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लोकसभा में विपक्ष का हंगामा: पीएम के जवाब बिना पारित हुआ धन्यवाद प्रस्ताव

On: February 5, 2026
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लोकसभा में विपक्ष का हंगामा
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नई दिल्ली, 5 फरवरी 2026। संसद के निचले सदन में गुरुवार को ऐसा दृश्य बना, जिसे संसदीय परंपराओं की कसौटी पर असाधारण माना जा रहा है। लोकसभा में विपक्ष का हंगामा इस कदर बढ़ा कि राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव प्रधानमंत्री के समापन जवाब के बिना ही ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। सदन में शोर, नारेबाजी और वेल में प्रदर्शन के बीच कार्यवाही बार-बार बाधित होती रही और अंततः प्रस्ताव औपचारिकता के साथ निपटा दिया गया।

हंगामे के साये में पारित हुआ धन्यवाद प्रस्ताव

संसदीय परंपरा रही है कि धन्यवाद प्रस्ताव पर अंतिम जवाब प्रधानमंत्री देते हैं। लेकिन इस बार परिस्थितियाँ अलग रहीं। लगातार व्यवधान के कारण अध्यक्ष को कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी और जब सदन फिर चला तो ध्वनिमत से प्रस्ताव पारित कर दिया गया। यह घटनाक्रम इसलिए भी उल्लेखनीय है क्योंकि परंपरा का यह क्रम टूट गया।

अध्यक्ष ओम बिरला को करनी पड़ी बार-बार अपील

हंगामे के बीच ओम बिरला ने कई बार सदस्यों से अपनी-अपनी सीटों पर लौटने और चर्चा चलने देने की अपील की। लेकिन विपक्षी सदस्य वेल में आकर नारे लगाते रहे। कार्यवाही के दौरान सदन का शोर इतना अधिक था कि औपचारिक कार्य भी मुश्किल से हो पा रहे थे। अंततः व्यवस्था बनाए रखने के लिए कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।

पीएम की अनुपस्थिति पर चर्चा

सदन में इस दौरान नरेन्द्र मोदी उपस्थित नहीं थे। सूत्रों के अनुसार, विपक्षी सदस्यों के उग्र तेवर और संभावित अव्यवस्था को देखते हुए सुरक्षा दृष्टि से उन्हें सदन में न आने की सलाह दी गई थी। यही कारण रहा कि धन्यवाद प्रस्ताव पर परंपरागत समापन भाषण नहीं हो सका।

संसदीय परंपरा से अलग दिन

लोकसभा के इतिहास में ऐसे अवसर विरले रहे हैं जब धन्यवाद प्रस्ताव बिना प्रधानमंत्री के जवाब के पारित हुआ हो। संसदीय कार्यवाही के जानकार इसे असामान्य दिन मान रहे हैं, जहाँ प्रक्रिया पूरी तो हुई, लेकिन बहस का सार अधूरा रह गया।

राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि सरकार की नीतियों पर व्यापक चर्चा का मंच होता है। ऐसे में लगातार व्यवधान ने उस विमर्श को सीमित कर दिया, जिसकी अपेक्षा की जाती है।

विपक्ष का रुख और सदन का माहौल

विपक्षी दलों के सदस्य विभिन्न मुद्दों पर विरोध दर्ज कराने के लिए वेल में उतरे और नारेबाजी की। इस कारण सदन का वातावरण बार-बार गरमाता रहा। सत्ता पक्ष ने इसे संसदीय परंपरा के विपरीत बताया, जबकि विपक्ष ने इसे लोकतांत्रिक विरोध का तरीका कहा।

दिन भर के घटनाक्रम ने यह संकेत दिया कि राजनीतिक तापमान अभी उच्च स्तर पर है और आने वाले दिनों में सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से चलाना चुनौतीपूर्ण रह सकता है।

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