लखनऊ, 26 जनवरी 2026। विधानभवन के सामने सुबह का आसमान अभी पूरी तरह साफ भी नहीं हुआ था कि बूटों की लयबद्ध धमक ने हवा में एक अलग ही कंपन भर दिया। इन्फेंट्री व्हीकल बीएमपी–2 सारथ की गड़गड़ाहट सुनते ही ऐसा लगा मानो परेड ग्राउंड क्षण भर को रणभूमि में बदल गया हो। यह दृश्य था गणतंत्र दिवस परेड लखनऊ का, जहां 77वें गणतंत्र दिवस पर सेना के शौर्य, अनुशासन और भारत की बढ़ती आत्मनिर्भरता का जीवंत प्रदर्शन हुआ।
ब्रास बैंड की धुन— “जहां डाल-डाल पर सोने की चिड़िया करती है बसेरा…”—जैसे ही हवा में तैरने लगी, दर्शक दीर्घा में बैठे लोग स्वतः खड़े हो गए। कई आंखें नम थीं, कई मोबाइल कैमरे ऊपर उठे हुए थे, और हर चेहरा उस पल को अपने भीतर सहेज लेना चाहता था।
ध्वजारोहण के बाद परेड की औपचारिक शुरुआत हुई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आगमन के पश्चात राज्यपाल आनंदी बेन पटेल मंच पर पहुंचीं। जैसे ही तिरंगा फहरा, हेलीकॉप्टर से हुई पुष्पवर्षा ने पूरे वातावरण को उत्सव और गर्व के रंग में रंग दिया। आसमान से गिरती पंखुड़ियां और नीचे खड़े हजारों लोग—यह दृश्य देर तक याद रहने वाला था।
सेना और अर्धसैनिक बलों की प्रभावशाली मौजूदगी
परेड का नेतृत्व मेजर ओंकार निशांत कर रहे थे। मंच के सामने पहुंचकर उन्होंने सलामी दी, और इसके साथ ही अनुशासित कदमों की लंबी श्रृंखला आगे बढ़ती गई। सबसे पहले 16 राजपूत रेजिमेंट का मार्चिंग दल गुजरा। उसके पीछे जाट और सिख लाइट इन्फेंट्री का संयुक्त ब्रास बैंड, फिर 6/11 गोरखा राइफल्स का मार्चिंग दल और 6/11 व 3/5 गोरखा राइफल्स के पाइप बैंड ने अपनी मधुर धुनों से वातावरण को गूंजायमान कर दिया।
इसके बाद आईटीबीपी, सीआरपीएफ, एटीएस, यूपी पुलिस, सशस्त्र सीमा बल, हरियाणा पुलिस, उत्तर प्रदेश वन विभाग, होमगार्ड, पीएसी की 32वीं और 35वीं बटालियन, पीआरडी, एनसीसी, और कैप्टन मनोज पांडेय यूपी सैनिक स्कूल सहित कुल 65 मार्चिंग और बैंड दलों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। हर दल के कदम एक जैसे, चेहरों पर एक जैसा भाव—कर्तव्य, गर्व और राष्ट्रभक्ति।
स्कूलों और संस्थाओं की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां
परेड केवल सैन्य अनुशासन तक सीमित नहीं रही। सेंट जोसेफ कॉलेज राजाजीपुरम, लखनऊ पब्लिक कॉलेज सहारा स्टेट, बाल विद्या मंदिर चारबाग, एस.आर. ग्लोबल बख्शी का तालाब, सिटी मांटेसरी स्कूल राजाजीपुरम, बाल निकुंज इंग्लिश स्कूल पलटन छावनी, उम्मीद संस्था और संस्कृति विभाग ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों से समां बांध दिया। लोकनृत्य, देशभक्ति गीत और नाट्य प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
13 झांकियों में ‘बदलता उत्तर प्रदेश’ और ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष
इस बार की परेड की खास पहचान रहीं 13 झांकियां, जिन्होंने विकास, विरासत और आत्मनिर्भरता की कहानी एक साथ कही।
- लखनऊ पब्लिक स्कूल्स एंड कॉलेजेज – नए हिंदुस्तान का नया शौर्य
- पर्यटन निदेशालय – कालिंजर किला और बुंदेलखंड की सांस्कृतिक धरोहर
- इरम एजुकेशनल सोसाइटी – नया भारत: आत्मनिर्भर और विकसित भारत
- सूचना एवं जनसंपर्क विभाग – विकसित भारत, विकसित उत्तर प्रदेश
- लखनऊ विकास प्राधिकरण – राष्ट्र प्रेरणा स्थल
- जन भवन सचिवालय – वंदे मातरम के 150 वर्ष की गौरव यात्रा
- यूपीएसआरटीसी – पीपीपी मॉडल से आधुनिक होते बस स्टेशन
- भारत स्काउट गाइड – स्थापना के 75 वर्ष
- चिकित्सा एवं परिवार कल्याण विभाग – मुख्यमंत्री आरोग्य स्वास्थ्य मेला
- कृषि निदेशालय – खेती में ड्रोन तकनीक का उपयोग
- उद्यान विभाग – छत पर बागबानी, जैविक सब्जियों का संदेश
- माध्यमिक शिक्षा विभाग – संस्कृत शिक्षा, विरासत और प्रगति
- वन एवं वन्यजीव विभाग – ग्रीन चौपाल और मानव-वन्यजीव संघर्ष में कमी
- राज्य स्वच्छ गंगा मिशन – नमामि गंगे के तहत गंगा सफाई अभियान
हर झांकी अपने साथ एक संदेश लेकर आई—विकास केवल इमारतों का नहीं, विचारों का भी होता है।
आत्मनिर्भर रक्षा क्षेत्र की झलक
बीएमपी–2 सारथ की मौजूदगी और सैन्य टुकड़ियों का प्रदर्शन यह संकेत देने के लिए पर्याप्त था कि भारत का रक्षा क्षेत्र तेजी से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है। यह परेड केवल परंपरा नहीं, भविष्य का संकेत भी थी।








