गोरखपुर/शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026: उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में निर्माणाधीन इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम की लागत बढ़कर करीब 400.67 करोड़ रुपये पहुंच गई है। गोरखपुर-वाराणसी मार्ग पर ताल नदौर में बन रहे इस स्टेडियम को बारिश के मौसम में जलभराव और बाढ़ के खतरे से बचाने के लिए जमीन की ऊंचाई बढ़ाई जाएगी। इसके लिए पहले के अनुमान से करीब 1.47 लाख घनमीटर अतिरिक्त मिट्टी भराई की जरूरत सामने आई है।
करीब 46 एकड़ में विकसित होने वाले इस स्टेडियम में 30 हजार दर्शकों के बैठने की क्षमता होगी। परियोजना के आसपास 60 एकड़ भूमि पर विश्वस्तरीय स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स बनाने की भी योजना है। निर्माण स्थल के निचले भूभाग में होने के कारण भविष्य में जलभराव की आशंका को देखते हुए अब स्टेडियम के मैदान, आंतरिक सड़कों और दूसरी सुविधाओं को सुरक्षित ऊंचाई पर विकसित करने की तैयारी है।
गोरखपुर इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम की लागत 392 करोड़ से बढ़कर 400.67 करोड़
स्टेडियम परियोजना की शुरुआती लागत करीब 392 करोड़ रुपये निर्धारित की गई थी। लेकिन मिट्टी भराई की मात्रा में वृद्धि की जरूरत सामने आने के बाद संशोधित लागत करीब 400.67 करोड़ रुपये हो गई है।
प्रस्ताव के अनुसार, पहले 2,78,209 घनमीटर मिट्टी भराई की आवश्यकता का आकलन किया गया था। अब यह मात्रा बढ़कर 4,26,013 घनमीटर हो गई है। इस तरह कुल 1,47,804 घनमीटर अतिरिक्त मिट्टी की जरूरत सामने आई है।
यह बदलाव केवल निर्माण लागत से जुड़ा मामला नहीं है। स्टेडियम की सुरक्षा, खेल गतिविधियों की निरंतरता और आसपास की परियोजनाओं में जलभराव रोकने के लिहाज से भी जमीन की ऊंचाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
शासन ने संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ स्पष्ट और औचित्यपूर्ण प्रस्ताव तैयार करने का निर्देश दिया है, ताकि संशोधित लागत और निर्माण संबंधी जरूरतों पर आगे की कार्रवाई की जा सके।
उच्चतम बाढ़ स्तर 76.03 मीटर के आधार पर तय होगी ऊंचाई
स्टेडियम को बाढ़ और जलभराव से सुरक्षित रखने के लिए स्थल के उच्चतम बाढ़ स्तर यानी एचएफएल (Highest Flood Level) को आधार बनाया गया है।
उपलब्ध विभागीय विवरण के मुताबिक, 22 जनवरी 2026 को स्थल का निरीक्षण किया गया था। इसके बाद 4 फरवरी 2026 को लोक निर्माण विभाग और बाढ़ खंड के अधिकारियों के संयुक्त परामर्श से उच्चतम बाढ़ स्तर 76.03 मीटर निर्धारित किया गया।
लोक निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता के 18 सितंबर 2026 के पत्र के संदर्भ में भेजे गए प्रस्ताव में इसी स्तर को ध्यान में रखते हुए मिट्टी भराई की मात्रा का पुनर्मूल्यांकन किया गया है।
स्टेडियम के खेल मैदान, आंतरिक सड़कें, अभ्यास पिच, विद्युत उपकेंद्र, सीवेज शोधन संयंत्र और अन्य सुविधाओं को आवश्यक ऊंचाई पर विकसित करने की जरूरत बताई गई है। इसका मकसद यह है कि भारी बारिश या बाढ़ जैसी परिस्थितियों में स्टेडियम के संचालन और बुनियादी ढांचे को कम से कम नुकसान पहुंचे।
योगी आदित्यनाथ ने 16 मई 2026 को किया था शिलान्यास
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 16 मई 2026 को गोरखपुर इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम का शिलान्यास किया था। यह परियोजना पूर्वांचल में खेल सुविधाओं के विस्तार की दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
30 हजार दर्शकों की क्षमता वाला यह स्टेडियम तैयार होने के बाद बड़े क्रिकेट मुकाबलों की मेजबानी करने की क्षमता विकसित कर सकेगा। इसके पास प्रस्तावित स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स से क्षेत्र में अन्य खेल गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
हालांकि, किसी भी बड़े खेल परिसर की सफलता केवल दर्शक क्षमता या आधुनिक सुविधाओं से तय नहीं होती। बारिश के मौसम में मैदान की स्थिति, प्रभावी जलनिकासी और निर्माण की गुणवत्ता भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में परियोजना की ऊंचाई बढ़ाने का प्रस्ताव भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है।
पशु चिकित्सा महाविद्यालय और कान्हा उपवन की भी बढ़ेगी ऊंचाई
स्टेडियम के साथ-साथ आसपास की अन्य महत्वपूर्ण परियोजनाओं को भी जलभराव से बचाने की तैयारी की जा रही है। इसी सिलसिले में कमिश्नर इन्द्र विक्रम सिंह ने गुरुवार को लोक निर्माण विभाग, नगर निगम, सिंचाई विभाग और अन्य संबंधित कार्यदायी संस्थाओं के अधिकारियों के साथ बैठक की।
बैठक में निर्माणाधीन पशु चिकित्सा विज्ञान महाविद्यालय और कान्हा उपवन गौशाला सहित क्षेत्र की परियोजनाओं में मिट्टी भराई और जलनिकासी की व्यवस्था पर चर्चा हुई। संबंधित अधिकारियों ने अपनी योजनाओं और आवश्यकताओं की जानकारी भी प्रस्तुत की।
बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि जमीन की ऊंचाई तय करने से पहले पिछले वर्षों में क्षेत्र में हुए जलभराव और जलमग्न परिस्थितियों का परीक्षण किया जाए। इसके बाद ही मिट्टी भराई और जलनिकासी से जुड़े अंतिम निर्णय लिए जाएं।
एक परियोजना का पानी दूसरी परियोजना में न पहुंचे, इस पर भी जोर
क्षेत्र में कई बड़ी परियोजनाएं विकसित की जा रही हैं। ऐसे में केवल एक निर्माण स्थल की ऊंचाई बढ़ा देना पर्याप्त नहीं होगा। यदि आसपास की जमीन और जलनिकासी व्यवस्था का समुचित आकलन नहीं किया गया, तो एक स्थान पर किया गया बदलाव दूसरे क्षेत्र में पानी जमा होने की समस्या पैदा कर सकता है।
इसी को ध्यान में रखते हुए शासन ने सभी संबंधित विभागों को समन्वय के साथ प्रस्ताव तैयार करने को कहा है। उद्देश्य यह है कि स्टेडियम, पशु चिकित्सा विज्ञान महाविद्यालय, कान्हा उपवन और आसपास की दूसरी परियोजनाओं में जलनिकासी की व्यवस्था एक-दूसरे के अनुरूप रहे।
गोरखपुर इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम की संशोधित लागत और अतिरिक्त मिट्टी भराई का प्रस्ताव अब परियोजना के अगले चरण के लिए महत्वपूर्ण होगा। अंतिम निर्णय में निर्माण की सुरक्षा, लागत और पूरे क्षेत्र की जलनिकासी व्यवस्था के बीच संतुलन बनाना जरूरी रहेगा।









