लखनऊ (Wed, 01 Apr 2026)। राजधानी लखनऊ की सुबह बुधवार को कुछ अलग ही अंदाज़ में शुरू हुई। सरकारी आवास कालिदास मार्ग से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इलेक्ट्रिक कूड़ा वाहन लॉन्च के तहत 250 आधुनिक इलेक्ट्रिक कूड़ा वाहनों को हरी झंडी दिखाई। यह सिर्फ एक फ्लैग-ऑफ नहीं था, बल्कि शहरी सफाई व्यवस्था में तकनीकी बदलाव का संकेत भी था।
मुख्यमंत्री ने इस मौके पर कहा कि अब घर-घर से कूड़ा उठाने की प्रक्रिया न सिर्फ तेज होगी, बल्कि पर्यावरण के लिहाज से भी बेहतर साबित होगी। इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल से प्रदूषण में कमी आएगी और शहरों की सफाई व्यवस्था अधिक व्यवस्थित होगी।
“राजनीति के कचरे को जनता ने साफ किया” — CM योगी
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में पूर्ववर्ती सरकारों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि एक समय उत्तर प्रदेश की राजनीति खुद “कचरे” से भर गई थी, लेकिन जनता ने उसे साफ करने का काम किया।
उनके शब्दों में एक राजनीतिक संदेश भी छिपा था और एक भावनात्मक अपील भी। उन्होंने कहा कि पहले की सरकारों के दौर में न तो सफाई पर ध्यान दिया गया और न ही स्वास्थ्य व्यवस्था पर। गंदगी के कारण बीमारियां फैलती थीं और मासूमों की जान तक चली जाती थी।
बीमारू प्रदेश से विकास की ओर: नौ साल का दावा
मुख्यमंत्री ने दावा किया कि पिछले नौ वर्षों में उत्तर प्रदेश ने एक लंबा सफर तय किया है। उन्होंने कहा कि जो राज्य कभी “बीमारू प्रदेश” के रूप में जाना जाता था, वह अब विकास और आधुनिकता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने यह भी जोड़ा कि अब बाहरी लोग जब उत्तर प्रदेश आते हैं तो उन्हें यहां स्पष्ट बदलाव नजर आता है—चाहे वह सफाई हो, बिजली व्यवस्था हो या फिर शहरी विकास।
एलईडी क्रांति और बिजली व्यवस्था में सुधार
सौर ऊर्जा और बिजली सुधारों का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 से पहले प्रदेश में हैलोजन लाइटों का इस्तेमाल होता था, जिससे न केवल बिजली की खपत अधिक होती थी, बल्कि शहरों की सुंदरता भी प्रभावित होती थी।
उन्होंने बताया कि अब पूरे प्रदेश में लगभग 16 लाख एलईडी लाइटें लगाई जा चुकी हैं। इससे बिजली की खपत कम हुई है और शहरों की रोशनी भी बेहतर हुई है। पहले जहां अंधेरे का फायदा उठाकर अपराधी सक्रिय रहते थे, वहीं अब रोशनी ने उस स्थिति को काफी हद तक बदल दिया है।
कुकरैल नदी और ‘सौमित्र वन’ का उदाहरण
लखनऊ के विकास का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कुकरैल नदी के पुनरुद्धार का उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा कि पिछली सरकारों के दौरान अवैध कब्जों के कारण नदी का अस्तित्व ही खतरे में पड़ गया था।
अब वहां अवैध कब्जे हटाकर ‘सौमित्र वन’ विकसित किया गया है, जिसे सिटी फॉरेस्ट के रूप में तैयार किया जा रहा है। यह न केवल पर्यावरण संरक्षण का उदाहरण है, बल्कि शहर के लोगों के लिए एक नया हरित क्षेत्र भी बन रहा है।
कार्यक्रम में कई जनप्रतिनिधि रहे मौजूद
इस मौके पर नगर विकास मंत्री एक शर्मा, महापौर सुषमा खर्कवाल, विधायक डॉ. नीरज बोरा समेत कई जनप्रतिनिधि और अधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का माहौल प्रशासनिक गंभीरता के साथ-साथ राजनीतिक संदेशों से भी भरा हुआ नजर आया।
निष्कर्ष: सफाई से सियासत तक का संदेश
इलेक्ट्रिक कूड़ा वाहन लॉन्च केवल एक सरकारी योजना की शुरुआत नहीं है, बल्कि यह साफ संकेत है कि उत्तर प्रदेश में अब सफाई, तकनीक और राजनीति—तीनों के बीच एक नया संतुलन बनाने की कोशिश हो रही है।
जहां एक ओर सरकार शहरी व्यवस्था को आधुनिक बना रही है, वहीं दूसरी ओर इस मंच से राजनीतिक संदेश भी साफ तौर पर दिया जा रहा है।








