लखनऊ, 31 मार्च 2026। उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए राहत भरी खबर है। MSP पर फसल खरीद को लेकर योगी सरकार ने रबी सीजन 2026-27 के लिए बड़ा फैसला लिया है। अब चना, मसूर और सरसों जैसी प्रमुख फसलों की सरकारी खरीद 7 अप्रैल से शुरू होकर 30 जून तक जारी रहेगी। इस पहल का उद्देश्य किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाना और उनकी आय में स्थिरता लाना है।
कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने लोक भवन में प्रेस वार्ता के दौरान यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इस बार पूरी प्रक्रिया को डिजिटल और पारदर्शी बनाया गया है, ताकि किसानों को सीधे और समय पर भुगतान मिल सके।
MSP पर फसल खरीद: किसानों को मिलेगा सीधा फायदा
सरकार ने स्पष्ट किया है कि MSP पर फसल खरीद के तहत किसानों को किसी बिचौलिये की जरूरत नहीं पड़ेगी।
- भुगतान सीधे DBT (Direct Benefit Transfer) के जरिए बैंक खातों में भेजा जाएगा
- आधार-सक्षम पीओएस मशीनों से किसानों की पहचान सुनिश्चित होगी
- पारदर्शिता बढ़ेगी और धोखाधड़ी की संभावना कम होगी
यह व्यवस्था किसानों के लिए एक “सुरक्षा कवच” की तरह काम करेगी, जिससे उन्हें बाजार की अनिश्चितता से राहत मिलेगी।
फसलों का MSP और बढ़ी हुई दरें
सरकार ने इस साल MSP में बढ़ोतरी कर किसानों को अतिरिक्त लाभ देने की कोशिश की है।
- चना: 5875 रुपये प्रति क्विंटल (+225 रुपये)
- मसूर: 7000 रुपये प्रति क्विंटल (+300 रुपये)
- सरसों: 6200 रुपये प्रति क्विंटल (+250 रुपये)
- अरहर: 8000 रुपये प्रति क्विंटल
यह बढ़ोतरी सीधे तौर पर किसानों की आय में इजाफा करेगी और दलहन-तिलहन उत्पादन को भी प्रोत्साहन देगी।
खरीद लक्ष्य और व्यापक नेटवर्क
MSP पर फसल खरीद को प्रभावी बनाने के लिए सरकार ने स्पष्ट लक्ष्य तय किए हैं:
- चना: 2.24 लाख मीट्रिक टन
- मसूर: 6.77 लाख मीट्रिक टन
- सरसों: 5.30 लाख मीट्रिक टन
खरीद प्रक्रिया को सुचारु बनाने के लिए कई एजेंसियां मिलकर काम करेंगी, जिनमें NAFED, NCCF, UPPCCU, UPPCF, JAFED और UPSS शामिल हैं। इससे अधिक से अधिक किसानों तक योजना का लाभ पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।
डिजिटल सिस्टम से पारदर्शिता पर जोर
सरकार ने इस बार तकनीक पर खास ध्यान दिया है।
- सभी क्रय केंद्रों पर पीओएस मशीनें लगाई गई हैं
- आधार से सत्यापन अनिवार्य होगा
- भुगतान सीधे खाते में—न कोई देरी, न कोई कटौती
यह बदलाव ग्रामीण अर्थव्यवस्था में डिजिटल विश्वास (Digital Trust) को मजबूत करेगा।
उर्वरक और बीज की पर्याप्त उपलब्धता
कृषि मंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रदेश में उर्वरकों की कोई कमी नहीं है।
- कुल उपलब्धता: 25.41 लाख मीट्रिक टन
- यूरिया: 11.26 लाख मीट्रिक टन
- डीएपी: 5.08 लाख मीट्रिक टन
- एनपीके: 4.64 लाख मीट्रिक टन
- एसएसपी: 3.45 लाख मीट्रिक टन
- पोटाश: 98 हजार मीट्रिक टन
इसके अलावा, 11.25 लाख किसानों को 50% सब्सिडी पर बीज और 12.73 लाख किसानों को मुफ्त बीज वितरित किए गए हैं।
सरकार का दावा है कि 75 जिलों में उर्वरकों की आपूर्ति पूरी तरह संतुलित और डिजिटल निगरानी में है।
सीड पार्क और फॉर्मर रजिस्ट्री पर जोर
प्रदेश में “भारत रत्न चौधरी चरण सिंह सीड पार्क” की स्थापना भी की जा रही है, जिसके लिए 50.84 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं। इसका उद्देश्य उत्तर प्रदेश को बीज उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाना है।
साथ ही, कृषि मंत्री ने किसानों से अपील की है कि वे 15 मई तक फॉर्मर रजिस्ट्री जरूर कराएं, ताकि उन्हें सभी सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सके।
सरकार का बड़ा संदेश
MSP पर फसल खरीद सिर्फ एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि किसानों की आर्थिक सुरक्षा का आधार बनती जा रही है। योगी सरकार का फोकस साफ है—
👉 किसान को सही कीमत
👉 समय पर भुगतान
👉 और कृषि को लाभकारी व्यवसाय बनाना
अगर यह मॉडल सफल रहता है, तो उत्तर प्रदेश देश में कृषि सुधारों का एक मजबूत उदाहरण बन सकता है।








