वाराणसी, सोमवार (06 अक्टूबर 2025) — मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश वर्ष 2030 तक Global Food Basket के रूप में दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाएगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश आज देश के कुल खाद्यान्न उत्पादन में 21% योगदान देकर भारत की कृषि शक्ति का सबसे बड़ा स्तंभ बन चुका है।
मुख्यमंत्री सोमवार को अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान (IRRI) के आइसार्क कैंपस में आयोजित डायरेक्ट सीडेड राइस (DSR) कॉन्क्लेव और कृषि विभाग की 150वीं वर्षगांठ समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस मौके पर उन्होंने प्रदेश की कृषि नीतियों, तकनीकी नवाचारों और किसानों की बदलती सोच को नई दिशा देने की बात कही।
“कृषि में हुआ ऐतिहासिक परिवर्तन” — सीएम योगी
मुख्यमंत्री ने कहा, “पिछले 11 वर्षों में उत्तर प्रदेश की कृषि प्रणाली में व्यापक और क्रांतिकारी बदलाव आए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में किसानों को सॉयल हेल्थ कार्ड, फसल बीमा योजना और एमएसपी जैसी योजनाओं का लाभ मिला है। साथ ही, 10 करोड़ से अधिक किसान परिवारों को हर साल किसान सम्मान निधि योजना के तहत सीधी आर्थिक सहायता दी जा रही है।”
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रदेश का भौगोलिक क्षेत्रफल देश का केवल 11 प्रतिशत है, लेकिन इसके बावजूद यह 21 प्रतिशत खाद्य उत्पादन कर देश का अग्रणी कृषि राज्य बन चुका है।
“Global Food Basket” लक्ष्य की ओर उत्तर प्रदेश
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार 2030 तक Global Food Basket बनने के लक्ष्य की दिशा में तेजी से काम कर रही है। “हम कृषि को सिर्फ रोजगार का साधन नहीं, बल्कि खाद्य सुरक्षा और वैश्विक प्रतिस्पर्धा की कुंजी के रूप में देख रहे हैं,” उन्होंने कहा।
उन्होंने IRRI और आइसार्क के योगदान की सराहना की, जिन्होंने जलवायु-लचीली धान की किस्मों और आधुनिक खेती तकनीकों के विकास में अहम भूमिका निभाई है।
अकादमिक और अनुसंधान ढांचा हो रहा मजबूत
योगी ने बताया कि प्रदेश में वर्तमान में चार कृषि विश्वविद्यालय सक्रिय हैं और एक नया विश्वविद्यालय जोड़ने की प्रक्रिया में है। इसके अलावा, राज्य में IRRI और आइसार्क जैसे वैश्विक अनुसंधान संस्थान टिकाऊ खेती और खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में अभूतपूर्व योगदान दे रहे हैं।
“परंपरा और नवाचार का संगम जरूरी”
मुख्यमंत्री ने भारतीय कृषि परंपराओं में निहित ज्ञान की महत्ता पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “हमारी परंपरा में जो ज्ञान निहित है, वही हमारी सबसे बड़ी ताकत है। हमें आधुनिक विज्ञान और पारंपरिक कृषि ज्ञान का संतुलन बनाना होगा।”
उन्होंने कलानमक धान का उदाहरण देते हुए कहा कि यह ऐतिहासिक धान भगवान बुद्ध को महाप्रसाद के रूप में अर्पित किया जाता था, और आज इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पुनर्जीवित किया जा रहा है।
कृषि उत्पादन क्षमता में पांच गुना वृद्धि
मुख्यमंत्री ने कहा कि अनुकूल कृषि-जलवायु परिस्थितियों और सरकारी नीतियों के कारण प्रदेश में अन्न, दालें, तेलहन और सब्जियों के उत्पादन में पांच गुना वृद्धि हुई है। यह परिवर्तन सिर्फ सरकारी योजनाओं से नहीं, बल्कि किसानों के समर्पण और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से संभव हुआ है।
मशीनरी नवाचारों का अनावरण
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने ई-सीडर फॉर राइस और प्रिसीजन हिल सीडर जैसे नवीनतम कृषि उपकरणों का अनावरण किया। उन्होंने कहा कि ये मशीनें धान की खेती को अधिक कुशल और जल-संरक्षणकारी बनाएंगी। कार्यक्रम में किसानों को मिनी किट भी वितरित किए गए, जो आधुनिक खेती को बढ़ावा देने की दिशा में सरकार की प्रतिबद्धता का प्रतीक हैं।
आभार और समापन
कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने इस मौके पर IRRI और आइसार्क के निदेशक डॉ. सुधांशु सिंह सहित वैज्ञानिकों और किसानों की भूमिका की सराहना की।
कार्यक्रम का समापन कृषि राज्य मंत्री बलदेव सिंह औलख के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।








