नई दिल्ली, 03 मार्च 2026। पश्चिम एशिया में भड़कते तनाव के बीच भारत ने अपनी कूटनीतिक सक्रियता और तेज कर दी है। मिडिल ईस्ट संकट के गहराते साये में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को ओमान, कुवैत और कतर के शीर्ष नेतृत्व से सीधे बातचीत कर हालात पर गंभीर चिंता जताई। बातचीत का फोकस सिर्फ क्षेत्रीय स्थिरता नहीं, बल्कि वहां रह रहे करोड़ों भारतीयों की सुरक्षा भी रहा।
मिडिल ईस्ट संकट के बीच प्रधानमंत्री की उच्चस्तरीय बातचीत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ओमान के सुल्तान हैथम बिन तारीक, कुवैत के क्राउन प्रिंस सबाह अल खालेद अल हमेद अल सबाह और कतर के नेतृत्व से टेलीफोन पर विस्तार से चर्चा की। सूत्रों के अनुसार, इन वार्ताओं में हाल के हमलों, समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय अस्थिरता के प्रभावों पर बात हुई।
पिछले तीन दिनों में प्रधानमंत्री पहले ही इजरायल, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब और बहरीन के शीर्ष नेताओं से संपर्क कर चुके हैं। यह स्पष्ट संकेत है कि भारत इस संकट को दूर से देखने की स्थिति में नहीं है—क्योंकि इसके सामाजिक और आर्थिक प्रभाव सीधे भारत से जुड़े हैं।
भारतीय समुदाय सर्वोच्च प्राथमिकता
विदेश मंत्रालय ने विस्तृत बयान जारी कर साफ किया है कि खाड़ी क्षेत्र में रह रहे लगभग एक करोड़ भारतीय नागरिक सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता हैं। मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने कहा कि भारत किसी भी ऐसी स्थिति की अनदेखी नहीं कर सकता जो भारतीयों की सुरक्षा और कल्याण को प्रभावित करे।
बयान में यह भी उल्लेख किया गया कि भारत की ऊर्जा आपूर्ति और व्यापारिक हित इस क्षेत्र से गहराई से जुड़े हैं। यदि स्थिति और बिगड़ती है तो इसका असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है। ऐसे में संयम, संवाद और कूटनीति की अपील दोहराई गई है।
समुद्री हमलों पर कड़ा रुख
भारत ने व्यापारी जहाजों और तेल टैंकरों पर हो रहे हमलों की कड़ी निंदा की है। ओमान के तट के पास एक तेल टैंकर पर हालिया हमले में एक भारतीय नागरिक की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि कुछ अन्य भारतीय लापता बताए जा रहे हैं। यह घटना भारत के लिए केवल कूटनीतिक नहीं, मानवीय चिंता का विषय भी बन गई है।
विदेश मंत्रालय ने कहा है कि “पहले ही कई निर्दोष जानें जा चुकी हैं। भारत इस पर गहरा दुख व्यक्त करता है और संघर्ष को समाप्त करने के लिए संवाद का मार्ग अपनाने की अपील करता है।”
दूतावास अलर्ट मोड में
सरकार ने स्पष्ट किया है कि प्रभावित देशों में भारतीय दूतावास और वाणिज्य दूतावास लगातार भारतीय समुदाय के संपर्क में हैं। नियमित एडवाइजरी जारी की जा रही है और जरूरतमंदों को कांसुलर सहायता दी जा रही है।
दिल्ली में शीर्ष स्तर पर हालात की निगरानी जारी है। प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री अपने समकक्षों से लगातार संपर्क में हैं। सरकार राष्ट्रीय हित को ध्यान में रखते हुए आवश्यक निर्णय लेने को तैयार है।
बदली हुई रणनीति का संकेत?
विशेषज्ञ मानते हैं कि यह सक्रिय कूटनीति भारत की बदली हुई विदेश नीति का संकेत है। भारत अब केवल प्रतिक्रिया देने वाला देश नहीं, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता में भूमिका निभाने वाला जिम्मेदार वैश्विक खिलाड़ी बनकर उभर रहा है।
हालांकि, भारत ने ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की मौत की खबरों पर अब तक आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। इसे संतुलित कूटनीतिक रुख के रूप में देखा जा रहा है।
निष्कर्ष
मिडिल ईस्ट संकट सिर्फ एक क्षेत्रीय संघर्ष नहीं है; यह भारत की ऊर्जा सुरक्षा, प्रवासी भारतीयों के भविष्य और आर्थिक स्थिरता से जुड़ा प्रश्न है। ऐसे में प्रधानमंत्री की सीधी पहल और विदेश मंत्रालय की स्पष्ट रणनीति यह संकेत देती है कि भारत स्थिति पर सतर्क नजर रखे हुए है और हर संभावित चुनौती के लिए तैयार है।













