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संत परंपरा ने संकट में भी राष्ट्र की आत्मा को जीवित रखा: CM योगी ने Guru Nanak Dev Jayanti पर दिया संदेश

On: November 5, 2025
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CM योगी ने Guru Nanak Dev Jayanti पर दिया संदेश
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लखनऊ, बुधवार 05 नवंबर 2025। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राजधानी लखनऊ के डीएवी कॉलेज में आयोजित गुरु नानक देव जी के 556वें प्रकाश पर्व पर कहा कि भारत वह भूमि है, जहां संतों और महापुरुषों की परंपरा ने हर संकट में भी राष्ट्र की आत्मा को जीवित रखा है। Guru Nanak Dev Jayanti के इस पावन अवसर पर बोलते हुए उन्होंने सिख गुरुओं की आध्यात्मिक शक्ति और सामाजिक मार्गदर्शन की भावना को नमन किया।

“500 वर्ष पुराना संदेश आज भी जीवंत”

मुख्यमंत्री योगी ने कहा, “गुरु नानक देव जी ने करीब 500 वर्ष पहले जो संगठन, समानता और सेवा का संदेश दिया था, वह आज भी भारत की सामाजिक व्यवस्था की नींव है। जो समाज बिना भेदभाव, संगठित होकर और परस्पर सहयोग की भावना से चलता है, वही वास्तविक रूप से प्रगतिशील होता है।”

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे मुख्यमंत्री ने सिख समुदाय के प्रतिनिधियों द्वारा अंगवस्त्र और स्मृति चिह्न भेंट किए जाने पर आभार जताया। उन्होंने गुरु नानक देव जी के जीवन से प्रेरणा लेने का आह्वान किया और कहा कि आज भी उनका संदेश उतना ही प्रासंगिक है।

“आक्रांताओं के समय भी गुरु नानक का साहस अडिग था”

योगी आदित्यनाथ ने ऐतिहासिक संदर्भों का जिक्र करते हुए कहा कि जिस दौर में देश बाबर जैसे विदेशी आक्रांताओं की हिंसा और मंदिरों के विध्वंस से त्रस्त था, उसी समय गुरु नानक देव जी ने लोगों में भय को तोड़ते हुए उन्हें सत्य और साहस के रास्ते पर चलाया।

उन्होंने कहा, “जब अधिकांश राजा-रजवाड़े विदेशी हमलावरों के आगे घुटने टेक रहे थे, तब गुरु नानक देव जी ने निडर होकर बाबर को ‘जाबर’ यानी जल्लाद कहा। यह दर्शाता है कि संत परंपरा मात्र आध्यात्मिक नहीं, बल्कि राष्ट्र की आत्मा को सहेजने वाली शक्ति भी है।”

एकता, सेवा और संगठन की मूल भावना को सशक्त करने की जरूरत

सीएम योगी ने समाज में धर्मांतरण और विभाजन की कोशिशों के बीच सिख पंथ की एकता और सेवा पर आधारित परंपरा को सुदृढ़ करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा, “गुरु गोविंद सिंह जी ने खालसा पंथ की स्थापना कर समाज के हर वर्ग को एक सूत्र में बांधा था। आज भी वही भावना हमारी मार्गदर्शक होनी चाहिए।”

उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई समाज दुविधा में रहता है, तो बाहरी शक्तियाँ उसकी कमजोरी का फायदा उठा सकती हैं। “इसलिए हमें अपनी आस्था, परंपरा और संस्कृति के प्रति सजग रहना होगा।”

संतों का मार्ग: संकट में प्रकाश की किरण

योगी ने अपने वक्तव्य के अंत में दोहराया कि संतों का जीवन सिर्फ धार्मिक मार्गदर्शन नहीं है, बल्कि यह संघर्ष के दौर में उम्मीद, साहस और सत्य की मिसाल भी है। “चाहे संकट कितना भी गहरा क्यों न हो, संत परंपरा ने हमेशा देश की आत्मा को जीवित रखा है।”

उन्होंने प्रदेशवासियों को गुरु नानक देव जी के प्रकाश पर्व की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उनकी शिक्षाएं “हमारे जीवन और समाज को सही दिशा देती रहें।”

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