नई दिल्ली (05 मार्च 2026)। देश की अगली जनगणना को पूरी तरह तकनीकी और डिजिटल स्वरूप देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को जनगणना 2027 के लिए चार महत्वपूर्ण डिजिटल टूल्स का सॉफ्ट लॉन्च किया और आधिकारिक शुभंकर ‘प्रगति’ (महिला) और ‘विकास’ (पुरुष) का अनावरण किया।
नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में यह बताया गया कि आगामी जनगणना पारंपरिक कागजी प्रक्रिया से अलग होगी और इसमें आधुनिक डिजिटल प्लेटफॉर्म, मोबाइल एप्लिकेशन और उपग्रह चित्रों जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा। सरकार का लक्ष्य है कि इस प्रक्रिया के जरिए देशभर में डेटा संग्रहण अधिक सटीक, सुरक्षित और पारदर्शी बनाया जा सके।
जनगणना 2027 में पहली बार पूरी प्रक्रिया होगी डिजिटल
सरकार के अनुसार जनगणना 2027 दुनिया की सबसे बड़ी जनगणना प्रक्रिया होगी, जिसमें करीब 30 लाख से अधिक प्रगणक, पर्यवेक्षक और अन्य अधिकारी भाग लेंगे।
इस बार पहली बार जनगणना का बड़ा हिस्सा डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से संचालित होगा। इतना ही नहीं, नागरिकों को पहली बार स्व-गणना (Self Enumeration) का विकल्प भी दिया जाएगा, जिससे वे घर बैठे अपनी जानकारी ऑनलाइन दर्ज कर सकेंगे।
जनगणना के लिए तकनीकी प्लेटफॉर्म सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग (C-DAC) द्वारा विकसित किए गए हैं।
जनगणना 2027 के लिए लॉन्च किए गए चार प्रमुख डिजिटल टूल
डिजिटल जनगणना को सुचारू और प्रभावी बनाने के लिए चार महत्वपूर्ण प्लेटफॉर्म तैयार किए गए हैं।
1. हाउस लिस्टिंग ब्लॉक क्रिएटर वेब एप्लिकेशन
यह एक वेब-मैप आधारित एप्लिकेशन है जो अधिकारियों को उपग्रह चित्रों की सहायता से मकान सूचीकरण ब्लॉक तैयार करने में मदद करेगा। इससे पूरे देश में भौगोलिक कवरेज का मानकीकरण सुनिश्चित किया जा सकेगा।
2. एचएलओ मोबाइल एप्लिकेशन
यह एक सुरक्षित ऑफलाइन मोबाइल ऐप है जिसके माध्यम से प्रगणक मकान सूचीकरण से संबंधित डेटा एकत्र कर सीधे सर्वर पर अपलोड कर सकेंगे।
- केवल पंजीकृत प्रगणक ही इसका उपयोग कर पाएंगे
- ऐप एंड्रॉयड और iOS दोनों प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होगा
- इसे 16 भाषाओं में संचालित किया जा सकेगा
इस तकनीक के इस्तेमाल से कागजी कार्यवाही लगभग समाप्त हो जाएगी।
3. स्व-गणना पोर्टल
पहली बार नागरिकों को अपनी जानकारी खुद दर्ज करने का विकल्प दिया जाएगा।
- सफल पंजीकरण के बाद नागरिकों को एक स्व-गणना आईडी मिलेगी
- यह आईडी प्रगणक को दी जाएगी
- प्रगणक उस जानकारी की पुष्टि करेगा
इससे जनगणना प्रक्रिया अधिक तेज और पारदर्शी बनने की उम्मीद है।
4. जनगणना प्रबंधन एवं निगरानी प्रणाली पोर्टल
यह एक केंद्रीकृत डिजिटल डैशबोर्ड होगा जिसके जरिए राज्य, जिला और तहसील स्तर के अधिकारी जनगणना से जुड़ी गतिविधियों की निगरानी कर सकेंगे। इसमें वास्तविक समय में प्रगति और कार्य स्थिति देखी जा सकेगी।
शुभंकर ‘प्रगति’ और ‘विकास’ से दिया जाएगा जनभागीदारी का संदेश
सरकार ने जनगणना 2027 के लिए दो प्रतीकात्मक शुभंकर भी जारी किए हैं —
- प्रगति (महिला प्रगणक)
- विकास (पुरुष प्रगणक)
इन शुभंकरों को एक मैत्रीपूर्ण और सहज प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया गया है ताकि जनगणना से जुड़े संदेश समाज के हर वर्ग तक आसानी से पहुंच सकें।
सरकार के अनुसार ये दोनों प्रतीक भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य में महिलाओं और पुरुषों की समान भागीदारी का संदेश भी देते हैं।
दो चरणों में पूरी होगी जनगणना प्रक्रिया
जनगणना 2027 दो चरणों में संपन्न होगी।
पहला चरण: गृह-सूचीकरण और आवास जनगणना
इसमें घरों की स्थिति, आवास सुविधाओं और बुनियादी ढांचे से संबंधित जानकारी जुटाई जाएगी।
दूसरा चरण: जनसंख्या से जुड़ा विस्तृत डेटा
इस चरण में प्रत्येक व्यक्ति के
- जनसांख्यिकीय
- सामाजिक
- आर्थिक विवरण
संग्रहित किए जाएंगे।
पहले चरण के लिए 7 जनवरी 2026 को अधिसूचना जारी की जा चुकी है।
मकान सूचीकरण और मकान गणना 1 अप्रैल 2026 से 30 सितंबर 2026 के बीच राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा अधिसूचित 30 दिनों की अवधि में की जाएगी।
घर-घर सर्वेक्षण से पहले 15 दिनों की वैकल्पिक स्व-गणना अवधि भी उपलब्ध होगी।
तकनीक से सटीक और व्यापक डेटा का लक्ष्य
सरकार का मानना है कि आधुनिक तकनीक, डिजिटल एप्लिकेशन और उपग्रह चित्रों के इस्तेमाल से जनगणना 2027 पहले की तुलना में अधिक सटीक और व्यापक होगी।
डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए न केवल डेटा संग्रहण तेज होगा बल्कि निगरानी और विश्लेषण भी वास्तविक समय में संभव हो सकेगा।













