नई दिल्ली, 2 अगस्त 2026। रविवार सुबह देश के कई हिस्सों में भूकंप के हल्के झटके महसूस किए गए। मंडी में भूकंप के साथ ही दिल्ली, असम, अरुणाचल प्रदेश और मणिपुर में भी धरती हिली। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) के अनुसार, अलग-अलग समय पर आए इन भूकंपों की तीव्रता 2.4 से 3.4 के बीच रही। राहत की बात यह है कि किसी भी राज्य से जान-माल के नुकसान या बड़े हादसे की सूचना नहीं मिली है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अधिकांश भूकंप कम गहराई में आए, इसलिए कई इलाकों में लोगों ने झटकों को स्पष्ट रूप से महसूस किया। हालांकि इनकी तीव्रता कम होने के कारण किसी बड़े नुकसान की आशंका नहीं बनी।
एक ही दिन में पांच जगह हिली धरती
रविवार की शुरुआत राजधानी दिल्ली में भूकंप के हल्के झटकों से हुई। इसके बाद पूर्वोत्तर राज्यों और हिमाचल प्रदेश में भी क्रमवार धरती कांपी।
राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के अनुसार दर्ज प्रमुख भूकंप इस प्रकार रहे—
- दिल्ली (उत्तर जिला): सुबह 4:14 बजे 2.9 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया। इसकी गहराई 8 किलोमीटर थी।
- बरपेटा (असम): सुबह 5:25 बजे 2.4 तीव्रता का झटका महसूस किया गया। भूकंप की गहराई 4 किलोमीटर रही।
- तवांग (अरुणाचल प्रदेश): सुबह 5:38 बजे 2.8 तीव्रता का भूकंप दर्ज हुआ, जिसकी गहराई 5 किलोमीटर थी।
- मंडी (हिमाचल प्रदेश): सुबह 9:13 बजे 3.1 तीव्रता का भूकंप आया। इसका केंद्र 8 किलोमीटर की गहराई पर दर्ज किया गया।
- विष्णुपुर (मणिपुर): सुबह 9:34 बजे 3.4 तीव्रता का भूकंप रिकॉर्ड किया गया। इसकी गहराई 53 किलोमीटर थी, जो दिनभर में सबसे अधिक रही।
मंडी क्यों माना जाता है भूकंप के लिहाज से संवेदनशील?
हिमाचल प्रदेश का मंडी जिला भूकंपीय दृष्टि से देश के सबसे संवेदनशील इलाकों में शामिल है। मौसम विज्ञान केंद्र, शिमला के अनुसार यह क्षेत्र सिस्मिक जोन-5 में आता है, जिसे भूकंप के लिहाज से सबसे अधिक जोखिम वाला क्षेत्र माना जाता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक इस क्षेत्र में समय-समय पर हल्के और मध्यम तीव्रता के भूकंप आते रहते हैं। ऐसे झटके भूगर्भीय गतिविधियों का हिस्सा होते हैं, लेकिन लगातार निगरानी बनाए रखना जरूरी माना जाता है।
कम गहराई वाले भूकंप क्यों ज्यादा महसूस होते हैं?
अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के अनुसार भूकंप पृथ्वी की सतह से लेकर लगभग 700 किलोमीटर की गहराई तक आ सकते हैं। जब भूकंप कम गहराई पर आता है, तो उसकी भूकंपीय तरंगें कम दूरी तय करके सतह तक पहुंचती हैं। इसी कारण हल्की तीव्रता का भूकंप भी लोगों को अधिक स्पष्ट महसूस हो सकता है।
रविवार को दर्ज अधिकांश भूकंप 4 से 8 किलोमीटर की गहराई पर आए, जबकि मणिपुर के विष्णुपुर में दर्ज भूकंप 53 किलोमीटर की गहराई पर था।
घबराने की नहीं, सतर्क रहने की जरूरत
विशेषज्ञों का कहना है कि 2.4 से 3.4 तीव्रता के भूकंप सामान्य तौर पर हल्के माने जाते हैं और इनसे बड़े नुकसान की संभावना बहुत कम रहती है। फिर भी भूकंप संभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को आपदा प्रबंधन से जुड़े दिशा-निर्देशों की जानकारी रखनी चाहिए।
रविवार को आए सभी झटकों के बाद किसी भी राज्य से जान-माल के नुकसान या किसी बड़ी दुर्घटना की सूचना नहीं मिली है। प्रशासन हालात पर नजर बनाए हुए है और फिलहाल स्थिति पूरी तरह सामान्य बताई जा रही है।













