हरिपाद (केरल), 06 अप्रैल 2026। केरल विधानसभा चुनाव से ठीक पहले राजनीतिक सरगर्मियां चरम पर हैं, और इसी कड़ी में हरिपाद रोड शो ने सोमवार को सियासी तापमान और बढ़ा दिया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हरिपाद में एक भव्य रोड शो कर NDA उम्मीदवार Sandeep Vachaspati के पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश की।
बारिश की हल्की फुहारों के बावजूद सड़कों पर जुटी भीड़ ने साफ संकेत दिया कि चुनावी मुकाबला सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि भावनात्मक जुड़ाव का भी बन चुका है।
बारिश भी नहीं रोक पाई समर्थकों का उत्साह
गांधी चौक से शुरू हुआ यह रोड शो हरिपाद के प्रमुख इलाकों से होकर गुजरा। सड़कों के दोनों ओर खड़े समर्थकों ने हाथों में भाजपा के झंडे और नेताओं के कट-आउट लेकर जोरदार नारेबाजी की।
रोड शो में शामिल कार्यकर्ताओं की संख्या सैकड़ों में रही, जिनमें युवाओं से लेकर बुजुर्ग तक शामिल थे। कई कार्यकर्ता पार्टी की टोपी पहने हुए थे, जो माहौल को पूरी तरह चुनावी रंग में रंग रहा था।
अमित शाह ने भी खुले वाहन से पूरे रास्ते समर्थकों का अभिवादन किया। उनके हाव-भाव से यह साफ झलक रहा था कि NDA इस सीट को लेकर कोई कसर नहीं छोड़ना चाहता।
हरिपाद सीट पर त्रिकोणीय मुकाबला दिलचस्प
इस बार हरिपाद विधानसभा सीट पर मुकाबला बेहद रोचक हो गया है। एक ओर NDA के संदीप वाचस्पति हैं, तो दूसरी ओर कांग्रेस ने अपने अनुभवी नेता Ramesh Chennithala को फिर से मैदान में उतारा है।
वहीं सत्तारूढ़ वाम मोर्चा (LDF) की ओर से CPI उम्मीदवार T T Jismon चुनावी मैदान में हैं। ऐसे में यह सीट अब सीधी लड़ाई न होकर त्रिकोणीय संघर्ष में बदल गई है, जहां हर वोट निर्णायक साबित हो सकता है।
चुनावी संदेश: संगठन और रणनीति दोनों पर फोकस
अमित शाह का यह दौरा सिर्फ एक रोड शो तक सीमित नहीं था, बल्कि यह NDA की रणनीति का हिस्सा भी माना जा रहा है। केरल जैसे राज्य में, जहां भाजपा की पकड़ सीमित रही है, वहां इस तरह के शक्ति प्रदर्शन पार्टी के आत्मविश्वास को दर्शाते हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस रोड शो के जरिए NDA ने यह संकेत देने की कोशिश की है कि वह केरल में अपनी उपस्थिति को मजबूत करने के लिए गंभीर है।
निष्कर्ष: मुकाबला कड़ा, हरिपाद बना हॉट सीट
हरिपाद अब केरल चुनाव की हॉट सीट्स में शामिल हो चुका है। यहां का चुनावी माहौल बताता है कि मुकाबला कांटे का होगा और आखिरी समय तक स्थिति साफ नहीं होगी।
अब नजरें 9 अप्रैल पर टिकी हैं, जब वोटिंग के जरिए यह तय होगा कि हरिपाद की जनता किसके साथ खड़ी है—अनुभव, विचारधारा या बदलाव के वादे के साथ।












