लखनऊ, 30 जनवरी 2026। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर राजधानी लखनऊ का शहीद स्मारक परिसर आज एक अलग ही आभा से भरा दिखा। संध्या ढलते ही गोमती तट पर सजे दीपों की कतारों के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोमती तट दीपदान कर गांधीजी और स्वतंत्रता संग्राम के अमर शहीदों को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम में भजन-संध्या की स्वर लहरियां, श्रद्धा की शांति और स्मृति का मौन—तीनों एक साथ उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री ने शहीद स्मारक स्थल पर गांधीजी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की और भजन-संध्या में शामिल हुए। “रघुपति राघव राजा राम” की धुन के साथ वातावरण में एक आध्यात्मिक गंभीरता उतर आई। यह केवल औपचारिकता नहीं थी; क्षण ऐसा था जब सार्वजनिक जीवन और निजी श्रद्धा एक ही फ्रेम में दिखाई दिए।
शहीद स्मारक से गोमती किनारे तक: श्रद्धा का विस्तार
भजन-संध्या के उपरांत मुख्यमंत्री गोमती तट की ओर बढ़े, जहां दीपों की रोशनी पानी की सतह पर कांपती हुई दिखाई दे रही थी। गोमती तट दीपदान के माध्यम से उन्होंने शांति, सद्भाव और सकारात्मक ऊर्जा का संदेश दिया। यह प्रतीकात्मक दृश्य था—अंधेरे में उजाले का, स्मृति में संकल्प का।
इस अवसर पर एमएसएमई, खादी एवं ग्रामोद्योग मंत्री राकेश सचान और लखनऊ की महापौर सुषमा खर्कवाल सहित अन्य गणमान्य उपस्थित रहे। आयोजन सादा, अनुशासित और भावनात्मक था—जैसा कि गांधीजी की स्मृति के अनुरूप अपेक्षित भी है।
गांधीजी के आदर्शों की याद
30 जनवरी भारत के इतिहास में केवल एक तारीख नहीं, बल्कि आत्ममंथन का दिन है। अहिंसा, सत्य और सद्भाव के गांधीवादी संदेश को याद करते हुए मुख्यमंत्री की सहभागिता ने इस आयोजन को औपचारिकता से आगे बढ़ाकर एक सार्वजनिक संकल्प का रूप दिया। दीपदान की यह परंपरा, दरअसल, स्मृति को सामूहिक अनुभव में बदल देती है—जहां लोग, स्थान और इतिहास एक-दूसरे से संवाद करते प्रतीत होते हैं।










