गोरखपुर (15 फरवरी 2026): पूर्वांचल की औद्योगिक पहचान को नई दिशा देने की तैयारी शुरू हो चुकी है। गोरखपुर के धुरियापार औद्योगिक टाउनशिप में श्रेयस ग्रुप द्वारा करीब 8,500 करोड़ रुपये की लागत से एक अल्ट्रा सुपर मेगा प्रोजेक्ट स्थापित किया जा रहा है। यह परियोजना सिर्फ एक औद्योगिक निवेश नहीं, बल्कि क्षेत्र की आर्थिक सोच और रोजगार ढांचे को बदलने वाली पहल मानी जा रही है।
रविवार को श्रेयस ग्रुप्स ऑफ कंपनीज के अध्यक्ष एवं केयान डिस्टलरीज प्राइवेट लिमिटेड के एमडी विनय कुमार सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर परियोजना के भूमि पूजन के लिए अनुरोध किया। बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने प्रोजेक्ट की रूपरेखा की जानकारी लेते हुए जल्द भूमि पूजन के लिए समय निर्धारण का आश्वासन दिया।
सोलर और बायोफ्यूल का इंटीग्रेटेड मॉडल
इस अल्ट्रा सुपर मेगा प्रोजेक्ट की खास बात यह है कि इसे पारंपरिक उद्योग मॉडल से अलग, सोलर एनर्जी और बायोफ्यूल आधारित एकीकृत औद्योगिक इकाई के रूप में विकसित किया जा रहा है।
परियोजना के तहत करीब 300 मेगावाट क्षमता का सोलर प्लांट स्थापित होगा, जिससे स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा और औद्योगिक संचालन में ऊर्जा लागत को स्थिर रखने में मदद मिलेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह मॉडल भविष्य के औद्योगिक निवेशों के लिए उदाहरण बन सकता है, क्योंकि इसमें पर्यावरणीय संतुलन और उत्पादन क्षमता—दोनों पर बराबर ध्यान दिया गया है।
डिस्टिलरी में होगा बड़े पैमाने पर उत्पादन
प्रोजेक्ट के मुख्य आकर्षणों में अत्याधुनिक डिस्टिलरी प्लांट शामिल है, जिसकी क्षमता औद्योगिक स्तर पर बेहद बड़ी मानी जा रही है। प्रस्तावित संयंत्र में प्रतिदिन 18 लाख लीटर इथेनॉल और 4 लाख लीटर एक्स्ट्रा न्यूट्रल अल्कोहल (ENA) का उत्पादन होगा।
इसके साथ ही करीब 15 लाख बोतलों प्रतिदिन की बाटलिंग क्षमता विकसित की जाएगी। प्रीमियम इंग्लिश लिकर, सिंगल माल्ट और बीयर उत्पादन की भी योजना है। इस उत्पादन व्यवस्था से प्रदेश के राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि की उम्मीद जताई जा रही है।
स्थानीय उद्योग जगत का मानना है कि इससे गोरखपुर सिर्फ उत्पादन केंद्र ही नहीं, बल्कि एक संगठित औद्योगिक ब्रांड के रूप में उभर सकता है।
170 एकड़ भूमि की मांग, औद्योगिक विस्तार की तैयारी
गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण (गीडा) ने हाल ही में श्रेयस ग्रुप को 60.5 एकड़ भूमि आवंटित की है। हालांकि, परियोजना के पूर्ण विकास के लिए कंपनी ने कुल 170 एकड़ भूमि की मांग की है।
प्राधिकरण के अनुसार होली के बाद शेष भूमि के लिए विज्ञापन जारी कर आवंटन प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा। इससे स्पष्ट है कि प्रशासन भी इस निवेश को लेकर सक्रिय भूमिका निभा रहा है।
14 हजार रोजगार और नई टाउनशिप का विकास
केयान डिस्टलरीज के सहायक महाप्रबंधक (प्रशासन एवं जनसंपर्क) आत्मानंद सिंह के अनुसार, यह परियोजना लगभग 14,000 लोगों के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा करेगी।
कर्मचारियों के लिए परिसर में ही लगभग 12 हजार आवासों के निर्माण की योजना बनाई गई है। यानी यह सिर्फ फैक्ट्री परिसर नहीं होगा, बल्कि एक संगठित औद्योगिक टाउनशिप के रूप में विकसित किया जाएगा, जहां काम और आवास दोनों की सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
गोरखपुर की बदलती औद्योगिक पहचान
पिछले कुछ वर्षों में गोरखपुर धार्मिक और शैक्षिक केंद्र के साथ-साथ औद्योगिक निवेश के नए केंद्र के रूप में उभर रहा है। इस अल्ट्रा सुपर मेगा प्रोजेक्ट को लेकर स्थानीय व्यापारियों और युवाओं में खास उत्साह है, क्योंकि इससे रोजगार के साथ-साथ सहायक उद्योगों, ट्रांसपोर्ट और सर्विस सेक्टर को भी गति मिलने की संभावना है।
कुल मिलाकर, यह प्रोजेक्ट गोरखपुर को पूर्वी उत्तर प्रदेश के बड़े औद्योगिक हब के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक निर्णायक कदम माना जा रहा है।









