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यूपी में जल जीवन मिशन को ₹22,452 करोड़, सिंचाई-बाढ़ नियंत्रण पर बड़ा दांव

On: February 12, 2026
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यूपी में जल जीवन मिशन को ₹22,452 करोड़
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लखनऊ, 12 फरवरी 2026। उत्तर प्रदेश के बजट 2026-27 में पानी—पीने का भी, और खेतों तक पहुँचने वाला भी—केंद्र में है। सरकार ने जल जीवन मिशन के लिए ₹22,452 करोड़ का प्रावधान कर साफ संकेत दिया है कि ग्रामीण घरों तक नल कनेक्शन और सुरक्षित पेयजल (Safe Drinking Water – सुरक्षित पेयजल) उपलब्ध कराना प्राथमिकता में है। इसके साथ ही सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण योजनाओं के लिए ₹18,290 करोड़ प्रस्तावित किए गए हैं। नमामि गंगे एवं ग्रामीण जलापूर्ति पर कुल ₹22,676 करोड़ की व्यवस्था की गई है।

वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बजट भाषण में कहा कि 2026-27 में सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण मद में 2025-26 की तुलना में 30% अधिक राशि रखी गई है—इसे कृषि उत्पादकता (Agricultural Productivity – कृषि उत्पादकता) बढ़ाने और पर्यावरण संरक्षण (Environmental Protection – पर्यावरण संरक्षण) मजबूत करने की दिशा में निर्णायक कदम बताया गया।

जल जीवन मिशन: लक्ष्य, प्रगति और शेष दूरी

राज्य में जल जीवन मिशन का लक्ष्य 2.67 करोड़ ग्रामीण परिवारों को क्रियाशील गृह नल संयोजन (Functional Household Tap Connection – क्रियाशील नल कनेक्शन) देना है। अब तक 2.43 करोड़ घरों तक कनेक्शन पहुँच चुका है। शेष घरों को कवर करने के लिए 2026-27 में आवंटित ₹22,452 करोड़ से पाइपलाइन विस्तार, जलाशय निर्माण, गुणवत्ता परीक्षण और संचालन-रखरखाव (O&M – संचालन एवं रखरखाव) पर फोकस रहेगा।

सरकार का तर्क है कि नियमित और शुद्ध जलापूर्ति से जलजनित रोगों में कमी आएगी, महिलाओं का श्रम-बोझ घटेगा और बच्चों की पढ़ाई पर सकारात्मक असर पड़ेगा। हालांकि, कुछ क्षेत्रों में क्रियाशीलता, जल गुणवत्ता और स्रोत स्थिरता (Source Sustainability – स्रोत की स्थिरता) पर सवाल भी उठते रहे हैं—बजट में “सभी घटकों” के लिए अलग प्रावधान कर इन्हें संबोधित करने का दावा किया गया है।

नमामि गंगे: सीवरेज परियोजनाओं पर जोर

Namami Gange के तहत गंगा को प्रदूषणमुक्त (Pollution-free – प्रदूषण मुक्त) बनाने के लिए 74 सीवरेज परियोजनाएँ स्वीकृत हैं। इनमें से 41 पूर्ण होकर संचालित हैं, जबकि शेष निर्माणाधीन हैं। ₹22,676 करोड़ के प्रावधान से शहरी-ग्रामीण सीवरेज नेटवर्क, एसटीपी क्षमता और घाटों की सफाई को गति देने का लक्ष्य है।

सिंचाई क्षमता का विस्तार और परियोजनाओं की रफ्तार

मध्यगंगा स्टेज-2, कनहर सिंचाई, केन-बेतवा लिंक और भौरट बांध जैसी परियोजनाएँ प्रगति पर हैं। इनके पूर्ण होने पर 4.49 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में नई सिंचाई क्षमता सृजित होने का अनुमान है।

2025-26 में 2,100 नए राजकीय नलकूप बने और डार्क जोन में 569 असफल नलकूपों का पुनर्निर्माण हुआ—जिससे 1.62 लाख हेक्टेयर सिंचन क्षमता की पुनर्स्थापना बताई गई। बाढ़ प्रबंधन में 285 परियोजनाएँ पूरी हुईं, 49.09 लाख आबादी लाभांवित हुई और 11,065 किमी ड्रेनों की सफाई कराई गई।

नीतिगत संकेत और चुनौतियाँ

बजट का संदेश स्पष्ट है—पानी को विकास की धुरी बनाना। पर असली कसौटी क्रियान्वयन (Implementation – कार्यान्वयन) होगी:

  • दूरस्थ इलाकों में स्रोत स्थिरता
  • जल गुणवत्ता की नियमित जांच
  • परियोजनाओं की समयबद्धता
  • बाढ़ नियंत्रण ढांचे का रखरखाव

यदि आवंटन जमीन पर उतरा, तो जल जीवन मिशन और सिंचाई निवेश राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था और ग्रामीण जीवन-स्तर में ठोस बदलाव ला सकते हैं। चुनावी वर्ष में यह दांव कितना असर दिखाता है, इसकी निगाहें अब क्रियान्वयन पर टिकी हैं।

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