नई दिल्ली/2 अक्टूबर 2026: अगर आपके वाहन पर पुराना ई-चालान लंबित है, तो उसे नजरअंदाज करना अब भारी पड़ सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने लंबित ट्रैफिक ई-चालानों की वसूली को लेकर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने कहा है कि केवल ई-चालान जारी कर देना पर्याप्त नहीं है, उसकी प्रभावी वसूली भी सुनिश्चित करनी होगी। इसके लिए बकाया चालान वाले वाहनों को रैंडम चेकिंग के दौरान जब्त करने और कई वाहन संबंधी ऑनलाइन सेवाओं को रोकने के निर्देश दिए गए हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया है कि बकाया ई-चालान वाले वाहनों की रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC) का नवीनीकरण, डुप्लीकेट आरसी जारी करना, मालिक का पता बदलने जैसी सेवाएं रोकी जाएं। ऐसे वाहनों को केंद्रीय परिवहन पोर्टल पर ब्लैकलिस्ट करने, फिटनेस सर्टिफिकेट रोकने और PUC प्रमाणपत्र जारी नहीं करने की व्यवस्था लागू करने को कहा गया है।
ई-चालान नहीं भरा तो क्या होगा?
न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन की पीठ ने 28 सितंबर को सड़क सुरक्षा से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान ये निर्देश दिए। अदालत ने कहा कि अधिकारियों को जमीनी स्तर पर प्रभावी कार्रवाई करनी होगी।
निर्देशों के मुताबिक, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को रैंडम चेकिंग के जरिए ऐसे वाहनों की पहचान करनी होगी जिन पर ई-चालान की रकम बकाया है। नियमों का पालन नहीं करने वाले वाहन को जब्त करने की कार्रवाई की जा सकती है।
अदालत का जोर इस बात पर है कि ई-चालान केवल ऑनलाइन रिकॉर्ड बनकर न रह जाए। चालान जारी होने के बाद उसकी वसूली भी सुनिश्चित होनी चाहिए।
RC रिन्यूअल और डुप्लीकेट आरसी पर रोक
लंबित ई-चालान वाले वाहन के लिए कई महत्वपूर्ण परिवहन सेवाओं को रोकने का निर्देश दिया गया है।
बकाया राशि पूरी तरह जमा होने तक अधिकारियों को:
- RC का नवीनीकरण नहीं करना होगा।
- डुप्लीकेट RC जारी नहीं करनी होगी।
- वाहन मालिक के पते में बदलाव के अनुरोध पर कार्रवाई नहीं करनी होगी।
- वाहन का फिटनेस सर्टिफिकेट जारी नहीं करना होगा।
- वाहन को केंद्रीय Parivahan Portal पर ब्लैकलिस्ट करना होगा।
वाहन के ब्लैकलिस्ट होने का सीधा असर उसके बिक्री या स्वामित्व हस्तांतरण पर भी पड़ सकता है।
PUC सर्टिफिकेट भी नहीं मिलेगा
सुप्रीम कोर्ट ने प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र यानी PUC को लेकर भी स्पष्ट निर्देश दिए हैं। अदालत ने कहा है कि जिन वाहनों पर ट्रैफिक जुर्माना बकाया है, उनके लिए कोई केंद्र PUC प्रमाणपत्र जारी न करे।
इसका मतलब है कि लंबित ई-चालान का असर केवल जुर्माना भरने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वाहन से जुड़ी कई जरूरी सेवाओं पर भी पड़ सकता है।
बार-बार नियम तोड़ने वालों के ड्राइविंग लाइसेंस पर भी कार्रवाई
सुप्रीम कोर्ट ने बार-बार ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने वाले लोगों के ड्राइविंग लाइसेंस को लेकर भी निर्देश दिए हैं। ऐसे मामलों में लाइसेंस के नवीनीकरण को रोकने और पहले से जारी लाइसेंस को निलंबित करने के लिए कदम उठाने को कहा गया है।
यहां एक महत्वपूर्ण अंतर है—लाइसेंस संबंधी कार्रवाई को अदालत ने बार-बार उल्लंघन के मामलों से जोड़ा है। इसलिए इसे हर लंबित चालान पर स्वतः लाइसेंस रद्द होने के रूप में नहीं समझना चाहिए।
देशभर में करीब ₹49,194 करोड़ के ई-चालान बकाया
सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि देशभर में जारी किए गए ई-चालानों के संबंध में करीब ₹49,194.05 करोड़ की राशि वसूलना बाकी है। इसमें से लगभग ₹26,175.05 करोड़ की वसूली की जा चुकी है।
यही आंकड़ा बताता है कि समस्या केवल चालान काटने की नहीं, बल्कि उसकी वसूली की भी है। सुप्रीम कोर्ट ने इसी बिंदु पर जोर देते हुए कहा कि हजारों या लाखों ई-चालान जारी करने का उद्देश्य तब तक पूरा नहीं होगा, जब तक जुर्माने की प्रभावी वसूली नहीं होती।
2012 की जनहित याचिका से जुड़ा है मामला
यह मामला सड़क सुरक्षा से संबंधित वर्ष 2012 की जनहित याचिका से जुड़ा है और सुप्रीम कोर्ट लंबे समय से इसमें जारी निर्देशों के अनुपालन की निगरानी कर रहा है।
अदालत ने अधिकारियों को सड़क सुरक्षा और इलेक्ट्रॉनिक प्रवर्तन से जुड़े निर्देशों को जमीन पर लागू करने पर जोर दिया है। साथ ही, केंद्र के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा तैयार 28 अक्टूबर 2025 की मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) को लागू करने तथा मोटर वाहन अधिनियम की धारा 136A और केंद्रीय मोटर वाहन नियमों के नियम 167A के तहत इलेक्ट्रॉनिक प्रवर्तन सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया गया है।
सिर्फ चालान काटना काफी नहीं, वसूली भी जरूरी
सुप्रीम कोर्ट के ताजा निर्देशों का मुख्य जोर ई-चालान व्यवस्था को केवल डिजिटल रिकॉर्ड तक सीमित न रखने पर है। अदालत ने अधिकारियों से कहा है कि कार्रवाई जमीन पर दिखाई देनी चाहिए और बकाया जुर्माने की वसूली के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाई जाए।
इससे वाहन मालिकों के लिए संदेश साफ है—पुराना ई-चालान लंबित है तो उसे नजरअंदाज करना आगे चलकर RC, फिटनेस, PUC, वाहन हस्तांतरण और कुछ मामलों में ड्राइविंग लाइसेंस से जुड़ी सेवाओं को प्रभावित कर सकता है। वहीं, बार-बार नियम तोड़ने वाले चालकों के खिलाफ लाइसेंस संबंधी कार्रवाई भी की जा सकती है।













