रतियोगी परीक्षा में भाग लेने का अवसर मिलेगा। विभागीय अधिकारियों के अनुसार, इससे भर्ती प्रक्रिया में अवसरों का दायरा बढ़ेगा और योग्य अभ्यर्थियों को प्रतिस्पर्धा का समान अवसर मिलेगा।
कैबिनेट ने मंगलवार को यह संशोधन प्रस्ताव बाई सर्कुलेशन के माध्यम से मंजूर किया, जिससे अब आयोग को अधियाचन भेजने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
सरकार का उद्देश्य: पारदर्शिता और दक्षता
राज्य सरकार का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया को तेज, पारदर्शी और योग्यता-आधारित बनाना ही इस संशोधन का मूल उद्देश्य है।
“विभाग को अब योग्य विशेषज्ञ और अधिकारियों की नई टीम मिलेगी, जो बाल विकास और पोषण योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू कर सके,”
एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा।








