लखनऊ/30 जुलाई 2026। उत्तर प्रदेश में CM मॉडल कंपोजिट विद्यालय परियोजना को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत प्रदेश सरकार ने तीसरे चरण में 26 जिलों को नए मुख्यमंत्री मॉडल कंपोजिट विद्यालयों की सौगात दी है। इन विद्यालयों का निर्माण जल्द शुरू होगा और प्रत्येक स्कूल पर करीब 30 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
इन अत्याधुनिक विद्यालयों में प्री-नर्सरी से लेकर कक्षा 12वीं तक की पढ़ाई एक ही परिसर में होगी। सरकार का उद्देश्य गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ छात्रों को तकनीकी और व्यावसायिक रूप से भी सक्षम बनाना है।
CM मॉडल कंपोजिट विद्यालय में मिलेंगी हाईटेक सुविधाएं
बेसिक शिक्षा विभाग के अनुसार, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की घोषणा के बाद प्रदेशभर में आधुनिक सुविधाओं से लैस CM मॉडल कंपोजिट विद्यालय विकसित किए जा रहे हैं। इन स्कूलों में छात्रों को पारंपरिक शिक्षा के साथ आधुनिक तकनीक आधारित शिक्षण का लाभ मिलेगा।
विद्यालयों में उपलब्ध कराई जाने वाली प्रमुख सुविधाएं—
- प्री-नर्सरी से 12वीं तक एकीकृत शिक्षा
- अंग्रेजी माध्यम में पढ़ाई की व्यवस्था
- 30 स्मार्ट क्लासरूम
- विज्ञान प्रयोगशाला
- रोबोटिक्स लैब
- कंप्यूटर लैब
- डिजिटल लाइब्रेरी
- मिनी स्टेडियम
- कौशल विकास (स्किल डेवलपमेंट) केंद्र
सरकार का मानना है कि इन सुविधाओं से छात्रों को शुरुआती स्तर से ही आधुनिक शिक्षा और तकनीकी प्रशिक्षण मिलेगा, जिससे वे भविष्य में रोजगार और स्वरोजगार दोनों के लिए बेहतर तरीके से तैयार हो सकेंगे।
तीसरे चरण में 26 जिलों को मिली मंजूरी
प्रदेश सरकार ने CM मॉडल कंपोजिट विद्यालय योजना को चरणबद्ध तरीके से लागू किया है। पहले चरण में प्रत्येक जिले में एक विद्यालय, दूसरे चरण में दो विद्यालय और अब तीसरे चरण में प्रत्येक जिले की तीसरी तहसील में नए विद्यालयों को स्वीकृति दी गई है।
बेसिक शिक्षा विभाग के अनुसार, अब तक स्वीकृत 150 विद्यालयों में से 110 विद्यालयों का निर्माण कार्य शुरू हो चुका है। तीसरे चरण के विद्यालयों का निर्माण भी जल्द प्रारंभ किया जाएगा।
अवध के इन जिलों को मिला लाभ
तीसरे चरण में अवध क्षेत्र के जिन जिलों को CM मॉडल कंपोजिट विद्यालय की स्वीकृति मिली है, उनमें—
- लखनऊ
- सीतापुर
- गोंडा
- रायबरेली
- बाराबंकी
- अंबेडकरनगर
शामिल हैं। इसके अलावा प्रदेश के अन्य चयनित जिलों में भी नए विद्यालय स्थापित किए जाएंगे।
ड्रॉपआउट दर कम करने पर रहेगा विशेष फोकस
सरकार का मानना है कि CM मॉडल कंपोजिट विद्यालय योजना का सबसे बड़ा लाभ स्कूल छोड़ने वाले बच्चों (ड्रॉपआउट) की संख्या कम करने में मिलेगा। चूंकि एक ही परिसर में प्री-नर्सरी से 12वीं तक शिक्षा उपलब्ध होगी, इसलिए बच्चों की पढ़ाई बीच में छूटने की संभावना कम होगी।
शासन की योजना है कि जो बच्चा प्री-नर्सरी में प्रवेश लेगा, वह बिना स्कूल बदले उसी परिसर से 12वीं तक की शिक्षा पूरी कर सकेगा। इससे शिक्षा की निरंतरता बनी रहेगी और छात्रों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिलेगा।
तकनीकी शिक्षा के साथ रोजगार पर भी जोर
इन विद्यालयों में स्थापित किए जाने वाले कौशल विकास केंद्र छात्रों को केवल अकादमिक शिक्षा तक सीमित नहीं रखेंगे, बल्कि उन्हें व्यावहारिक और तकनीकी प्रशिक्षण भी देंगे। सरकार का लक्ष्य है कि 12वीं पास करने तक प्रत्येक छात्र किसी न किसी उपयोगी कौशल में दक्ष हो, जिससे वह उच्च शिक्षा के साथ-साथ रोजगार या स्वरोजगार के अवसर भी प्राप्त कर सके।
प्रदेश सरकार का मानना है कि आधुनिक शिक्षा, डिजिटल तकनीक और कौशल विकास का यह समन्वित मॉडल भविष्य की जरूरतों के अनुरूप विद्यार्थियों को तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।










