लखनऊ, बुधवार, 28 जनवरी 2026। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में बुधवार को एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक और औद्योगिक संवाद देखने को मिला, जब जापान के यामानाशी प्रान्त के उप-राज्यपाल जुनिची इशिडोरा के नेतृत्व में आठ सदस्यीय उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से शिष्टाचार भेंट की। यह मुलाकात औपचारिकता से आगे बढ़कर भविष्य की तकनीकी, औद्योगिक और पर्यावरणीय साझेदारी की ठोस दिशा तय करने वाली साबित हुई।
बैठक सौहार्दपूर्ण माहौल में हुई, लेकिन चर्चा के विषय अत्यंत दूरदर्शी और रणनीतिक थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत और जापान के बीच मजबूत हो रही रणनीतिक साझेदारी का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि दोनों देशों के संबंध केवल कूटनीतिक संवाद तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे साझा मूल्यों—विश्वास, अनुशासन, तकनीकी दक्षता, नवाचार और सतत विकास—पर आधारित हैं। उत्तर प्रदेश इन मूल्यों को धरातल पर उतारने के लिए प्रतिबद्ध है।
बैठक का केंद्रीय फोकस वर्ष 2024 में उत्तर प्रदेश सरकार और यामानाशी प्रान्त के बीच हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन (MoU) के प्रभावी क्रियान्वयन पर रहा। यह एमओयू विशेष रूप से ग्रीन हाइड्रोजन, स्वच्छ ऊर्जा, नवाचार, कौशल विकास और सतत औद्योगिक विकास के क्षेत्रों में सहयोग का ढांचा तैयार करता है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रतिनिधिमंडल को अवगत कराया कि उत्तर प्रदेश ने ग्रीन हाइड्रोजन को भविष्य की ऊर्जा अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण स्तंभ मानते हुए इस दिशा में कई संस्थागत कदम उठाए हैं। प्रदेश में अनुसंधान, नवाचार और कौशल विकास को बढ़ावा देने के लिए उत्कृष्टता केंद्र (Centers of Excellence) स्थापित किए गए हैं। साथ ही, उत्तर प्रदेश ग्रीन हाइड्रोजन नीति-2024 के माध्यम से निवेशकों को स्पष्ट, पारदर्शी और प्रोत्साहनयुक्त वातावरण उपलब्ध कराया गया है। इस नीति के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विकास अभिकरण (UPNEDA) को सौंपी गई है।
बैठक के दौरान यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) क्षेत्र में शुरू की गई ग्रीन हाइड्रोजन पायलट परियोजना के वाणिज्यिक संचालन को एक उल्लेखनीय उपलब्धि के रूप में रेखांकित किया गया। यह परियोजना न केवल तकनीकी दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह संकेत भी देती है कि उत्तर प्रदेश स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में प्रयोग से आगे बढ़कर व्यावसायिक मॉडल की ओर अग्रसर है।
जापानी प्रतिनिधिमंडल ने प्रदेश में स्वच्छ ऊर्जा और ग्रीन हाइड्रोजन के क्षेत्र में हो रहे प्रयासों की सराहना की और भविष्य में तकनीकी सहयोग, निवेश और ज्ञान-साझेदारी को और विस्तार देने की इच्छा व्यक्त की। यामानाशी प्रान्त, जो जापान में नवाचार और पर्यावरणीय तकनीकों के लिए जाना जाता है, उत्तर प्रदेश के साथ इस सहयोग को दीर्घकालिक साझेदारी के रूप में देख रहा है।
ऊर्जा और उद्योग से इतर, बैठक में दोनों देशों के गहरे सभ्यतागत और सांस्कृतिक संबंधों पर भी चर्चा हुई। विशेष रूप से बौद्ध विरासत और बौद्ध पर्यटन सर्किट के माध्यम से जन-से-जन संपर्क को मजबूत करने की संभावनाओं पर विचार किया गया। यह पहल सांस्कृतिक कूटनीति को भी औद्योगिक और तकनीकी साझेदारी के साथ जोड़ती है।
मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि उत्तर प्रदेश और यामानाशी प्रान्त के बीच यह सहयोग आने वाले वर्षों में और सशक्त होगा। ग्रीन एनर्जी, औद्योगिक विकास, नवाचार, कौशल निर्माण और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के क्षेत्रों में यह साझेदारी न केवल राज्य बल्कि भारत-जापान संबंधों को भी नई दिशा देगी।








