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250 पहियों वाले विशाल ट्रक से पहुंचा 200 टन का वेसल, भारत के पहले बायोप्लास्टिक प्लांट की तैयारी तेज

On: October 21, 2026
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250 पहियों वाले विशाल ट्रक से पहुंचा 200 टन का वेसल
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लखीमपुर खीरी/21 अक्टूबर 2026: उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में बन रहे भारत के पहले बायोप्लास्टिक प्लांट के लिए बेल्जियम से मंगाया गया करीब 200 टन वजनी विशाल वेसल जिले में पहुंच गया है। इस भारी-भरकम मशीन को विशेष मल्टी-एक्सल ट्रेलर के जरिए लाया जा रहा है, जिसके पहियों की संख्या को लेकर भी लोगों में खासा कौतूहल है। मंगलवार रात जिले में प्रवेश करने के बाद बुधवार को यह विशाल वाहन पीलीभीत-बस्ती हाईवे से आगे बढ़ता हुआ फरधान थाना क्षेत्र के रुकुंदीपुर तक पहुंचा। अब इसके गुरुवार को कुंभी स्थित चीनी मिल परिसर पहुंचने की उम्मीद है।

लखीमपुर खीरी में 250 पहियों वाले ट्रक की चर्चा, देखने उमड़े लोग

बेल्जियम से भारत पहुंची इस विशाल मशीन को देखने के लिए स्थानीय लोगों में काफी उत्सुकता है। मंगलवार रात जैसे ही ट्रक ने लखीमपुर खीरी जिले में प्रवेश किया, हाईवे के आसपास लोगों की भीड़ जुटने लगी। कई लोग इस असाधारण वाहन की तस्वीरें खींचते और वीडियो बनाते नजर आए।

यह ट्रेलर करीब 200 टन वजन वाले वेसल को लेकर चल रहा है। मशीन और ट्रेलर की संयुक्त ऊंचाई लगभग 25 से 30 फीट बताई गई है। भारी वजन और बड़े आकार के कारण इसके परिवहन में विशेष सावधानी बरती जा रही है।

इस विशाल वाहन को सोशल मीडिया पर पहले 308 पहियों वाले ट्रक के रूप में भी चर्चा मिली थी। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार मौजूदा परिवहन व्यवस्था में करीब 250 पहियों वाला विशेष ट्रेलर इस्तेमाल किया जा रहा है।

3,080 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा बायोप्लास्टिक प्लांट

कुंभी चीनी मिल के पास लगभग 3,080 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से बायोप्लास्टिक प्लांट का निर्माण किया जा रहा है। इसके लिए करीब 150 एकड़ क्षेत्र निर्धारित होने की जानकारी दी गई है। परियोजना को लेकर स्थानीय स्तर पर काफी उत्साह है, क्योंकि इससे औद्योगिक गतिविधियों और क्षेत्र के आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

प्लांट में इस्तेमाल होने वाली विशाल मशीनरी का हिस्सा बेल्जियम में तैयार किया गया है। करीब 200 टन वजनी यह वेसल परियोजना के लिए महत्वपूर्ण उपकरणों में शामिल है। इसके पहुंचने के बाद इसे निर्धारित स्थान पर स्थापित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

बायोप्लास्टिक का इस्तेमाल पारंपरिक प्लास्टिक के विकल्प के रूप में किया जा सकता है। हालांकि, किसी उत्पाद का पर्यावरणीय लाभ इस बात पर निर्भर करता है कि उसका कच्चा माल क्या है, उसका उत्पादन कैसे होता है और उपयोग के बाद उसका निपटान किस तरह किया जाता है।

बिजली की लाइनें और सड़क संकेतक हटाने के लिए 40 सदस्यीय टीम तैनात

विशाल वेसल को सुरक्षित तरीके से प्लांट तक पहुंचाना आसान काम नहीं है। करीब 100 मीटर लंबे ट्रेलर को सड़क पर आगे बढ़ाने के दौरान बिजली की लाइनों, सड़क संकेतकों और अन्य बाधाओं का विशेष ध्यान रखा जा रहा है।

इसके लिए लगभग 40 सदस्यों की तकनीकी टीम साथ चल रही है। टीम का काम रास्ते में आने वाली बाधाओं की पहचान करना और आवश्यक समन्वय के जरिए वाहन को सुरक्षित निकालना है। बिजली लाइनों से जुड़े काम संबंधित विभागों की निगरानी और सुरक्षा प्रक्रियाओं के अनुसार किए जाने जरूरी हैं।

वाहन के बड़े आकार के कारण सामान्य यातायात की तुलना में इसके संचालन के लिए अधिक जगह और सावधानी की जरूरत पड़ रही है।

हाईवे पर पुलिस अलर्ट, यातायात सुचारू रखने की कोशिश

विशाल ट्रेलर को सुरक्षित निकालने के लिए लखीमपुर खीरी में पुलिस और यातायात कर्मियों को सतर्क रखा गया। सदर कोतवाली पुलिस के साथ रामापुर और राजापुर चौकी की पुलिस भी व्यवस्था संभालने में जुटी रही।

सदर कोतवाल राजेश कुमार सिंह ने पीलीभीत-बस्ती हाईवे पर पहुंचकर यातायात व्यवस्था का जायजा लिया और वाहन के गुजरने के लिए सड़क पर आवश्यक जगह सुनिश्चित कराई। पुलिसकर्मी अलग-अलग स्थानों पर तैनात रहे, ताकि ट्रेलर की आवाजाही के दौरान जाम और अन्य परेशानियों को कम किया जा सके।

इतने बड़े वाहन को सड़क मार्ग से ले जाने के लिए यातायात नियंत्रण और तकनीकी टीमों के बीच तालमेल बेहद जरूरी है।

पारादीप बंदरगाह से सड़क मार्ग के जरिए पहुंचा वेसल

ट्रक चालक रत्नागिरि के अनुसार, मशीन को समुद्री मार्ग से ओडिशा के पारादीप बंदरगाह तक लाया गया था। इसके बाद इसे विशेष ट्रेलर पर लादकर सड़क मार्ग से उत्तर प्रदेश के लिए रवाना किया गया।

बताई गई यात्रा के दौरान वाहन झारखंड और बिहार से होते हुए उत्तर प्रदेश पहुंचा। इसके बाद चंदौली, वाराणसी, बलरामपुर और श्रावस्ती के रास्ते लखीमपुर खीरी तक पहुंचने का मार्ग तय किया गया।

लंबी दूरी और भारी वजन के कारण इस परिवहन में सावधानीपूर्वक योजना, रास्ते की निगरानी और तकनीकी सहायता की जरूरत पड़ी।

गुरुवार को कुंभी चीनी मिल पहुंचने की उम्मीद

कुंभी चीनी मिल के मुख्य महाप्रबंधक सुनील कुमार यादव के अनुसार, मशीन के गुरुवार को परिसर में पहुंचने की उम्मीद है। इसके बाद इसे प्लांट में स्थापित कराने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी, ताकि परियोजना का काम आगे बढ़ सके।

वेसल की सुरक्षित डिलीवरी निर्माणाधीन प्लांट के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। हालांकि, मशीन की स्थापना, अन्य उपकरणों की उपलब्धता और परीक्षण जैसी प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद ही परियोजना के संचालन की स्थिति स्पष्ट होगी।

लखीमपुर खीरी में बेल्जियम से आई इस विशाल मशीन ने लोगों का ध्यान खींचा है। अब सबकी नजर इसके कुंभी चीनी मिल परिसर पहुंचने और प्लांट में स्थापना की अगली प्रक्रिया पर है।

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