लखनऊ (बुधवार, 18 Feb 2026)। लखनऊ में हुई सीएम योगी–मोहन भागवत मुलाकात ने राजनीतिक और वैचारिक हलकों में खास चर्चा पैदा कर दी। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बीच करीब 30 मिनट तक बातचीत हुई, जिसमें सामाजिक, शैक्षिक और राष्ट्रीय मुद्दों पर विचार-विमर्श होने की जानकारी सामने आई।
इस मुलाकात से पहले मोहन भागवत ने लखनऊ विश्वविद्यालय के मालवीय सभागार में आयोजित शोधार्थी संवाद में वैश्वीकरण, शिक्षा, स्वास्थ्य और भारत की भूमिका जैसे अहम विषयों पर विस्तार से विचार रखे। उनका कहना था कि वैश्वीकरण का वर्तमान स्वरूप बाजारवाद से जुड़ा है, जो समाज के लिए खतरनाक हो सकता है। उन्होंने भारतीय दर्शन “वसुधैव कुटुंबकम” का उल्लेख करते हुए कहा कि जब तक सभी सुखी नहीं होंगे, तब तक कोई एक व्यक्ति भी वास्तविक सुख प्राप्त नहीं कर सकता।
वैश्वीकरण पर भागवत की टिप्पणी
अपने संबोधन में संघ प्रमुख ने कहा कि पश्चिमी देशों की सोच में भौतिकवाद और शक्ति प्रधानता अधिक रही है, जबकि भारत की परंपरा सामूहिक कल्याण की रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत अगर विश्व गुरु बनना चाहता है, तो उसे केवल आदर्शों तक सीमित नहीं रहना होगा, बल्कि हर क्षेत्र में मजबूत बनना पड़ेगा। उनके अनुसार, “सत्य तभी प्रभावी होता है जब उसके पीछे शक्ति हो।”
उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में अमेरिका और चीन जैसे देश शक्ति संतुलन की राजनीति कर रहे हैं, ऐसे में भारत को अपनी सांस्कृतिक और बौद्धिक ताकत को मजबूत करना होगा।
शिक्षा और स्वास्थ्य पर सख्त राय
मोहन भागवत ने शिक्षा और स्वास्थ्य को व्यवसाय का रूप देने की प्रवृत्ति पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि ये दोनों क्षेत्र समाज के लिए आधार स्तंभ हैं और इन्हें लाभ कमाने का माध्यम नहीं बनना चाहिए।
उनके अनुसार, भारत की पारंपरिक शिक्षा व्यवस्था को बदलकर पश्चिमी मॉडल थोपा गया, जिसका असर सामाजिक सोच पर भी पड़ा। उन्होंने शोधार्थियों से अपील की कि वे प्रामाणिकता के साथ शोध करें और देशहित को प्राथमिकता दें।
शोध और राष्ट्र निर्माण पर जोर
संवाद के दौरान भागवत ने कहा कि भारत की दिशा और दशा बदलने में शोध की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे तथ्यों और सत्य पर आधारित शोध करें, ताकि समाज में फैली भ्रांतियों और दुष्प्रचार को दूर किया जा सके।
संघ के बारे में चल रही गलत धारणाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि संगठन को केवल पढ़कर नहीं, बल्कि करीब से समझकर ही जाना जा सकता है।
सीएम योगी–मोहन भागवत मुलाकात क्यों रही अहम
देर शाम मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ निराला नगर स्थित सरस्वती कुंज पहुंचे, जहां दोनों नेताओं के बीच करीब आधे घंटे तक चर्चा हुई। हालांकि बातचीत के आधिकारिक बिंदु सार्वजनिक नहीं किए गए, लेकिन जानकारों का मानना है कि इसमें सामाजिक मुद्दों, शिक्षा और वैचारिक पहलुओं पर चर्चा हुई होगी।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, ऐसी मुलाकातें सिर्फ औपचारिक नहीं होतीं, बल्कि आने वाले सामाजिक और संगठनात्मक कार्यक्रमों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण मानी जाती हैं।
धर्म और समाज पर संघ प्रमुख का संदेश
मोहन भागवत ने अपने भाषण में कहा कि धर्म का अर्थ केवल पूजा-पद्धति नहीं, बल्कि जीवन को संतुलित और सामूहिक रूप से जीने का सिद्धांत है। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण को भी जीवन का अनिवार्य हिस्सा बताया और कहा कि प्रकृति के साथ मित्रता का भाव रखना ही सही दिशा है।
उनका संदेश साफ था—व्यक्ति को केवल अपने परिवार तक सीमित न रहकर पूरे राष्ट्र और समाज के बारे में सोचना चाहिए।
निष्कर्ष
लखनऊ में हुई सीएम योगी–मोहन भागवत मुलाकात और शोधार्थी संवाद में दिए गए विचारों ने शिक्षा, वैश्वीकरण और राष्ट्र निर्माण पर नई बहस को जन्म दिया है। भागवत के भाषण में जहां भारतीय मूल्यों और सामूहिक सोच पर जोर दिखा, वहीं मुख्यमंत्री के साथ उनकी मुलाकात ने इसे राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से और भी महत्वपूर्ण बना दिया।









