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ज्ञान भारतम मिशन: यूपी की प्राचीन पांडुलिपियों को मिलेगा डिजिटल अवतार, 75 साल पुराने ग्रंथों पर शुरू हुआ सर्वे

On: February 18, 2026
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ज्ञान भारतम मिशन- यूपी की प्राचीन पांडुलिपियों को मिलेगा डिजिटल अवतार
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गोरखपुर (Wed, 18 Feb 2026)। उत्तर प्रदेश में सदियों पुरानी ज्ञान परंपरा को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। ज्ञान भारतम मिशन के अंतर्गत राज्य सरकार ने 75 वर्ष से अधिक पुराने हस्तलिखित ग्रंथों और दुर्लभ पांडुलिपियों की पहचान, सर्वेक्षण और डिजिटलीकरण की प्रक्रिया तेज कर दी है। यह पहल सिर्फ दस्तावेजों को बचाने तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत की बौद्धिक धरोहर को आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित पहुंचाने का प्रयास भी है।

राज्य सरकार के निर्देशों के बाद सभी जिलों में इस अभियान की औपचारिक शुरुआत हो चुकी है। प्रत्येक जिले में मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है, जो स्थानीय स्तर पर पांडुलिपियों के संग्रह और सूची तैयार करने की निगरानी करेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल भारत की प्राचीन ज्ञान विरासत को डिजिटल दुनिया में नई पहचान दिला सकती है।

क्या है ज्ञान भारतम मिशन और क्यों है यह खास

‘ज्ञान भारतम मिशन’ भारत की समृद्ध ज्ञान परंपरा—जैसे दर्शन, साहित्य, धर्म, इतिहास और सांस्कृतिक लेखन—को संरक्षित करने वाला राष्ट्रीय स्तर का अभियान है। उत्तर प्रदेश इस मिशन का अहम केंद्र माना जा रहा है, क्योंकि यह प्रदेश प्राचीन शिक्षा और सांस्कृतिक विरासत की भूमि रहा है।

इस मिशन के तहत सरकारी और गैर-सरकारी संस्थानों, मठों, मंदिरों, निजी व सार्वजनिक पुस्तकालयों और व्यक्तिगत संग्रहों में सुरक्षित पांडुलिपियों की पहचान की जा रही है। इनमें ताड़पत्र, भोजपत्र, हस्तलिखित ग्रंथ और अन्य दुर्लभ दस्तावेज शामिल हैं। इनका वैज्ञानिक संरक्षण, कैटलॉगिंग और उच्च गुणवत्ता वाली स्कैनिंग के जरिए डिजिटलीकरण किया जाएगा, ताकि शोधार्थियों और आम नागरिकों के लिए यह सामग्री भविष्य में आसानी से उपलब्ध हो सके।

गोरखपुर से शुरुआत, जिलों में तेज हुआ सर्वे

गोरखपुर के उप निदेशक संस्कृति यशवंत सिंह राठौर के अनुसार, इस अभियान का मुख्य उद्देश्य ऐसे दुर्लभ दस्तावेजों को बचाना है जो समय के साथ नष्ट होने की कगार पर पहुंच चुके हैं। जिला स्तर पर टीमें उन संस्थाओं और व्यक्तियों से संपर्क करेंगी जिनके पास पुराने हस्तलिखित ग्रंथ सुरक्षित हैं।

खास बात यह है कि डिजिटलीकरण के बाद भी मूल पांडुलिपियां संबंधित व्यक्ति या संस्था के पास ही रहेंगी। सरकार केवल उनका डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करेगी, जिससे एक ओर विरासत सुरक्षित रहेगी और दूसरी ओर मालिकाना अधिकार भी प्रभावित नहीं होंगे।

डिजिटल अवतार से शोध और शिक्षा को मिलेगा नया आधार

विशेषज्ञों का कहना है कि जैसे-जैसे पांडुलिपियां ‘ज्ञान भारतम पोर्टल’ पर उपलब्ध होंगी, वैसे-वैसे शोध कार्यों में तेजी आएगी। अब तक कई महत्वपूर्ण ग्रंथ सीमित पहुंच के कारण शोधार्थियों तक नहीं पहुंच पाते थे, लेकिन डिजिटल स्वरूप में वे देश-विदेश के शिक्षाविदों के लिए सुलभ हो सकेंगे।

यह पहल सिर्फ संरक्षण का प्रयास नहीं बल्कि ज्ञान के लोकतंत्रीकरण की दिशा में भी एक बड़ा कदम है। आधुनिक तकनीक और पारंपरिक ज्ञान का यह संगम नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का काम करेगा।

विरासत बचाने की समय की मांग

लंबे समय से रखरखाव के अभाव में कई प्राचीन ग्रंथ खराब हो रहे थे। अब सर्वे और वैज्ञानिक संरक्षण की प्रक्रिया शुरू होने से उम्मीद है कि हजारों साल पुरानी बौद्धिक विरासत को नया जीवन मिल सकेगा। यह अभियान न सिर्फ उत्तर प्रदेश बल्कि पूरे देश के सांस्कृतिक इतिहास को सहेजने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

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