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गजब रात रिव्यू: मनोज बाजपेयी की दमदार एक्टिंग ने संभाली क्राइम थ्रिलर की कमान, जानें कैसी है नेटफ्लिक्स की फिल्म

On: October 24, 2026
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गजब रात रिव्यू, मनोज बाजपेयी की दमदार एक्टिंग ने संभाली क्राइम थ्रिलर की कमान
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नई दिल्ली/24 अक्टूबर 2026: नेटफ्लिक्स पर रिलीज हुई मनोज बाजपेयी की क्राइम सस्पेंस थ्रिलर फिल्म ‘गजब रात’ इन दिनों चर्चा में है। भ्रष्ट पुलिस व्यवस्था, अपराध और सियासत के गठजोड़ के बीच बुनी गई यह कहानी दर्शकों को एक रात के घटनाक्रम में उलझाए रखने की कोशिश करती है। मनोज बाजपेयी अपनी दमदार अदाकारी से फिल्म को मजबूती देते हैं, लेकिन कमजोर लेखन और कुछ किरदारों के अधूरे इस्तेमाल के कारण कहानी हर मोर्चे पर प्रभाव नहीं छोड़ पाती। ऐसे में सवाल है कि क्या ‘गजब रात’ को देखने के लिए अपना समय निकालना चाहिए? आइए जानते हैं फिल्म का पूरा रिव्यू।

गजब रात रिव्यू: क्या है फिल्म की कहानी?

मनोज बाजपेयी की फिल्म ‘गजब रात’ में भ्रष्ट पुलिस अधिकारी अजय निर्वित की कहानी दिखाई गई है। निर्वित ऐसा पुलिसकर्मी है, जिसके लिए ईमानदारी से ज्यादा अहमियत पैसों की है। अपने फायदे के लिए वह नियमों को ताक पर रखने से भी पीछे नहीं हटता।

फिल्म की शुरुआत दिल्ली के एक होटल में पुलिस की छापेमारी से होती है। इस दौरान नुसरत भरूचा का किरदार रोजी भी वहां मौजूद होता है। रिश्वत मिलने के बाद निर्वित रोजी को छोड़ देता है, जबकि बाकी लोगों को हिरासत में ले लिया जाता है। यहीं से फिल्म अपने मुख्य किरदार की असलियत सामने रख देती है।

कहानी में मोड़ तब आता है, जब एक चलती कार से गंभीर रूप से घायल लड़की बाहर कूद जाती है। मामले की जिम्मेदारी अजय निर्वित को सौंपी जाती है। लड़की को अस्पताल में भर्ती कराया जाता है, लेकिन अधिकारी की प्राथमिकता उसकी जान बचाना नहीं, बल्कि इस मामले से अपने लिए फायदा निकालना है।

इसी बीच एक संदिग्ध सीबीआई अधिकारी की एंट्री होती है। इसके बाद घटनाएं तेजी से आगे बढ़ती हैं और निर्वित लड़की को अस्पताल में ही खत्म करने की योजना बनाने लगता है।

आखिर वह लड़की कौन है? सीबीआई अधिकारी की भूमिका क्या है? और क्या अजय निर्वित अपने मंसूबों में कामयाब हो पाता है? फिल्म इन सवालों के जवाब धीरे-धीरे खोलती है। कहानी में कई ऐसे मोड़ आते हैं, जो दर्शकों की दिलचस्पी बनाए रखते हैं।

गजब रात में मनोज बाजपेयी की एक्टिंग कैसी है?

मनोज बाजपेयी इस फिल्म की सबसे बड़ी ताकत हैं। भ्रष्ट, स्वार्थी और अपने फायदे के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार पुलिस अधिकारी के रूप में वह अपने किरदार को विश्वसनीय बनाने की कोशिश करते हैं। उनके चेहरे के भाव, संवाद बोलने का अंदाज और परिस्थितियों के अनुसार बदलता व्यवहार फिल्म को देखने लायक बनाते हैं।

अक्षय ओबेरॉय और साकिब सलीम ने भी अपने किरदारों के साथ अच्छा काम किया है। राजीव गुप्ता का हरियाणवी लहजा उनके अभिनय को अलग पहचान देता है।

वहीं दिव्या दत्ता और नुसरत भरूचा जैसी अभिनेत्रियों से ज्यादा उम्मीद की जा सकती थी। दोनों का स्क्रीनटाइम सीमित है, जिस वजह से उनके किरदारों को कहानी में खुलकर सामने आने का मौका नहीं मिल पाता। कीकू शारदा का इस्तेमाल भी अपेक्षाकृत कम प्रभावी नजर आता है।

गजब रात का निर्देशन और कहानी कितनी प्रभावी है?

फिल्म का निर्देशन रितेश शाह ने किया है, जो ‘पिंक’, ‘एयरलिफ्ट’ और ‘रेड’ जैसी फिल्मों की लेखन टीम से जुड़े रहे हैं। करीब 2 घंटे 3 मिनट की यह फिल्म एक रात के घटनाक्रम के इर्द-गिर्द घूमती है।

कहानी का माहौल सस्पेंस बनाए रखने में मदद करता है। घटनाएं एक के बाद एक सामने आती हैं और दर्शक यह जानने के लिए उत्सुक रहते हैं कि आगे क्या होने वाला है। फिल्म का विषय भी केवल अपराध की गुत्थी सुलझाने तक सीमित नहीं रहता। भ्रष्टाचार, सत्ता के दुरुपयोग और व्यवस्था के भीतर मौजूद खामियों को कहानी में जगह दी गई है।

हालांकि, निर्देशक और कलाकारों की कोशिशों के बावजूद लेखन कुछ जगह कमजोर पड़ता है। खास तौर पर किरदारों के व्यवहार में आने वाले बदलावों को पर्याप्त आधार नहीं मिल पाता। यही वजह है कि फिल्म का प्रभाव कुछ दृश्यों में मजबूत होने के बावजूद पूरी कहानी में एक जैसा नहीं रहता।

गजब रात की खूबियां क्या हैं?

फिल्म की पहली बड़ी खूबी मनोज बाजपेयी का अभिनय है। वह अपने किरदार में एक अलग तरह की बेचैनी और चालाकी लेकर आते हैं, जिससे कहानी को गति मिलती है।

दूसरी खास बात इसका सीमित समय में घटने वाला घटनाक्रम है। पूरी कहानी एक रात में आगे बढ़ती है, इसलिए फिल्म में लगातार कुछ नया होने की गुंजाइश बनी रहती है। सस्पेंस और अपराध की परतें दर्शकों को जोड़े रखने का काम करती हैं।

इसके अलावा फिल्म का विषय भी ध्यान खींचता है। भ्रष्ट व्यवस्था, गंदी राजनीति और अपराध के बीच संबंधों को दिखाने की कोशिश इसे सामान्य क्राइम थ्रिलर से थोड़ा अलग बनाती है। सहायक कलाकार भी अपनी भूमिकाओं में अच्छा योगदान देते हैं।

गजब रात की सबसे बड़ी कमियां क्या हैं?

फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी अजय निर्वित के चरित्र में आने वाला अचानक बदलाव है। शुरुआत में पैसों के लिए किसी भी हद तक जाने वाला अधिकारी एक ही रात में बदलता हुआ दिखाई देता है। लेकिन उसके इस बदलाव के पीछे पर्याप्त भावनात्मक या परिस्थितिजन्य आधार नजर नहीं आता।

किसी किरदार का बदलना अपने आप में गलत नहीं है, लेकिन दर्शक उस बदलाव के पीछे की वजह समझना चाहते हैं। यहां कहानी उस जरूरी पहलू को मजबूती से स्थापित नहीं कर पाती।

नुसरत भरूचा और कीकू शारदा जैसे कलाकारों के किरदारों को भी ज्यादा प्रभावशाली बनाया जा सकता था। अक्षय ओबेरॉय और साकिब सलीम की भूमिकाओं में भी विस्तार की गुंजाइश नजर आती है।

फिल्म की राइटिंग कुछ हिस्सों में कमजोर पड़ती है, जिससे कुछ किरदार अधूरे लगते हैं। क्लाइमैक्स भी हर दर्शक की उम्मीदों पर खरा उतरे, यह जरूरी नहीं। फिल्म के पुराने शीर्षक ‘घूसखोर पंडत’ को लेकर हुए विवाद के बाद इसका नाम ‘गजब रात’ रखा गया। हालांकि, नया शीर्षक कहानी के मूल विषय को उतनी स्पष्टता से सामने नहीं लाता।

गजब रात रिव्यू: आखिर देखनी चाहिए या नहीं?

अगर आपको क्राइम सस्पेंस और थ्रिलर फिल्में पसंद हैं, तो ‘गजब रात’ एक बार देखी जा सकती है। मनोज बाजपेयी का अभिनय और कहानी में बने रहने वाला रहस्य फिल्म को देखने की वजह देते हैं।

हालांकि, मजबूत पटकथा, किरदारों के विकास और प्रभावशाली क्लाइमैक्स की उम्मीद रखने वाले दर्शकों को कुछ निराशा हो सकती है। फिल्म की सबसे बड़ी उपलब्धि इसका विषय और मुख्य अभिनेता का प्रदर्शन है, जबकि सबसे बड़ी कमी कहानी के कुछ अहम मोड़ों को पर्याप्त मजबूती नहीं मिलना है।

फाइनल वर्डिक्ट: ‘गजब रात’ एक ऐसी क्राइम थ्रिलर है, जिसमें विचार और अभिनय की ताकत तो है, लेकिन कमजोर लेखन इसे एक यादगार फिल्म बनने से रोकता है। मनोज बाजपेयी के प्रशंसकों और सस्पेंस पसंद करने वाले दर्शकों के लिए यह एक बार देखने लायक विकल्प है।

फिल्म: गजब रात
मुख्य कलाकार: मनोज बाजपेयी, नुसरत भरूचा, अक्षय ओबेरॉय, साकिब सलीम, दिव्या दत्ता, राजीव गुप्ता और कीकू शारदा
निर्देशक: रितेश शाह
अवधि: लगभग 2 घंटे 3 मिनट
प्लेटफॉर्म: नेटफ्लिक्स

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