लखनऊ, 3 अक्टूबर 2026। उत्तर प्रदेश में आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों की पढ़ाई को सहारा देने के लिए शनिवार को छात्रवृत्ति वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लोकभवन में 4,60,559 छात्र-छात्राओं के बैंक खातों में डीबीटी के माध्यम से 148.04 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति की राशि हस्तांतरित की। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने 11 विद्यार्थियों को अपने हाथों से छात्रवृत्ति प्रमाणपत्र भी दिए।
छात्रवृत्ति के महत्व पर बात करते हुए मुख्यमंत्री ने कैबिनेट मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर का जिक्र करते हुए हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि यदि उन्हें समय पर छात्रवृत्ति मिली होती तो वह पढ़-लिखकर आगे बढ़ते और शायद नेता नहीं बनते। उन्होंने राजभर के संघर्ष का उल्लेख करते हुए बताया कि उन्होंने जीवन में थ्री-व्हीलर और टैक्सी भी चलाई है।
छात्रवृत्ति से लेकर 50 हजार बेटियों की स्कूटी तक, सीएम योगी के बड़े ऐलान
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पैसे की कमी किसी विद्यार्थी की पढ़ाई के रास्ते में बाधा न बने। उन्होंने विद्यार्थियों से छात्रवृत्ति की राशि का इस्तेमाल पढ़ाई के लिए करने और अच्छी किताबें खरीदने की सलाह दी।
योगी आदित्यनाथ ने यह भी कहा कि अगले महीने 50 हजार बेटियों को स्कूटी दी जाएगी। इससे पहले अगस्त में मुख्यमंत्री ने स्नातक स्तर पर पढ़ने वाली 50 हजार छात्राओं को अक्टूबर-नवंबर में स्कूटी देने की घोषणा की थी।
कन्या सुमंगला योजना का भी किया उल्लेख
मुख्यमंत्री ने कन्या सुमंगला योजना का जिक्र करते हुए कहा कि इसके तहत बेटियों को जन्म से स्नातक स्तर तक अलग-अलग चरणों में आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार की कोशिश है कि बेटियों की शिक्षा और आगे बढ़ने के अवसर आर्थिक कारणों से बाधित न हों।
पिछले साल 69 लाख विद्यार्थियों को मिली छात्रवृत्ति
योगी आदित्यनाथ ने छात्रवृत्ति वितरण के आंकड़े भी साझा किए। उनके अनुसार, पिछले वर्ष प्रदेश में 69 लाख विद्यार्थियों को करीब 6,200 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति दी गई। पिछले नौ वर्षों में चार करोड़ से अधिक विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति का लाभ मिलने की बात भी उन्होंने कही।
मुख्यमंत्री ने इस संदर्भ में अपने मंत्रिमंडल के सदस्यों संजीव कुमार गोंड, असीम अरुण, दानिश आजाद और नरेंद्र कश्यप का उदाहरण देते हुए विद्यार्थियों से मेहनत और ईमानदारी के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया।
पहले छात्रवृत्ति में देरी का लगाया आरोप
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने 2017 से पहले की व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति समय पर नहीं मिलती थी। मुख्यमंत्री के मुताबिक, सरकार बनने के बाद इस मामले को संज्ञान में लेकर लंबित छात्रवृत्ति उपलब्ध कराई गई।
उन्होंने कहा कि अब डीबीटी यानी डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के जरिए छात्रवृत्ति की राशि सीधे विद्यार्थियों के बैंक खातों में भेजी जा रही है। इससे भुगतान की प्रक्रिया में पारदर्शिता और समयबद्धता लाने पर जोर दिया गया है।
प्रवेश प्रक्रिया पूरी होते ही पात्र छात्रों को भुगतान
योगी ने कहा कि अप्रैल से जुलाई के बीच प्रवेश प्रक्रिया पूरी होने के बाद पात्र विद्यार्थियों के खातों में छात्रवृत्ति भेजने की व्यवस्था की गई है। उनका कहना था कि कोई भी पात्र विद्यार्थी योजना के लाभ से छूटना नहीं चाहिए।
उन्होंने यह भी बताया कि एससी-एसटी वर्ग के करीब चार लाख विद्यार्थियों का डाटा पोर्टल पर दर्ज नहीं था। इसके बाद पोर्टल शुरू कराकर डाटा फीडिंग की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।
स्कूलों में सुविधाओं का भी किया जिक्र
मुख्यमंत्री ने बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों में हुए बदलावों का उल्लेख करते हुए कहा कि अब स्कूलों में बालक और बालिकाओं के लिए अलग-अलग शौचालय, पेयजल, बेहतर फर्श, फर्नीचर, स्मार्ट क्लास और डिजिटल लाइब्रेरी जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा साफ है—धन के अभाव में किसी विद्यार्थी की शिक्षा नहीं रुकनी चाहिए। हर छात्र को पढ़ाई का अवसर, बेहतर माहौल और आगे बढ़ने के लिए जरूरी मंच मिलना चाहिए।
‘नो कर्फ्यू, नो दंगा’ का भी किया जिक्र
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने प्रदेश की कानून-व्यवस्था का जिक्र करते हुए कहा कि अब उत्तर प्रदेश में ‘नो कर्फ्यू, नो दंगा, अब सब चंगा’ की स्थिति है। उन्होंने विद्यार्थियों से मेहनत करने की अपील करते हुए कहा कि परिश्रम का कोई विकल्प नहीं है।
छात्रवृत्ति वितरण कार्यक्रम में शिक्षा के साथ-साथ सरकार की अन्य योजनाओं और प्रदेश में किए जा रहे विकास कार्यों का भी उल्लेख हुआ। कुल मिलाकर मुख्यमंत्री के संबोधन का केंद्र यही रहा कि आर्थिक परिस्थितियां किसी विद्यार्थी की शिक्षा के रास्ते में स्थायी बाधा न बनें और छात्र अपनी पढ़ाई के जरिए आगे बढ़ने का अवसर हासिल कर सकें।








