लखनऊ | 02 फरवरी 2026 (सोमवार): उत्तर प्रदेश में औद्योगिक विकास को सीधे रोजगार से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी जनपदों में शीघ्र भूमि चिह्नित कर ‘एम्प्लॉयमेंट एंड इंडस्ट्रियल जोन’ विकसित करने के निर्देश दिए हैं। यह पहल उत्तर प्रदेश दिवस पर घोषित ‘सरदार वल्लभभाई पटेल एम्प्लॉयमेंट एंड इंडस्ट्रियल जोन’ योजना के क्रियान्वयन को गति देगी, जहां उद्योग, कौशल विकास, उद्यमिता और सेवा-सुविधाएं एक ही परिसर में उपलब्ध होंगी।
बैठक में मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि प्रदेश की औद्योगिक नीति का लक्ष्य ऐसा सक्षम इकोसिस्टम बनाना है, जहां युवाओं को कौशल, रोजगार और उद्यमिता—तीनों अवसर एकीकृत रूप में मिलें। योजना को स्थानीय जरूरतों और क्षेत्रीय संभावनाओं के अनुरूप लागू करने पर भी विशेष जोर दिया गया।
एकीकृत मॉडल: उद्योग + कौशल + उद्यमिता, एक ही परिसर में
प्रस्तावित एम्प्लॉयमेंट एंड इंडस्ट्रियल जोन केवल औद्योगिक प्लॉट्स का समूह नहीं होगा, बल्कि एक इंटीग्रेटेड सपोर्ट सिस्टम के रूप में विकसित किया जाएगा। यहां उद्योग-सहायता से जुड़े विभाग, प्रशिक्षण ढांचा, मेंटरिंग, वित्तीय योजनाओं की जानकारी और हैंडहोल्डिंग—सब कुछ एक ही स्थान पर सुलभ रहेगा।
इस मॉडल का उद्देश्य यह है कि कोई भी युवा या उद्यमी विचार से लेकर उत्पादन और बाज़ार तक की यात्रा एक ही कैंपस में पूरी कर सके।
प्लग-एंड-प्ले यूनिट और फ्लैटेड फैक्ट्री पर खास जोर
मुख्यमंत्री ने प्लग-एंड-प्ले यूनिट्स और फ्लैटेड फैक्ट्री जैसी आधुनिक अवधारणाओं को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। इसका मतलब है कि उद्यमियों को शुरुआत से ही बिजली, पानी, शेड, लॉजिस्टिक्स और बुनियादी ढांचा तैयार मिलेगा—ताकि वे बिना देरी उत्पादन शुरू कर सकें।
योजना के तहत विकसित की जाने वाली प्रमुख सुविधाएं:
- कॉमन फैसिलिटी सेंटर (CFC)
- टेस्टिंग फैसिलिटी और टूल रूम
- डिस्प्ले एवं डिजाइन सेंटर
- ETP/CETP (अपशिष्ट उपचार)
- प्लग-एंड-प्ले यूनिट्स
- फ्लैटेड फैक्ट्री स्पेस
ये सुविधाएं खास तौर पर MSME और सेवा-आधारित उद्योगों के लिए गेम-चेंजर साबित होंगी।
हर जनपद में न्यूनतम 50 एकड़: चरणबद्ध विस्तार
बैठक में बताया गया कि योजना को चरणबद्ध तरीके से प्रदेश के सभी जिलों में लागू किया जाएगा। प्रत्येक जनपद में न्यूनतम 50 एकड़ क्षेत्रफल में जोन विकसित करने का प्रस्ताव है। लेआउट में औद्योगिक क्षेत्र, वाणिज्यिक स्पेस, सड़कें, ग्रीन एरिया, कॉमन सुविधाएं और कार्यालय परिसर का संतुलित विन्यास रखा जाएगा।
यह विकेंद्रीकृत मॉडल सुनिश्चित करेगा कि औद्योगिक अवसर केवल बड़े शहरों तक सीमित न रहें, बल्कि छोटे और मध्यम जिलों तक भी पहुंचें।
‘एम्प्लॉयमेंट एंड स्किल डेवलपमेंट सेंटर’ भी होगा स्थापित
प्रत्येक जोन में ‘सरदार वल्लभभाई पटेल एम्प्लॉयमेंट एंड स्किल डेवलपमेंट सेंटर’ स्थापित करने का प्रस्ताव है। यहां:
- प्रशिक्षण हॉल और कॉन्फ्रेंस रूम
- उद्यमिता प्रशिक्षण और मेंटरिंग
- ऋण योजनाओं की जानकारी
- इंटर्नशिप और अप्रेंटिसशिप लिंक
- उद्योग-सहायता एक्सटेंशन काउंटर
यानी, कौशल उन्नयन से लेकर रोजगार/स्वरोजगार तक की पूरी चेन एक ही जगह उपलब्ध होगी।
युवाओं के लिए रोजगार, उद्योगों के लिए सरल शुरुआत
इस पहल का सीधा लाभ युवाओं और नए उद्यमियों को मिलेगा। जहां युवाओं को कौशल प्रशिक्षण, इंटर्नशिप और वेतन-आधारित रोजगार के अवसर मिलेंगे, वहीं उद्योगों को तैयार बुनियादी ढांचा और सपोर्ट सिस्टम मिलेगा। इससे निवेश की गति बढ़ेगी और स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन होगा।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि संभावित स्थलों की शीघ्र पहचान कर परियोजना के क्रियान्वयन को तेज़ किया जाए, ताकि यह मॉडल प्रदेश में औद्योगिक विकास + रोजगार सृजन का प्रभावी उदाहरण बन सके।
विकास की नई कार्यशैली की ओर संकेत
यह पहल बताती है कि उत्तर प्रदेश अब पारंपरिक औद्योगिक एस्टेट की अवधारणा से आगे बढ़कर इंटीग्रेटेड इंडस्ट्रियल-एम्प्लॉयमेंट इकोसिस्टम की ओर बढ़ रहा है। जहां फैक्ट्री के साथ-साथ कौशल, डिज़ाइन, टेस्टिंग, वित्तीय मार्गदर्शन और बाजार संपर्क—सब एक छत के नीचे मिलेगा।
यदि योजना तय समयरेखा में जमीन पर उतरती है, तो एम्प्लॉयमेंट एंड इंडस्ट्रियल जोन आने वाले वर्षों में प्रदेश की औद्योगिक पहचान को नई दिशा दे सकते हैं।










