नई दिल्ली, 31 जनवरी 2026। India-Arab Foreign Ministers Meeting के दूसरे दौर में भारत ने आतंकवाद पर अपना रुख फिर दोहराया—साफ, सख्त और बिना किसी अस्पष्टता के। विदेश मंत्री S. Jaishankar ने कहा कि सीमा पार आतंकवाद अंतरराष्ट्रीय संबंधों के मूल सिद्धांतों का उल्लंघन है और इसे दुनिया में कहीं भी स्वीकार नहीं किया जा सकता।
उनका संदेश सीधा था: आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक नियम एक जैसे होने चाहिए, और जो समाज इसका निशाना बनते हैं, उन्हें अपनी रक्षा का पूरा अधिकार है—वे स्वाभाविक रूप से उसका उपयोग भी करेंगे।
‘पश्चिम एशिया’ भारत के लिए रणनीतिक रूप से अहम
अपने संबोधन में जयशंकर ने मौजूदा भू-राजनीतिक परिदृश्य की चर्चा करते हुए कहा कि बीते एक वर्ष में पश्चिम एशिया की स्थिति में बड़े बदलाव आए हैं, जिनका प्रभाव क्षेत्र से बाहर तक महसूस किया गया। भारत के लिए यह क्षेत्र निकटवर्ती भी है और रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण भी।
उन्होंने Gaza Strip, Sudan, Yemen, Syria और Libya की परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन संघर्षों ने अस्थिरता को बढ़ाया है। ऐसे समय में भारत और अरब देशों का साझा हित शांति, स्थिरता और समृद्धि को मजबूत करना है।
आतंकवाद पर ‘जीरो टॉलरेंस’ का संदेश
जयशंकर ने स्पष्ट किया कि सीमा पार से संचालित आतंकवाद केवल सुरक्षा का मुद्दा नहीं, बल्कि कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय कानून की बुनियाद को चुनौती देता है। उन्होंने कहा कि इस पर कोई समझौता नहीं हो सकता और वैश्विक स्तर पर इसके लिए एक समान मानदंड लागू होना चाहिए।
उन्होंने यह भी जोड़ा कि आतंकवाद से प्रभावित देशों और समाजों को आत्मरक्षा का अधिकार है—और वे उसका उपयोग करेंगे। कूटनीतिक हलकों में इसे पाकिस्तान की ओर संकेत के रूप में देखा जा रहा है, हालांकि उन्होंने किसी देश का नाम नहीं लिया।
वैश्विक सहयोग पर जोर
बैठक में भारत ने आतंकवाद से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग को और मजबूत करने की जरूरत पर बल दिया। संदेश यह था कि यह समस्या सीमाओं से परे है, इसलिए समाधान भी साझा और समन्वित होना चाहिए।
जयशंकर ने कहा कि दुनिया में आतंकवाद के प्रति एक जैसा नियम लागू होना चाहिए—कहीं नरमी और कहीं सख्ती की नीति अंततः समस्या को ही बढ़ाती है।
निष्कर्ष: साझा सुरक्षा, साझा जिम्मेदारी
India-Arab Foreign Ministers Meeting में भारत का रुख केवल बयान तक सीमित नहीं था, बल्कि एक व्यापक कूटनीतिक सोच का हिस्सा दिखा—जहाँ पश्चिम एशिया की स्थिरता, आतंकवाद के खिलाफ साझा रुख, और नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था (rules-based order) को साथ रखा गया।
यह संदेश भी स्पष्ट रहा कि भारत अपने साझेदार देशों के साथ मिलकर शांति और सुरक्षा के एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।











