गोरखपुर, 03 मार्च 2026 (मंगलवार)। होलिका दहन के पावन अवसर पर गोरखपुर में आयोजित भक्त प्रह्लाद की शोभायात्रा के मंच से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सख्त और स्पष्ट शब्दों में माफिया, आतंकवाद और उग्रवाद पर प्रहार किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि “हिरण्यकश्यप जैसे माफिया-गुंडे प्यार से नहीं मानते, क्योंकि लातों के भूत बातों से नहीं मानते।”
उनका यह बयान न केवल राजनीतिक संदेश था, बल्कि कानून-व्यवस्था को लेकर सरकार की सोच का भी संकेत देता है।
होलिका दहन मंच से ‘CM योगी गोरखपुर बयान’ ने खींचा ध्यान
होलिका दहन उत्सव समिति, पांडेयहाता द्वारा आयोजित शोभायात्रा में बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे मुख्यमंत्री ने पौराणिक संदर्भों के जरिए वर्तमान सामाजिक चुनौतियों पर बात की। उन्होंने राक्षस हिरण्यकश्यप, कंस और रावण का उल्लेख करते हुए कहा कि अराजकता और अत्याचार के अंत के लिए हर युग में किसी न किसी रूप में नृसिंह, कृष्ण या राम का अवतार होता है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि आज के समय में माफिया, आतंकवाद और उग्रवाद उसी मानसिकता का प्रतिनिधित्व करते हैं। ऐसे तत्वों से सख्ती से निपटना ही समाज के हित में है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज जब दुनिया के कई हिस्सों में अस्थिरता और हिंसा का माहौल है, तब भारत “नए भारत” की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि “देश यशस्वी नेतृत्व में नई ऊंचाइयों को छू रहा है और हर वर्ग को अवसर मिल रहा है।”
“उत्तर प्रदेश बना उत्सव प्रदेश”
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने वर्ष 2014 से पहले के हालात का जिक्र करते हुए कहा कि उस दौर में कई बार त्योहारों से पहले कर्फ्यू लग जाता था। व्यापार प्रभावित होता था और आम नागरिक असुरक्षा महसूस करता था।
उन्होंने कहा कि वर्तमान में उत्तर प्रदेश सुरक्षा और सुविधा के आधार पर “उत्सव प्रदेश” बन चुका है। “हर व्यक्ति को सुरक्षा का अहसास और विश्वास है, यही रामराज्य की परिकल्पना है,” उन्होंने जोड़ा।
होली को लेकर संयम की अपील
रंग उत्सव की शुभकामनाएं देते हुए मुख्यमंत्री ने सामाजिक सौहार्द बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा—
- किसी पर जबरन रंग न डालें
- ऐसा कोई कार्य न करें जिससे टकराव पैदा हो
- अश्लील गीतों से परहेज करें
उन्होंने कहा कि पर्व का महत्व तभी बना रहेगा, जब समाज संयम और मर्यादा के साथ उसे मनाए।
मतांतरण पर गंभीर टिप्पणी
इसी दिन मुख्यमंत्री ने एनेक्सी सभागार में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा आयोजित गोरक्ष प्रांत की समन्वय बैठक में भी भाग लिया। वहां उन्होंने मतांतरण के मुद्दे पर कहा कि इसे गंभीरता से लेने की आवश्यकता है।
उन्होंने आत्ममंथन का आह्वान करते हुए कहा कि “जो व्यक्ति मतांतरण करता है, वह किसी कारण से दुखी है। यदि हम उसका दुख दूर कर दें, तो मतांतरण की घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाई जा सकती है।” यह बयान सामाजिक संवाद और आत्मविश्लेषण की दिशा में संकेत देता है।
शिक्षा व्यवस्था और एआई युग पर रुख
मदरसों के पाठ्यक्रम को लेकर उठे सवालों पर मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि वहां शासन द्वारा स्वीकृत यूपी बोर्ड का पाठ्यक्रम लागू है। परीक्षाओं में ओएमआर प्रणाली समाप्त कर पुनः लिखित परीक्षा लागू करने की मांग पर उन्होंने कहा कि देश एआई युग में प्रवेश कर चुका है, ऐसे में पीछे लौटना उचित नहीं होगा।
उच्च शिक्षा विभाग में कैशलेस उपचार व्यवस्था पर उन्होंने बताया कि प्रस्ताव तैयार हो रहा है और जल्द ही स्वीकृति प्रक्रिया में आगे बढ़ेगा। साथ ही उन्होंने ‘अभ्युदय कोचिंग’ से अधिक से अधिक छात्रों को जोड़ने की अपील की।
बैठक में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी, प्रदेश महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह, प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. धर्मेंद्र सिंह और क्षेत्रीय अध्यक्ष सहजानंद राय सहित कई पदाधिकारी उपस्थित रहे।
निष्कर्ष
CM योगी गोरखपुर बयान ने साफ संकेत दिया है कि राज्य सरकार कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर किसी तरह की ढिलाई के पक्ष में नहीं है। पौराणिक प्रतीकों के जरिए दिया गया यह संदेश राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया है।
एक ओर जहां मुख्यमंत्री ने सख्ती का संकेत दिया, वहीं दूसरी ओर सामाजिक सौहार्द, आत्ममंथन और जिम्मेदारी की भी बात की। यही संतुलन उनके भाषण की विशेषता रहा।









