गोरखपुर, 27 जनवरी 2026। गोरखनाथ मंदिर परिसर मंगलवार सुबह एक बार फिर जनसमस्याओं के समाधान का केंद्र बना, जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जनता दर्शन में करीब 200 लोगों की शिकायतें सुनीं। हर फरियादी के पास जाकर, आंखों में भरोसा भरते हुए सीएम ने कहा— “घबराइए मत, आपकी समस्या का समाधान कराया जाएगा।” यह वाक्य सिर्फ सांत्वना नहीं, बल्कि प्रशासनिक तंत्र के लिए स्पष्ट निर्देश भी था।
सोमवार देर शाम गोरखपुर पहुंचे मुख्यमंत्री ने गोरखनाथ मंदिर में रात्रि विश्राम किया। मंगलवार सुबह महंत दिग्विजयनाथ स्मृति भवन में आयोजित जनता दर्शन में वे निर्धारित समय से पहले पहुंच गए। कुर्सियों पर बैठे लोगों तक स्वयं जाकर उन्होंने एक-एक प्रार्थना पत्र पढ़ा, समस्या सुनी और पास खड़े अधिकारियों को तत्काल निर्देश दिए।
संवेदनशीलता और समयबद्ध समाधान पर जोर
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि हर शिकायत पर संवेदनशील, त्वरित, पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण कार्रवाई हो। उन्होंने कहा कि निस्तारण ऐसा हो, जिससे पीड़ित व्यक्ति संतुष्ट महसूस करे। कुछ मामलों में जमीन कब्जे की शिकायतें सामने आईं, जिस पर सीएम ने सख्त कानूनी कार्रवाई के आदेश दिए।
गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए आर्थिक सहायता
हर बार की तरह इस जनता दर्शन में भी कई लोग गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए आर्थिक सहायता की गुहार लेकर पहुंचे थे। मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि इलाज में धन की कमी आड़े नहीं आएगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि अस्पतालों से इस्टीमेट की प्रक्रिया जल्द पूरी कराकर शासन को भेजी जाए, ताकि मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से शीघ्र सहायता दी जा सके।
बच्चों से आत्मीय संवाद
जनता दर्शन में अपने परिजनों के साथ आए बच्चों से सीएम योगी ने विशेष स्नेह दिखाया। उन्हें पढ़ाई के लिए प्रेरित किया और चॉकलेट भी वितरित की। यह दृश्य औपचारिक कार्यक्रम से आगे बढ़कर एक पारिवारिक माहौल जैसा प्रतीत हुआ, जहां शासन और जनता के बीच दूरी कम होती नजर आई।
गोशाला में गोसेवा और ‘पुंज’ से मुलाकात
सुबह की दिनचर्या में मुख्यमंत्री ने गुरु गोरखनाथ का दर्शन-पूजन किया और अपने गुरुदेव ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की प्रतिमा के समक्ष श्रद्धा अर्पित की। इसके बाद वे मंदिर परिसर की गोशाला पहुंचे। यहां उन्होंने गोवंश को नाम लेकर पुकारा, रोटी और गुड़ अपने हाथों से खिलाया।
गोशाला में एक मोर भी उनके पास आ पहुंचा, जिसे मुख्यमंत्री ‘पुंज’ नाम से पुकारते हैं। उन्होंने रोटी के छोटे टुकड़े कर मोर को भी अपने हाथों से खिलाया। यह दृश्य प्रशासनिक व्यस्तताओं के बीच उनकी परंपरागत दिनचर्या और प्रकृति-प्रेम की झलक देता रहा।
भरोसे का संदेश
जनता दर्शन केवल शिकायत सुनने का मंच नहीं रहा, बल्कि भरोसे का संदेश देने का माध्यम भी बना। मुख्यमंत्री का स्पष्ट संदेश था— सरकार हर नागरिक के साथ खड़ी है, किसी को घबराने की आवश्यकता नहीं।










