लखनऊ, सोमवार (06 अक्टूबर 2025) — राजस्थान और मध्य प्रदेश में बच्चों की संदिग्ध मौतों के बाद उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड पर आ गया है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) ने सोमवार को प्रदेश भर में व्यापक जांच अभियान चलाते हुए बच्चों को दिए जाने वाले कफ सिरप के 164 नमूने लिए हैं। सभी नमूने Coldrif Syrup सहित अन्य कंपनियों के उत्पादों की जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे जा रहे हैं।
राजस्थान-मध्य प्रदेश की घटनाओं के बाद सख्ती बढ़ी
राजस्थान और मध्य प्रदेश में खांसी-जुखाम से पीड़ित बच्चों की मौतों के बाद जब Coldrif Syrup में प्रतिबंधित रासायनिक तत्व डाइथिलीन ग्लाइकाल (Diethylene Glycol) की मात्रा 48.6 प्रतिशत पाई गई, तो पूरे देश में चिंता फैल गई। दवा निर्माण के मानकों के अनुसार यह मात्रा 0.10 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए।
इसी को देखते हुए एफएसडीए ने उत्तर प्रदेश में यह अभियान चलाया है ताकि किसी भी तरह की मिलावट या मानक-विरोधी दवाओं को समय रहते रोका जा सके।
प्रदेशभर में छापेमारी, 164 नमूने लिए गए
एफएसडीए अधिकारियों ने लखनऊ, आगरा, अलीगढ़, आजमगढ़, अंबेडकर नगर और झांसी समेत विभिन्न जिलों में छापेमारी की। लोहिया अस्पताल और एसजीपीजीआई के आसपास की दुकानों से भी 10 कंपनियों के कफ सिरप के नमूने लिए गए।
शुरुआती जांच में Coldrif Syrup की आपूर्ति कहीं नहीं पाई गई, लेकिन अन्य ब्रांड जैसे तमिलनाडु की स्रेसन फार्मा और कई स्थानीय कंपनियों के सिरप बिक्री में मिले हैं। देर शाम तक औषधि निरीक्षक नमूने लेने में जुटे रहे।
डाइथिलीन ग्लाइकाल और प्रोपाइलिन ग्लाइकाल की जांच
सभी नमूने लखनऊ की राज्य औषधि परीक्षण प्रयोगशाला में भेजे गए हैं। वहां इन सिरपों में डाइथिलीन ग्लाइकाल और प्रोपाइलिन ग्लाइकाल जैसे रासायनिक घटकों की जांच की जाएगी।
एफएसडीए अधिकारियों के अनुसार रिपोर्ट आने के बाद संदिग्ध सिरप के खिलाफ बिक्री-प्रतिबंध और आपराधिक कार्रवाई की जाएगी।
सरकारी अस्पतालों में नहीं होती बच्चों के सिरप की सप्लाई
यूपी मेडिकल सप्लाई कारपोरेशन लिमिटेड (UPMSCL) के प्रबंध निदेशक उज्ज्वल कुमार ने स्पष्ट किया कि सरकारी अस्पतालों में बच्चों के कफ सिरप की आपूर्ति नहीं की जाती। उन्होंने कहा, “Coldrif Syrup या किसी भी प्रकार के बाल-विशेष कफ सिरप को हमारी सूची में शामिल नहीं किया गया है।”
स्वास्थ्य विभाग ने जारी किए दिशा-निर्देश
प्रदेश के महानिदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य डॉ. रतन पाल सिंह सुमन ने बताया कि दो साल से कम उम्र के बच्चों को कफ सिरप नहीं दिया जाता है। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर एंटीबायोटिक या अन्य वैकल्पिक इलाज अपनाते हैं।
उन्होंने कहा, “हमने सभी सरकारी और निजी अस्पतालों को निर्देशित किया है कि पाँच वर्ष से कम उम्र के बच्चों में कफ सिरप का प्रयोग तभी करें जब चिकित्सकीय रूप से अत्यंत आवश्यक हो।”
“सुरक्षा सर्वोपरि है” — FSDA
एफएसडीए अधिकारियों ने कहा कि यह कदम केवल दवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए नहीं, बल्कि माता-पिता में भरोसा बहाल करने के लिए भी है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “बच्चों की दवाओं से जुड़ी कोई भी लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी जिलों में सैंपलिंग और निगरानी लगातार जारी रहेगी।”








