लखनऊ, 25 फरवरी 2026। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath का हालिया सिंगापुर और जापान दौरा केवल निवेश वार्ताओं और औद्योगिक समझौतों तक सीमित नहीं रहा। इस दौरे ने एक और संदेश दिया—यूपी की पारंपरिक कला अब सीमाओं में बंधी नहीं है। ‘एक जिला-एक उत्पाद’ यानी ODOP को उन्होंने वैश्विक मंच पर नई पहचान दिलाई।
करीब 500 से अधिक विशिष्ट कलाकृतियां विदेशी प्रतिनिधियों और बच्चों को भेंट कर मुख्यमंत्री ने यह स्पष्ट कर दिया कि उत्तर प्रदेश केवल जनसंख्या के लिहाज से बड़ा राज्य नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और शिल्प विरासत के मामले में भी समृद्ध है।
ODOP: सिंगापुर और जापान में यूपी की सांस्कृतिक कूटनीति
सिंगापुर और जापान में मुख्यमंत्री एक निवेशक-अनुकूल प्रशासक के साथ-साथ सांस्कृतिक राजदूत की भूमिका में भी नजर आए। उन्होंने लगभग 300 बच्चों को ‘मंडला आर्ट’ से सजी कलाकृतियां भेंट कीं। यह केवल उपहार नहीं था—यह भारतीय दर्शन, रंग-संवेदना और शिल्प-परंपरा का परिचय था।
वाराणसी की प्रसिद्ध गुलाबी मीनाकारी, फिरोजाबाद के रंगीन कांच से बनी भगवान राम, शिव और बुद्ध की प्रतिमाएं, मुरादाबाद के पीतल से निर्मित मूर्तियां—इन सबने अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों को आकर्षित किया। उपहारों के जरिए मुख्यमंत्री ने यह संदेश दिया कि उत्तर प्रदेश की पहचान उसकी मिट्टी, मेहनत और मौलिकता में बसती है।
जिलों की पहचान, वैश्विक मंच पर प्रस्तुति
ODOP योजना का मूल भाव यही है कि हर जिला अपनी विशिष्ट उत्पाद पहचान के साथ आगे बढ़े। इस यात्रा में यह विविधता साफ झलकी।
- फिरोजाबाद की कांच कला से बनी राम और बुद्ध प्रतिमाएं
- मुरादाबाद का ब्रास (पीतल) शिल्प
- वाराणसी की मीनाकारी से बना काशी विश्वनाथ मंदिर का मॉडल
- सहारनपुर की काष्ठ कला से निर्मित राधा-कृष्ण प्रतिमाएं
इन कलाकृतियों ने विदेशी मंच पर यह स्थापित किया कि ‘मेड इन यूपी’ केवल एक टैग नहीं, बल्कि परंपरा और कौशल का प्रमाण है।
‘लोकल टू ग्लोबल’ की दिशा में बड़ा कदम
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में ‘लोकल टू ग्लोबल’ के संकल्प को दोहराया। उन्होंने कहा कि जब स्थानीय शिल्प को वैश्विक मंच मिलता है, तो केवल उत्पाद नहीं, बल्कि कारीगर की जिंदगी बदलती है।
ODOP के जरिए लाखों शिल्पकार परिवारों को निर्यात के नए अवसर मिलने की उम्मीद है। अंतरराष्ट्रीय ब्रांड वैल्यू बढ़ने से इन उत्पादों की मांग और कीमत दोनों में वृद्धि संभव है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और पारंपरिक कला को नया जीवन मिलेगा।
आत्मनिर्भरता से वैश्विक पहचान तक
यह पहल ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘वोकल फॉर लोकल’ की सोच को जमीन पर उतारने का प्रयास है। ODOP को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत कर मुख्यमंत्री ने यह संकेत दिया कि उत्तर प्रदेश अब केवल निवेश आमंत्रित नहीं कर रहा, बल्कि अपनी सांस्कृतिक पूंजी भी दुनिया के सामने आत्मविश्वास के साथ रख रहा है।
कूटनीति अक्सर समझौतों और दस्तावेजों में सिमट जाती है, लेकिन इस बार शिल्प और संस्कृति ने पुल का काम किया। सिंगापुर और जापान की धरती पर यूपी की कला का यह प्रदर्शन केवल औपचारिकता नहीं था—यह उस आत्मविश्वास का परिचायक था, जो अब प्रदेश की पहचान बनता जा रहा है।








