लखनऊ, 24 फरवरी 2026 (मंगलवार)। उत्तर प्रदेश के एविएशन सेक्टर के लिए 24 फरवरी 2026 की तारीख एक अहम पड़ाव के रूप में दर्ज हो गई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सिंगापुर दौरे के दूसरे दिन, राज्य सरकार और एआई सैट्स (AISATS) के बीच ₹4,458 करोड़ के निवेश को लेकर समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर हुए। यह निवेश गौतमबुद्ध नगर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट — जिसे आम बोलचाल में जेवर एयरपोर्ट कहा जाता है — को उत्तर भारत के सबसे बड़े कार्गो और एविएशन सर्विस हब में बदलने की दिशा में निर्णायक कदम माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस समझौते को “उत्तर प्रदेश की नई आर्थिक उड़ान” बताया। सिंगापुर में हुए इस निवेश करार को राज्य सरकार की ग्लोबल आउटरीच नीति की बड़ी सफलता के तौर पर देखा जा रहा है।
जेवर एयरपोर्ट बनेगा उत्तर भारत का कार्गो पावरहाउस
इस ₹4,458 करोड़ के निवेश का बड़ा हिस्सा जेवर एयरपोर्ट परिसर में एक अत्याधुनिक कार्गो कैंपस के निर्माण पर खर्च किया जाएगा। यह सिर्फ एक वेयरहाउस प्रोजेक्ट नहीं होगा, बल्कि एयर फ्रेट, लॉजिस्टिक्स, कोल्ड-चेन और हाई-वैल्यू कार्गो हैंडलिंग का एकीकृत केंद्र होगा।
रणनीतिक दृष्टि से देखें तो जेवर एयरपोर्ट दिल्ली-एनसीआर, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तर भारत के औद्योगिक कॉरिडोर के मध्य स्थित है। एक्सप्रेसवे नेटवर्क और प्रस्तावित मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी इसे निर्यात-आयात के लिए स्वाभाविक विकल्प बनाती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मास्युटिकल्स, कृषि उत्पाद और ई-कॉमर्स लॉजिस्टिक्स को इस परियोजना से सीधा लाभ मिलेगा। तेज कस्टम क्लियरेंस, तापमान-नियंत्रित स्टोरेज और डिजिटल ट्रैकिंग जैसी सुविधाएं इसे अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाएंगी।
“जब लॉजिस्टिक्स सुधरता है तो व्यापार अपने आप गति पकड़ता है” — यह कहावत यहां सटीक बैठती है। जेवर एयरपोर्ट का यह कार्गो कैंपस उत्तर भारत के निर्यात ढांचे को नया आकार दे सकता है।
एयर कैटरिंग किचन से बनेगा फूड सप्लाई नेटवर्क
MoU के दूसरे चरण में जेवर एयरपोर्ट पर एक विश्वस्तरीय एयर कैटरिंग किचन स्थापित किया जाएगा। यह केवल स्थानीय उड़ानों के लिए नहीं, बल्कि पूरे उत्तर भारत के विभिन्न हवाई अड्डों को भोजन आपूर्ति करने वाला केंद्रीय हब होगा।
इस अत्याधुनिक किचन में बड़े पैमाने पर भोजन उत्पादन, गुणवत्ता नियंत्रण और अंतरराष्ट्रीय हाइजीन मानकों का पालन सुनिश्चित किया जाएगा। एविएशन इंडस्ट्री में कैटरिंग का महत्व अक्सर सुर्खियों से दूर रहता है, लेकिन यही वह क्षेत्र है जो हजारों लोगों को रोजगार देता है और स्थानीय फूड प्रोसेसिंग उद्योग को मजबूत करता है।
राज्य सरकार के अधिकारियों के अनुसार, इस परियोजना से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हजारों रोजगार के अवसर सृजित होंगे। सप्लाई चेन, पैकेजिंग, ट्रांसपोर्टेशन और लोकल फूड प्रोसेसिंग इकाइयों को भी इससे नई ऊर्जा मिलेगी।
आर्थिक परिदृश्य में बड़ा बदलाव
जेवर एयरपोर्ट को पहले ही उत्तर भारत की सबसे महत्वाकांक्षी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में गिना जाता है। अब ₹4,458 करोड़ का यह निवेश इसे केवल एक एयरपोर्ट नहीं, बल्कि एक संपूर्ण एविएशन इकोसिस्टम में बदलने की दिशा में ले जाएगा।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सिंगापुर दौरे के दौरान हुए इस समझौते को राज्य के औद्योगिक विकास के व्यापक विजन से जोड़कर देखा जा रहा है। सरकार का लक्ष्य उत्तर प्रदेश को लॉजिस्टिक्स, सर्विस सेक्टर और ग्लोबल ट्रेड का प्रमुख केंद्र बनाना है।
राजनीतिक दृष्टि से भी यह कदम महत्वपूर्ण है। ऐसे समय में जब राज्यों के बीच निवेश आकर्षित करने की प्रतिस्पर्धा तेज है, उत्तर प्रदेश का यह करार निवेशकों को एक स्पष्ट संदेश देता है— इंफ्रास्ट्रक्चर, नीति और राजनीतिक इच्छाशक्ति, तीनों अब एक दिशा में काम कर रहे हैं।
क्यों महत्वपूर्ण है यह निवेश?
- ₹4,458 करोड़ का प्रत्यक्ष निवेश
- जेवर एयरपोर्ट पर आधुनिक कार्गो कैंपस की स्थापना
- उत्तर भारत के लिए केंद्रीकृत एयर कैटरिंग नेटवर्क
- हजारों रोजगार के अवसर
- निर्यात-आयात को गति और औद्योगिक विकास को मजबूती
विशेषज्ञ इसे उत्तर प्रदेश के लिए “गेम-चेंजर” करार दे रहे हैं। आने वाले वर्षों में जब जेवर एयरपोर्ट पूरी क्षमता से संचालित होगा, तब यह निवेश राज्य को वैश्विक आर्थिक मानचित्र पर अधिक मजबूती से स्थापित कर सकता है।
कुल मिलाकर, जेवर एयरपोर्ट अब सिर्फ एक हवाई अड्डा नहीं रह गया है — यह उत्तर भारत की आर्थिक महत्वाकांक्षाओं का प्रतीक बनता जा रहा है। और अगर योजनाएं तय समय पर जमीन पर उतरती हैं, तो यह कहना गलत नहीं होगा कि आने वाला दशक उत्तर प्रदेश के एविएशन सेक्टर के नाम हो सकता है।








