लखनऊ, 17 फरवरी 2026। उत्तर प्रदेश को वैश्विक निवेश का नया केंद्र बनाने की दिशा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 22 फरवरी से सिंगापुर और जापान के अहम दौरे पर जा रहे हैं। इस विदेश यात्रा का मुख्य उद्देश्य राज्य में बड़े निवेश को आकर्षित करना और खास तौर पर IT सेक्टर, विनिर्माण और तकनीकी उद्योगों को नई गति देना है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री का दौरा 23-24 फरवरी को सिंगापुर और 25-26 फरवरी को जापान में प्रस्तावित है। वहीं इसी दिन उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के नेतृत्व में एक अलग प्रतिनिधिमंडल यूके और जर्मनी रवाना होगा, जहां आईटी और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में निवेश की संभावनाओं को तलाशा जाएगा।
18 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के साथ होंगे मुख्यमंत्री
इस दौरे में मुख्यमंत्री योगी के साथ 18 अधिकारियों का उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल शामिल रहेगा। इसमें वित्त मंत्री सुरेश खन्ना, औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी, मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव संजय प्रसाद और सचिव अमित सिंह समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहेंगे।
सरकार का मानना है कि इस तरह की संस्थागत और योजनाबद्ध विदेशी यात्राएं केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि निवेशकों के साथ भरोसे का रिश्ता बनाने का माध्यम भी बनती हैं। यही कारण है कि प्रतिनिधिमंडल में नीति निर्माण और औद्योगिक विकास से जुड़े प्रमुख चेहरों को शामिल किया गया है।
सिंगापुर में शहरी विकास और कौशल साझेदारी पर जोर
दो दिन के सिंगापुर दौरे के दौरान शहरी विकास, स्मार्ट सिटी प्रबंधन, जल प्रबंधन और कौशल विकास जैसे विषयों पर विशेष बातचीत प्रस्तावित है। उत्तर प्रदेश सरकार सिंगापुर के साथ आर्थिक और तकनीकी सहयोग को मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है।
इसी क्रम में सिंगापुर इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (SICCI) और अन्य व्यापारिक संगठनों के साथ समझौता ज्ञापनों (MoU) को अंतिम रूप देने की योजना है। जानकारों का मानना है कि यदि ये समझौते जमीन पर उतरते हैं तो उत्तर प्रदेश में स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर और स्किल-आधारित रोजगार के नए अवसर खुल सकते हैं।
जापान में विनिर्माण और टेक्नोलॉजी निवेश पर फोकस
टोक्यो में प्रस्तावित गोलमेज सम्मेलन इस यात्रा का सबसे अहम हिस्सा माना जा रहा है। “विनिर्माण, गतिशीलता और प्रौद्योगिकी” विषय पर आयोजित इस सम्मेलन में ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रिक वाहन, इलेक्ट्रॉनिक्स, रेलवे, इंजीनियरिंग, रसायन और लॉजिस्टिक्स क्षेत्रों की प्रमुख जापानी कंपनियों के भाग लेने की संभावना है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, जापान के साथ मजबूत औद्योगिक साझेदारी उत्तर प्रदेश के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकती है, क्योंकि राज्य पहले से डिफेंस कॉरिडोर, एक्सप्रेसवे नेटवर्क और औद्योगिक पार्क जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहा है।
इन्वेस्ट यूपी की टीम पेश करेगी विकास मॉडल
दौरे के दौरान ‘इन्वेस्ट यूपी’ की टीम विदेशी निवेशकों के सामने राज्य के औद्योगिक ढांचे, हरित हाइड्रोजन, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC), पर्यटन सर्किट, ऑटोमोबाइल सेक्टर और व्यापार में सुगमता (Ease of Doing Business) जैसे क्षेत्रों पर विस्तृत प्रस्तुतियां देगी।
सरकार को उम्मीद है कि इससे उत्तर प्रदेश को न केवल निवेश मिलेगा, बल्कि हाई-टेक सेक्टर में रोजगार और तकनीकी ट्रांसफर की संभावनाएं भी बढ़ेंगी।
उपमुख्यमंत्री का यूके-जर्मनी दौरा भी महत्वपूर्ण
इसी बीच, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के नेतृत्व में 15 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल 22 फरवरी को यूके और जर्मनी की यात्रा पर जाएगा। इस टीम में आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग के मंत्री सुनील शर्मा और औद्योगिक विकास विभाग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल रहेंगे।
इस दौरे में खास तौर पर IT और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में बड़े निवेश की संभावना जताई जा रही है, जिससे उत्तर प्रदेश को डिजिटल और तकनीकी उद्योगों में नई पहचान मिल सकती है।
क्यों अहम माना जा रहा है यह दौरा?
विश्लेषकों की राय है कि वैश्विक स्तर पर निवेशक अब ऐसे राज्यों की तलाश में हैं जहां इंफ्रास्ट्रक्चर, नीति स्थिरता और श्रमशक्ति का मजबूत संतुलन हो। उत्तर प्रदेश इन तीनों मोर्चों पर अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश में है। यही वजह है कि यह विदेश दौरा सिर्फ औपचारिक यात्रा नहीं, बल्कि राज्य की आर्थिक रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।
अगर प्रस्तावित समझौते सफल रहे तो आने वाले वर्षों में उत्तर प्रदेश के IT, मैन्युफैक्चरिंग और टेक्नोलॉजी सेक्टर में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।










