Forensic Audit को लेकर अल फलाह यूनिवर्सिटी की फंडिंग पर कसा शिकंजा
नई दिल्ली, गुरुवार, 13 नवम्बर 2025। लाल किला बम धमाके के बाद राष्ट्रीय राजधानी में तनाव भले ही अब सामान्य दिखाई दे रहा हो, लेकिन केंद्र सरकार का रुख और भी सख्त होता जा रहा है। दो दिनों की लगातार उच्चस्तरीय बैठकों के बाद गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने ऐसा बयान दिया है जिसने देश के दुश्मनों को साफ संदेश दे दिया—दोषियों को ऐसी सजा मिलेगी कि पूरी दुनिया देखेगी।
अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह स्पष्ट संकल्प है कि दिल्ली कार विस्फोट में शामिल हर व्यक्ति को कानून की कठोरतम सज़ा दिलाई जाएगी। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा, “यह सजा दुनिया के लिए मिसाल होगी, ताकि कोई भी भविष्य में भारत की सरहदों के भीतर इस तरह का कायराना हमला करने का साहस न करे।”
भारत की आतंकवाद-विरोधी नीति को दुनिया ने स्वीकारा: शाह
गुजरात में मोतीभाई आर. चौधरी सागर सैनिक स्कूल और सागर ऑर्गेनिक प्लांट के वर्चुअल उद्घाटन के दौरान शाह ने विस्फोट में मारे गए लोगों के परिवारों के प्रति गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि पिछले 11 वर्षों में प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत की आतंकवाद-विरोधी लड़ाई को वैश्विक स्तर पर सराहा गया है।
उनके अनुसार, भारत अब केवल प्रतिक्रिया देने वाला राष्ट्र नहीं रहा, बल्कि आतंकवाद के खिलाफ “वैश्विक नेतृत्वकर्ता” की भूमिका में उभरा है।
इस बीच, दिल्ली कार विस्फोट के बाद शाह लगातार सुरक्षा एजेंसियों और जांच इकाइयों के साथ बैठकें करते रहे। बुधवार को हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के बाद पूरे मामले को NIA के हवाले कर दिया गया। इसके बाद अमित शाह ने NIA, NSG और FSL अधिकारियों के साथ विस्तृत चर्चा की, और जांच को तेज करते हुए “हर दोषी की पहचान और गिरफ्तारी” सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
अल फलाह यूनिवर्सिटी की फंडिंग पर ‘forensic audit’, ED को मिली जिम्मेदारी
कार विस्फोट मामले की जांच के समानांतर, एक और गंभीर खुलासा सामने आया—अल फलाह यूनिवर्सिटी का नाम कश्मीरी आतंकी नेटवर्क से जुड़ी फंडिंग में उभर रहा है।
गुरुवार को शाह ने ED निदेशक राहुल नवीन के साथ बैठक कर यूनिवर्सिटी की स्थापना, फंडिंग और प्रमोटरों के आर्थिक लेन-देन की व्यापक समीक्षा की।
बैठक में निर्णय लिया गया कि अल फलाह यूनिवर्सिटी का पूर्ण forensic audit कराया जाएगा, जिसकी कमान ED संभालेगी। आर्थिक अपराधों की जांच एजेंसी SFIO (सीरियस फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन ऑफिस) भी इस पूरी प्रक्रिया में ED का सहयोग करेगी।
सूत्रों के मुताबिक forensic audit में निम्न बिंदुओं की गहराई से जांच होगी—
- 1997 में अल फलाह इंजीनियरिंग कॉलेज की स्थापना
- 2014 में यूनिवर्सिटी के रूप में मान्यता का पूरा प्रोसेस
- मेडिकल व अन्य कोर्सेस की शुरुआत
- चैरिटेबल ट्रस्ट की आय–व्यय का रिकॉर्ड
- खाड़ी देशों (Gulf nations) से मिले कथित फंड के स्रोत
- क्या इन फंड्स का उपयोग दिल्ली विस्फोट में इस्तेमाल आतंकी मॉड्यूल तक पहुँचा?
जांच एजेंसियां हर रुपये का हिसाब खंगालेंगी, ताकि यह साफ हो सके कि यूनिवर्सिटी के नाम पर कहीं आतंकियों के लिए आर्थिक रास्ते तो नहीं खोले गए।
सरकार का सख्त रुख—“एक भी दोषी बख्शा नहीं जाएगा”
अमित शाह ने स्पष्ट कहा कि भारत सरकार इस मामले को एक साधारण आपराधिक घटना के रूप में नहीं देख रही, बल्कि इसे “राष्ट्र की सुरक्षा पर हमला” माना जा रहा है। इसलिए सजा भी उतनी ही कठोर होगी।
जांच के दायरे में केवल सीधे आरोपी ही नहीं, बल्कि फंडिंग, साजिश और सहयोग देने वाली हर इकाई शामिल होगी।











