लखनऊ/02 अगस्त 2026। उच्च शिक्षा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते महत्व को देखते हुए लखनऊ यूनिवर्सिटी ने एक अहम पहल की है। विश्वविद्यालय अब अपने शिक्षकों के साथ-साथ संबद्ध कॉलेजों के शिक्षकों को भी एआई तकनीक में दक्ष बनाने के लिए ‘उच्च शिक्षा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता केंद्र’ (AI Center for Higher Education) की स्थापना करेगा। यह केंद्र कंप्यूटर विज्ञान विभाग के अंतर्गत संचालित होगा और शिक्षण, शोध तथा शैक्षणिक प्रशासन में एआई के प्रभावी उपयोग को बढ़ावा देगा।
विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि भविष्य की शिक्षा व्यवस्था में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की भूमिका लगातार बढ़ रही है। ऐसे में शिक्षकों को आधुनिक तकनीकों से लैस करना समय की आवश्यकता है, ताकि वे छात्रों को भी डिजिटल युग की नई चुनौतियों और अवसरों के लिए तैयार कर सकें।
AI आधारित ऑनलाइन कोर्स और प्रशिक्षण कार्यक्रम होंगे शुरू
लखनऊ यूनिवर्सिटी AI सेंटर केवल प्रशिक्षण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि समर्थ लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम (LMS) पर एआई-सक्षम ऑनलाइन पाठ्यक्रम भी विकसित करेगा। इसके माध्यम से विभिन्न विषयों के शिक्षकों को तकनीकी रूप से अपडेट रहने का अवसर मिलेगा।
यह पहल विज्ञान, वाणिज्य, प्रबंधन, कला, मानविकी, सामाजिक विज्ञान, विधि, शिक्षा, इंजीनियरिंग, फार्मेसी, पत्रकारिता, ललित कला और अन्य व्यावसायिक पाठ्यक्रमों से जुड़े शिक्षकों के लिए उपयोगी होगी।
शिक्षकों के लिए आयोजित होंगे कई विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम
विश्वविद्यालय द्वारा तैयार किए गए प्रशिक्षण मॉड्यूल में अलग-अलग स्तर के कार्यक्रम शामिल किए जाएंगे। इनमें प्रमुख रूप से—
- एक सप्ताह का संकाय विकास कार्यक्रम (Faculty Development Programme)
- पांच दिवसीय शॉर्ट टर्म कोर्स
- एक से दो दिन की व्यावहारिक कार्यशालाएं और AI बूट कैंप
- मास्टर ट्रेनर एवं एडवांस सर्टिफिकेशन प्रोग्राम
- उभरती प्रौद्योगिकियों और आधुनिक AI टूल्स पर व्यावहारिक प्रशिक्षण
इन कार्यक्रमों का उद्देश्य शिक्षकों को केवल सैद्धांतिक जानकारी देना नहीं, बल्कि उन्हें वास्तविक शैक्षणिक और शोध कार्यों में एआई का प्रभावी उपयोग करना सिखाना है।
मशीन लर्निंग से लेकर जनरेटिव AI तक मिलेगा व्यावहारिक अनुभव
प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों को मशीन लर्निंग, जनरेटिव AI, AI इंजीनियरिंग, डिजिटल कंटेंट क्रिएशन और AI-असिस्टेड रिसर्च जैसे आधुनिक विषयों पर अनुभवात्मक प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे शिक्षक अपने विषयों में नई तकनीकों का उपयोग कर शिक्षण की गुणवत्ता बढ़ा सकेंगे और अनुसंधान को अधिक प्रभावी बना पाएंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में एआई आधारित शिक्षण पद्धतियां उच्च शिक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा बनने जा रही हैं। ऐसे में यह पहल शिक्षकों और विद्यार्थियों दोनों के लिए लाभदायक साबित हो सकती है।
कुलपति बोले— डिजिटल भविष्य के लिए शिक्षकों को तैयार करना जरूरी
लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जेपी सैनी ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता ज्ञान और व्यावसायिक अभ्यास के लगभग हर क्षेत्र में तेजी से बदलाव ला रही है। इसलिए यह आवश्यक है कि शिक्षकों को नवीनतम एआई दक्षताओं से सुसज्जित किया जाए, ताकि वे शिक्षण को अधिक प्रभावी बना सकें, गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान को बढ़ावा दें और छात्रों को भविष्य की डिजिटल दुनिया के लिए तैयार कर सकें।
उन्होंने बताया कि इस पहल के तहत नियमित प्रशिक्षण कैलेंडर जल्द ही विश्वविद्यालय के सभी विभागों और संबद्ध कॉलेजों को उपलब्ध कराया जाएगा।








