प्रयागराज, 15 फरवरी 2026 (रविवार): महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर महाशिवरात्रि संगम स्नान के लिए श्रद्धालुओं का अभूतपूर्व जनसैलाब प्रयागराज पहुंचा। गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के पवित्र त्रिवेणी संगम पर रविवार सुबह से ही आस्था की डुबकी लगाने वालों की लंबी कतारें देखी गईं। ब्रह्म मुहूर्त से शुरू हुआ स्नान का सिलसिला दिन चढ़ने के साथ और तेज होता गया, जिससे पूरा मेला क्षेत्र भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठा।
महाशिवरात्रि संगम स्नान बना आस्था का महासंगम
विश्व के सबसे बड़े वार्षिक धार्मिक आयोजनों में गिने जाने वाले माघ मेले का रविवार को 44वां और अंतिम दिन रहा। छठवें और आखिरी स्नान पर्व महाशिवरात्रि पर संगम तट पर आस्था की अनूठी तस्वीर देखने को मिली। श्रद्धालु परिवार सहित संगम नोज और विभिन्न घाटों पर पहुंचकर स्नान, पूजा और दान-पुण्य में जुटे नजर आए।
मेला अधिकारी ऋषिराज के अनुसार सुबह 7 बजे तक ही 16 लाख से अधिक श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगा चुके थे, जबकि शाम तक यह आंकड़ा एक करोड़ तक पहुंचने का अनुमान लगाया गया। धार्मिक मान्यता के अनुसार ग्रह-नक्षत्रों के विशेष संयोग के कारण इस बार महाशिवरात्रि का स्नान और भी फलदायी माना जा रहा है, जिस कारण अन्न, वस्त्र और स्वर्ण दान का महत्व बढ़ गया है।
सुरक्षा और व्यवस्थाओं की सख्त निगरानी
माघ मेले के अंतिम स्नान पर्व को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए। लगभग साढ़े तीन किलोमीटर लंबे घाट पर श्रद्धालुओं के सुगम स्नान के लिए अलग-अलग ज़ोन बनाए गए। यूपी पुलिस, पीएसी और आरएएफ की तैनाती के साथ एटीएस कमांडो भी पूरे मेला क्षेत्र में निगरानी करते रहे।
करीब 400 सीसीटीवी कैमरों के जरिए सुरक्षा व्यवस्था की मॉनिटरिंग की जा रही है, जिनमें 150 से ज्यादा एआई आधारित कैमरे शामिल हैं। प्रशासनिक अधिकारी स्वयं ग्राउंड जीरो पर मौजूद रहकर भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था पर नजर बनाए हुए हैं।
शिवालयों में उमड़ी भक्तों की भीड़
महाशिवरात्रि के अवसर पर संगम स्नान के बाद श्रद्धालु शहर के प्रमुख शिव मंदिरों में जलाभिषेक के लिए पहुंचे। मनकामेश्वर मंदिर सहित प्रयागराज के कई पौराणिक शिवालयों में सुबह से ही भक्तों की लंबी कतारें लगी रहीं। घंटों और हर-हर महादेव के जयकारों के बीच पूरा शहर शिवमय माहौल में डूबा नजर आया।
माघ मेला 2026 ने बनाया नया रिकॉर्ड
मेला प्रशासन के मुताबिक माघ मेला 2026 में अब तक 22 करोड़ से अधिक श्रद्धालु संगम स्नान कर चुके हैं, जो अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड माना जा रहा है। महाशिवरात्रि के अंतिम स्नान पर्व के साथ ही इस साल के माघ मेले का औपचारिक समापन हो गया।
आस्था, सुरक्षा और व्यवस्थाओं के समन्वय से इस बार का माघ मेला सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक चेतना और सामूहिक विश्वास का विशाल उत्सव बनकर उभरा।









